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वाराणसी में हजरत अली की जयंती पर निकला जुलूस, मनाया गया अली डे
Fri, 26 Feb 2021 02:58 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Fri, 26 Feb 2021 02:58 PM IST
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दरगाह-ए-फातमान में हजरत अली की जयंती पर बोलते हुए संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली की जयंती (अली डे) पर हर तरफ जश्न का माहौल छाया रहा। मस्जिदों व मौला अली के रौजे पर रोशनी की विशेष व्यवस्था रही। जगह-जगह महफिल-मीलाद कार्यक्रम हुआ। जिसमें हजरत अली की शान में कसीदे पढ़े गए। टाउनहाल मैदान से जुलूस निकाला गया।
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जो बुलानाला, नीचीबाग, चौक, दालमंडी, नई सड़क, काली महल, पितरकुंडा होते हुए जुलूस लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ। वहीं दुआख्वानी व जोहर की नमाज के बाद दरगाह फातमान स्थित सभागार में सर्व धर्म प्रार्थना सभा होगी। जुलूस का रास्ते भर स्वागत हुआ। जुलूस में शामिल लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था जगह-जगह की गई थी।
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हजरत अली के लिए मजहब की दीवार नहीं
दरगाह-ए-फातमान में हजरत अली की जयंती पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें सभी धर्मों के धर्मगुरु मौजूद रहे। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि आज हम हजरत अली की पैदाइश का जश्न मना रहे हैं। लोग कहते हैं कि इस्लाम से खतरा है लेकिन सच्चाई तो ये है कि खतरा उनसे हैं जो असल में मजहब को नहीं जानते, फिर चाहे वे जिस मजहब के हों।
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फरमान हैदर ने कहा कि अली के लिए मजहब की दीवार नहीं होनी चाहिए। अली सिर्फ मुसलमानों या शियाओं के नहीं हैं। हमारे लिए हजरत अली वैसे ही हैं जैसे भगवान राम और कृष्ण। फादर यूजीन ने कहा कि मौला सिर्फ़ मुसलमानों के नहीं बल्कि सभी के हैं। उन्होंने प्यार मोहब्बत का पैगाम दिया। इस मौके पर कई शायरों ने कलाम पेश किया।