नौकरी छोड़ इंजीनियर ने शुरू की ‘क्विन्वा’ की खेती, विदेशों में सुपर फूड के नाम से है मशहूर
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वाराणसी में पिंडरा विकास खंड के लार्ड शेख सराय के आनंद मौर्य ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद क्विन्वा (एक प्रकार का खाद्यान) की खेती तीन एकड़ में शुरू की है। अमेरिकी कंपनी की मदद से पिछले साल एक बिस्वा में ट्रायल के बाद पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत से तीन एकड़ में पहली फसल लगाई है। जो 90 से 110 दिनों पक कर तैयार हो जाएगी।
आनंद मौर्य ने बताया कि आईआईटी क्षेत्र में प्रोग्रामिंग के काम और खुद की शुरू की गई आईआईटी कंपनी में काम करने में आनंद नहीं मिला तो 10 बीघा पुस्तैनी खेतों में खेती का काम शुरू किया। पहले सब्जी और अनाज की खेती की। मगर छुट्टा पशुओं और भाव नहीं मिलने से अमेरिका की एक कंपनी के साथ करार कर पहली बार क्विन्वा की खेती का मन बनाया।
पिछले साल ट्रायल के तौर एक बिस्वा में बुआई की। परिणाम अच्छा मिलने पर तीन एकड़ में क्विन्वा की बुआई की है। गेहूं की फसल के साथ ही 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाएगी। इसके साथ केला, लेमनग्रास और सहजन की भी खेती करते हैं। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य ने बताया कि अभी तक जिले में क्विन्वा की खेती नहीं की जाती थी। जानकारी नहीं होने से इसका उत्पादन क्षेत्रफल भी तक शून्य है।
क्या है क्विन्वा
क्विन्वा एक प्रकार का खाद्यान है। जो दक्षिण अमेरिका की फसल है। इसका उत्पादन 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ है। इसकी कीमत 600 से एक हजार रुपये प्रति किलो होती है। इसे छुट्टा पशु नुकसान नहीं पहुंचाते। इसमें पोषक तत्वों भरपूर मात्रा होते हैं।