लखनऊ एनकाउंटर: राकेश पांडेय के पिता ने सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में दायर की याचिका
मुठभेड़ में लखनऊ में मारे गए राकेश पांडेय उर्फ हनुमान के पिता बालदत्त पांडेय ने सोमवार को मीडिया को बताया कि एसटीएफ ने उसके बेटे को फर्जी मुठभेड़ में मारा है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच में अपील दायर करवाई है। उनका कहना है कि उन्हें सरकार पर कतई भरोसा नहीं है।
रविवार को एनकाउंटर में मारा
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में आरोपी और इनामी बदमाश राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय को लखनऊ में रविवार की सुबह एनकाउंटर में मार गिराया था। आरोपी के खिलाफ लखनऊ, रायबरेली, गाजीपुर और मऊ जिले के 11 थानों में मुकदमे दर्ज थे। आरोपी पर एक लाख रुपये का भी इनाम घोषित था। राकेश पांडेय, मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी का करीबी था।
मूल रूप से मऊ के कोपागंज का रहने वाला राकेश पांडेय मुख्तार अंसारी गैंग का शार्प शूटर होने के साथ ही मुख्तार का सबसे भरोसेमंद आदमी भी था। एके 47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से उसका निशाना अचूक था। राकेश ने 1993 में हत्या की पहली वारदात को अंजाम दिया था।
राकेश 16 साल की उम्र में इंजीनियर बनने का सपना संजोए लखनऊ आया। पॉलीटेक्निक में पढ़ाई पूरी करने के बाद गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन लिया। उसने लखनऊ में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल में अपने ही सहपाठी की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। कृष्णानंद राय की हत्या के बाद वह मुख्तार का सबसे खास आदमी बन गया। इसके बाद राकेश ने मुख्तार के साथ मिलकर एक के बाद एक दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया।
एसटीएफ की वाराणसी यूनिट कर रही थी काम
सूत्रों के अनुसार एसटीएफ की वाराणसी यूनिट राकेश की गतिविधियों पर मुखबिरों के जरिए नजर रख रही थी। इसी दौरान उसे राकेश के लखनऊ में होने की खबर मिली थी। इसके बाद लखनऊ एसटीएफ का सहयोग लेते हुए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
दिल्ली सीबीआई कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया
हत्या के करीब साढ़े 13 साल के बाद सीबीआई कोर्ट ने 3 जुलाई 2019 को फैसला दिया था। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने कृष्णानंद राय हत्याकांड से जुड़े सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया था।