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पूर्वाचार्य स्मृति संगीत समारोह में गायन, वादन और नृत्य की बही त्रिवेणी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 23 Jan 2017 11:58 PM IST
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सितार, मृदंगम और तबला की थाप ने किया मंत्रमुग्ध
- फोटो : अमर उजाला
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत सांस्कृतिक आयोजनों की अंतिम कड़ी में पूर्वाचार्य स्मृति संगीत समारोह का आगाज सोमवार को पं. ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में हुआ।
संगीत एवं मंच कला संकाय के इस प्रेक्षागृह में पहले दिन गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी ने संगीत प्रेमियों को विभोर कर दिया। सितार, मृदंग, तबला जैसे वाद्य यंत्रों की तान और थाप ने मंत्रमुग्ध किया।
पद्मश्री बलवंत राय भट्ट की स्मृति में आयोजित समारोह के पहले दिन संगीत समारोह का शुभारंभ अतिथि कलाकार पं. शिवनाथ मिश्र और देवव्रत मिश्रा के सितार वादन से हुआ।
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तबले पर कुबेर मिश्र ने संगत किया। इसके बाद डॉ. विजय कपूर ने राग मधुवंती की अवतारणा की, जिसमें बड़ा ख्याल ...हे लाल बस भिनो और मध्य तय में ...हरिनाम कर गान प्रस्तुत किया। इसी क्रम में डॉ. प्रवीण उद्धव और श्रुतिशील उद्धव का तबला वादन हुआ।
उन्होंने तीन ताल और झपताल में पेशकार कायदा पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत की। वहीं डॉ. राम शंकर ने राग नायकी कान्हड़ा की प्रस्तुति दी, जिसमें विलंबित द्रुत में बंदिश पेश की।
बोल थे ...दरबार तोरे। अंत में दादरा पेश किया। तबला और सितार के साथ ही यहां मृदंग की प्रस्तुति ने समारोह को खास बनाया। डॉ. वी सत्यवरा प्रसाद ने मिश्र चापु, तालम् और रागम, रीतिगौरा प्रस्तुत किया।
डॉ. संगीता सिंह के सितार वादन के बाद प्रो. रेवती साकलकर के गायन से समां बांधा। उन्होंने छोटा ख्याल तीन ताल में ...श्याम मुरारी बनवारी पायलिया झलकार गीत प्रस्तुत की।
अंतिम प्रस्तुति डॉ. विधि नागर के कथक नृत्य की रही, जिसमें उन्होंने कृष्ण वंदना, शिव पार्वती की होली को नृत्य में पिरोया।
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संगीत एवं मंच कला संकाय के इस प्रेक्षागृह में पहले दिन गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी ने संगीत प्रेमियों को विभोर कर दिया। सितार, मृदंग, तबला जैसे वाद्य यंत्रों की तान और थाप ने मंत्रमुग्ध किया।
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पद्मश्री बलवंत राय भट्ट की स्मृति में आयोजित समारोह के पहले दिन संगीत समारोह का शुभारंभ अतिथि कलाकार पं. शिवनाथ मिश्र और देवव्रत मिश्रा के सितार वादन से हुआ।
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तबले पर कुबेर मिश्र ने संगत किया। इसके बाद डॉ. विजय कपूर ने राग मधुवंती की अवतारणा की, जिसमें बड़ा ख्याल ...हे लाल बस भिनो और मध्य तय में ...हरिनाम कर गान प्रस्तुत किया। इसी क्रम में डॉ. प्रवीण उद्धव और श्रुतिशील उद्धव का तबला वादन हुआ।
उन्होंने तीन ताल और झपताल में पेशकार कायदा पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत की। वहीं डॉ. राम शंकर ने राग नायकी कान्हड़ा की प्रस्तुति दी, जिसमें विलंबित द्रुत में बंदिश पेश की।
बोल थे ...दरबार तोरे। अंत में दादरा पेश किया। तबला और सितार के साथ ही यहां मृदंग की प्रस्तुति ने समारोह को खास बनाया। डॉ. वी सत्यवरा प्रसाद ने मिश्र चापु, तालम् और रागम, रीतिगौरा प्रस्तुत किया।
डॉ. संगीता सिंह के सितार वादन के बाद प्रो. रेवती साकलकर के गायन से समां बांधा। उन्होंने छोटा ख्याल तीन ताल में ...श्याम मुरारी बनवारी पायलिया झलकार गीत प्रस्तुत की।
अंतिम प्रस्तुति डॉ. विधि नागर के कथक नृत्य की रही, जिसमें उन्होंने कृष्ण वंदना, शिव पार्वती की होली को नृत्य में पिरोया।