रामलीला 2026: विरह में विचलित श्रीराम को मिला हनुमान का संबल, सुग्रीव से की मित्रता; सबरी के प्रेम वे जीता दिल
रामनगर की रामलीला में 17वें दिन सीताहरण के बाद शबरी के बेर खिलाने और जटायु को मोक्ष देने की लीला का मंचन हुआ। इस दौरान विरह में विचलित श्रीराम को हनुमान का संबल मिला। साथ ही सुग्रीव से मित्रता की।
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रामलीला के 17वें दिन रविवार को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मानवीय विरह और करुणा का मार्मिक दृश्य जीवंत हो उठा। माता सीता के हरण के बाद गहन वन में भटकते प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। वियोग से व्याकुल प्रभु पशु-पक्षियों और वृक्षों से जानकी का पता पूछते हुए आगे बढ़े।
मार्ग में मरणासन्न अवस्था में मिले गिद्धराज जटायु ने बताया कि लंकापति रावण माता सीता को दक्षिण दिशा की ओर हर ले गया है। प्रभु ने जटायु का अंतिम संस्कार कर उन्हें मोक्ष प्रदान किया। इसके बाद दोनों भाई शबरी के आश्रम पहुंचे। शबरी ने प्रेमविभोर होकर अपने आराध्य को जूठे बेर खिलाए और उन्हें पंपा सरोवर जाने का मार्ग बताकर योगाग्नि में समाहित होकर परमपद प्राप्त किया।
सारस्वत परिवार पांच पीढ़ियों से रामलीला में बेर लाने की परंपरा निभा रहा
रामलीला में शबरी ने रविवार को प्रभु श्रीराम को जो बेर खिलाए, वे मध्य प्रदेश के नीमच से लाए गए थे। लगभग पांच दशक से बनारस का प्रतिष्ठित राजबंधु मिष्ठान भंडार रामलीला में बेर उपलब्ध कराता आ रहा है। इस बार परिवार के विजय सारस्वत, संजय सारस्वत और अन्य सदस्यों के साथ राजीव गुप्ता बेर लेकर रामलीला में पहुंचे, जिन्हें शबरी ने प्रभु श्रीराम को खिलाया। इस बार नीमच में अपने संपर्कों के जरिये बेर मंगाए गए थे। इन्हें लेकर वे बृहस्पतिवार को लीला स्थल पहुंचे।
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ग्रामीण अंचलों में रामलीला और धार्मिक आयोजनों की धूम
शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। चोलापुर के नियार बाजार में गाजे-बाजे, डीजे और हाथी के साथ भव्य रामबारात निकाली गई। चारों भाइयों के साथ बग्गी पर सवार श्रीराम की दो किलोमीटर लंबी पदयात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। वहीं, चौबेपुर और गोकुलपुर (रामबाग) की रामलीला में श्रीराम जन्मोत्सव का मनोहारी मंचन हुआ। पुत्रेष्टि यज्ञ, अग्निदेव द्वारा खीर प्रदान करने और प्रभु के प्राकट्य पर महिलाओं ने सोहर और बधाई गीत गाए। बाल स्वरूप के दर्शन के लिए भगवान शिव के आगमन और नामकरण संस्कार के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
सेंट्रल जेल में 30 बंदी निभा रहे रामलीला के विभिन्न पात्र
शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को सेंट्रल जेल में विधि-विधान से मुकुट पूजन के साथ बंदियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली 10 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ हुआ। जेल परिसर में आयोजित इस मंचन ने बंदियों के बीच भक्ति और उत्साह का संचार किया। रामलीला के पहले दिन बंदियों ने नारद मोह प्रसंग का मंचन किया। मंचन के माध्यम से दिखाया गया कि कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद देवर्षि नारद अहंकार से ग्रसित हो जाते हैं। उनके इस अहंकार का शमन करने के लिए भगवान विष्णु अपनी माया का विस्तार करते हैं, जिसके चलते नारद मुनि को वानर मुख प्राप्त होता है।