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पाकिस्तान पूरह से खोखला हो चुका है, डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना राष्ट्रवाद जरूरी है : कलराज मिश्र

Wed, 25 Sep 2019 12:12 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 25 Sep 2019 12:12 PM IST
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Rajasthan Governor Kalraj Mishra will attend BHU program on the birth anniversary Deendayal Upadhyay
कलराज मिश्र। - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तान पूरी तरह से खोखला हो चुका है। उसे अपनी असलियत पता चल चुकी है। पाकिस्तान को लगा कि अगर विश्व के सामने वह खोखलेपन को नहीं प्रकट करता है तो उसे सहानुभूति नहीं प्राप्त होगी। लेकिन उसकी हकीकत जाहिर हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना है कि राष्ट्रवाद जरूरी है। पंडित दीनदयाल ने तो वर्षों पहले राष्ट्रवाद को सर्वोपरि बताया था।

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उक्त विचार राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने व्यक्त किए। वह बुधवार को बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ की ओर से आयोजित पं. दीनदयाल की 103वीं जयंती समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि दुनिया ने पूंजीवाद, साम्राज्यवाद और साम्यवाद सभी को अपनाकर देख लिया, लेकिन समाज में समानता नहीं आई। समाज में समानता के लिए पं. दीनदयाल के एकात्म मानववाद को अपनाने पर विचार किया जाना चाहिए। आज देश ही नहीं, विश्व को ऐसे ही चिंतन की जरूरत है, इसलिए समय-समय पर यह आवाज उठानी चाहिए। कार्यक्रम का शुभारंभ महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया।

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पीठ के चेयर प्रोफेसर प्रो. श्याम कार्तिक मिश्र ने कहा कि एकात्म मानववाद का मूल्यांकन केवल आर्थिक आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक आयाम हैं। बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि पं. दीनदयाल ने भारत को विकास की राह पर लाने के लिए एकात्म मानववाद का चिंतन प्रस्तुत किया है। आरपी पाठक ने कहा कि पंडित जी ने अपनी कार्यशैली से लोगों के जीवन पर अमिट छाप छोड़ी।

उनका दर्शन समाज में समानता की बात करता है। इस दौरान रामसेवक पाठक, डॉ. अभिनव शुक्ला, प्रो. कौशल किशोर मिश्र, डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. स्वर्ण सुमन, डॉ. सीमा मिश्रा मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. वीके शुक्ला, संचालन प्रो. प्रवेश भारद्वाज और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आरपी पाठक ने किया। इस अवसर पर प्रो. एसके मिश्रा की पुस्तक समकालीन भारत में पुनर्विचार का विमोचन किया गया और निबंध व पेंटिंग प्रतियोगिताओं के विजेताओं को राज्यपाल ने पुरस्कृत किया।

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