{"_id":"5dd5a5d18ebc3e54b41041db","slug":"pushkar-pond-varanasi-news-vns495473048","type":"story","status":"publish","title_hn":"मलबे व गोबर से पटा पुष्कर का पाथवे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मलबे व गोबर से पटा पुष्कर का पाथवे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। आनंदकानन वन, नदियों व कुंडों के शहर रूप में जानी जाने वाली काशी में असि व वरुणा नदी के साथ कुंडों-तालाबों के दिन बहुरे तो नहीं, वरन पहले से और ज्यादा खराब होते चले गए। कभी काशी की गली-गली में कुंड व तालाब हुआ करते थे, लेकिन आज गिनती के कुंड व तालाब बचे हैं, वह भी समाप्त होने के कगार पर हैं। सरकार की ओर से जल को बचाने के लिए पूरे देश में अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जल मंत्रालय तक का गठन कर दिया, लेकिन जल व जल स्रोतों को बचाने के लिए अधिकारी गंभीर प्रयास नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण तालाबों के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। कुछ ऐसी ही हालतों का शिकार हुआ पुष्कर तालाब। र
काशी के केदारखंड के अस्सी मोहल्ले में पौराणिक पुष्कर तालाब की स्थिति काफ ी दयनीय है। दो दशक पूर्व शुरू हुए तालाब के सुंदरीकरण का कार्य कब पूरा होगा पता नहीं। जो काम हुआ वह भी खराब हो रहा है। पुष्कर तालाब के उत्तर पूरब के कोने पर बनी पाथवे की दीवार पिछले दिनों नगर में तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बरसात में धराशायी हो गई। आज इस दीवार को गिरे माह भर से ऊपर हो गए, लेकिन आजतक कार्यदायी संस्था सीएनडीएस का कोई अधिकारी इसकी जानकारी लेने तक नहीं आय बनना तो दूर की बात है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनने पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा 4.50 करोड़ की लागत से मायावती के शासनकाल में शुरू हुआ सुन्दरीकरण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ। जो काम हुआ वह भी देखरेख के अभाव में खराब हो रहा है।
नगर के तालाबों के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे जागृति फ ाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर तालाब के चारों तरफ बना पाथवे जिसपर लाखों रुपये खर्च कर टाइल्स लगाई गई है, उसको जानवर रौंद रहे है। इतना ही नहीं आसपास के लोग अपने घरों का मलबा उसपर रखकर उसको खराब कर रहे हैं।
विज्ञापन
रामयश कहते हैं कि पुष्कर तालाब एक बार फि र जलकुंभी से पूरी तरह से पट गया है। दस वर्ष पूर्व अस्सी मुहल्ले के नवयुवकों को लेकर तालाब की सफाई हमलोगों ने की थी जिसमें तालाब से जलकुंभी पूरी तरह से निकाल दिया गया था, लेकिन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं देने से तालाब एक बार फि र जलकुंभी से पट गया है।
विज्ञापन
काशी के केदारखंड के अस्सी मोहल्ले में पौराणिक पुष्कर तालाब की स्थिति काफ ी दयनीय है। दो दशक पूर्व शुरू हुए तालाब के सुंदरीकरण का कार्य कब पूरा होगा पता नहीं। जो काम हुआ वह भी खराब हो रहा है। पुष्कर तालाब के उत्तर पूरब के कोने पर बनी पाथवे की दीवार पिछले दिनों नगर में तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बरसात में धराशायी हो गई। आज इस दीवार को गिरे माह भर से ऊपर हो गए, लेकिन आजतक कार्यदायी संस्था सीएनडीएस का कोई अधिकारी इसकी जानकारी लेने तक नहीं आय बनना तो दूर की बात है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनने पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा 4.50 करोड़ की लागत से मायावती के शासनकाल में शुरू हुआ सुन्दरीकरण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ। जो काम हुआ वह भी देखरेख के अभाव में खराब हो रहा है।
विज्ञापन
नगर के तालाबों के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे जागृति फ ाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर तालाब के चारों तरफ बना पाथवे जिसपर लाखों रुपये खर्च कर टाइल्स लगाई गई है, उसको जानवर रौंद रहे है। इतना ही नहीं आसपास के लोग अपने घरों का मलबा उसपर रखकर उसको खराब कर रहे हैं।
विज्ञापन
रामयश कहते हैं कि पुष्कर तालाब एक बार फि र जलकुंभी से पूरी तरह से पट गया है। दस वर्ष पूर्व अस्सी मुहल्ले के नवयुवकों को लेकर तालाब की सफाई हमलोगों ने की थी जिसमें तालाब से जलकुंभी पूरी तरह से निकाल दिया गया था, लेकिन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं देने से तालाब एक बार फि र जलकुंभी से पट गया है।