Ramcharitmanas: गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई से उठे सियासी बवंडर का होगा समाधान, वाराणसी से शुरू हुई पहल
गोस्वामी तुलसीदास की लिखी मानस चौपाई पर हाल के दिनों में खासा सियासी बवाल मचा था। अब इस सियासी बवंडर को खत्म करने के लिए काशी की धरा से पहल शुरू हुई है।
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गोस्वामी तुलसीदास की लिखी जिस चौपाई को लेकर देशव्यापी राजनीतिक बवंडर उठा था, उसके समाधान की पहल भी काशी की उसी धरा से शुरू हो गई है। काशी में रहने वाले दक्षिण भारतीय विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने चौपाई में ढोल, गंवार, शूद्र और पशुनारी की गलत व्याख्या किए जाने का दावा किया है। उनका कहना है कि आमतौर पर जो व्याख्या की जाती है, वह सत्य से परे है। इसे प्रमाणों के साथ साबित किया है। उन्होंने कई पुस्तकों का हवाला देते हुए बताया कि यह शूद्र नहीं क्षुद्र शब्द है, जिसे बाद में अभिरंजित किया गया है।
काशी में 1972 में प्रकाशित तुलसी ग्रंथावली (द्वितीय खंड) में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित कुंडलिया रामायण में क्षुद्र न द्रवहिं विशेषि तबहिं प्रभु धनु शर लीन्हां। श्रीवल्लभ राम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय के संचालक गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ का कहना है कि यहां पर क्षुद्र शब्द आया है।
गलत पाठ के प्रचार से लोगों में भ्रांति
काशी की नागरी प्रचारिणी सभा से प्राप्त नंबर 2271 सुंदरकांड की लिखित पुस्तक का भी हवाला दिया और कहा कि ढोल गंवार क्षुद्र पशुनारी, ये सब ताड़न के अधिकारी लिखा है।
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ऐसे में ढोल गंवार, शूद्र इस गलत पाठ के प्रचार से लोगों में भ्रांति व्याप्त है। तुलसीदास की इस चौपाई की व्याख्या में उन्होंने कहा कि ढोल को पीटने से ध्वनि आती है। गंवार का अर्थ असभ्य है और क्षुद्र का अर्थ अमरकोश के अनुसार क्रूर है। डा. रामरुस रसिकेश के आदर्श हिन्दी संस्कृत कोश के अनुसार कुटिल है। पशुनारी के अर्थ पर उनका कहना है कि दुष्ट बुद्धि वाली नारी है।
रामचरित मानस काव्य में अनुचित बात को ही जगह ही नहीं
गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ का कहना है कि भगवान राम ने निषादराज को सम्मानित किया। इसी तरह शबरी, तारा, स्वयंप्रभा और मंदोदरी के नारी होते हुए भी उन्हें ताड़ित नहीं किया। उनका कहना है कि रामचरित मानस काव्य है। इसमें अनुचित बात नहीं लिखी जा सकती।
द्राविड़ ने दिया है अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समय
गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ की गिनती काशी के प्रकांड विद्वानों में होती है। उन्होंने अयोध्या में निर्माणाधीन रामलला दरबार में प्राण प्रतिष्ठा के लिए शुभ मुहूर्त निकाला है। इससे पहले उन्होंने जन्मस्थान पर भगवान राम के भव्य मंदिर के शिलान्यास के लिए मुहूर्त निकाला था। द्राविड़ ने काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के शुभ मुहूर्त में भी सलाह दी थी।
काशी के तुलसीघाट पर रामचरित मानस की रचना
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने काशी के तुलसीघाट पर ही रामचरित मानस की रचना की है। इसकी मूल प्रति के अध्ययन में स्पष्ट है कि शूद्र नहीं, क्षुद्र लिखा है। क्षुद्र का अर्थ कुटिलता से है। ऐसे ही पशुनारी का अर्थ दुष्ट महिला से है। शब्दों को अपभ्रंश कर उसके गलत निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।