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सास के अंतिम संस्कार में शामिल हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह, बेटे पंकज ने नानी को दिया कंधा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 30 Apr 2018 07:00 PM IST
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मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
- फोटो : self
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को काशी के मणिकर्णिका घाट पर अपनी सास समुद्री देवी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। दाह संस्कार से पहले उन्होंने अपनी सास को श्रद्धांजलि दी। कुछ देर रुकने के बाद वापस दिल्ली लौट गए।
उनके बेटे पंकज और नीरज ने अपनी नानी को सड़क से लेकर घाट तक कंधा दिया। इस दौरान श्रद्धांजलि देने वालों और शोक संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लग गया। मुखाग्नि बेटे अशोक सिंह ने दी।
परिवार से जुड़े लोगों के अनुसार रविवार की दोपहर सवा दो बजे मेदिनीनगर बेलवाटिका स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सास ली। वह 87 साल की थी। उनके निधन की सूचना मिलने पर विंध्याचल मंदिर पहुंचे गृहमंत्री बगैर दर्शन किए पूरे परिवार के साथ बनारस रवाना हो गए।
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यहां देर रात कैंटोमेंट होटल में रुके रहे। सुबह जब सास का पार्थिव शरीर आया तो परिवार के साथ गृहमंत्री मणिकर्णिका के मोक्ष द्वार पहुंचे। यहां सभी लोगों ने पार्थिव शरीर पर माला पहनाने के साथ श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद शवयात्रा शुरू हुई जो मणिकर्णिका घाट तक गई। यहां विधि विधान से अंतिम संस्कार किया गया। गृहमंत्री के साढ़ू व भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह के अलावा परिवार के सदस्य और पार्टी के कुछ लोग ही रहे।
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उनके बेटे पंकज और नीरज ने अपनी नानी को सड़क से लेकर घाट तक कंधा दिया। इस दौरान श्रद्धांजलि देने वालों और शोक संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लग गया। मुखाग्नि बेटे अशोक सिंह ने दी।
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परिवार से जुड़े लोगों के अनुसार रविवार की दोपहर सवा दो बजे मेदिनीनगर बेलवाटिका स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सास ली। वह 87 साल की थी। उनके निधन की सूचना मिलने पर विंध्याचल मंदिर पहुंचे गृहमंत्री बगैर दर्शन किए पूरे परिवार के साथ बनारस रवाना हो गए।
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यहां देर रात कैंटोमेंट होटल में रुके रहे। सुबह जब सास का पार्थिव शरीर आया तो परिवार के साथ गृहमंत्री मणिकर्णिका के मोक्ष द्वार पहुंचे। यहां सभी लोगों ने पार्थिव शरीर पर माला पहनाने के साथ श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद शवयात्रा शुरू हुई जो मणिकर्णिका घाट तक गई। यहां विधि विधान से अंतिम संस्कार किया गया। गृहमंत्री के साढ़ू व भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह के अलावा परिवार के सदस्य और पार्टी के कुछ लोग ही रहे।