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वाराणसी का यह गांव है बड़ा खास, पीएम मोदी करेंगे दौरा, यहीं करेंगे गो पूजन
amarujala.com, written by- प्रदीप मिश्र
Updated Fri, 22 Sep 2017 01:44 PM IST
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शाहंशाहपुर गांव से रहा है मुगलों, अंग्रेजों और स्वतंत्रता सेनानियों का अजब-गजब का रिश्ता
- फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 सितंबर को इस गांव में पशु आरोग्य मेला का शुभारंभ ही नहीं करेंगे, वह यहां गो पूजन भी करेंगे। पहली बार पीएम मोदी की यहां जनसभा भी होगी। वाराणसी से करीब 25 किमी दूर आराजीलाइन ब्लॉक का ये गांव कुछ खास है।
शहर के कोलहाल से बचे गंगा किनारे बसे इस गांव का इतिहास दूसरे गांवों से जुदा करता है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में आने वाला यह गांव कई मायनों में ऐतिहासिक है।
समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया, राजनारायन, पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी और राज्यसभा के उपसभापति और केंद्रीय कृषि मंत्री श्यामलाल यादव का यहां से गहरा नाता रहा है।
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फिलहाल, इसी गांव के नीलरतन सिंह पटेल ‘नीलू’ अपना दल (एस) से विधायक हैं। प्रधानमंत्री द्वारा गांवों को गोद लिए जाने की शुरूआत में चुना गया जयापुर गांव यहां से महज चार किलोमीटर दूर है।
आराजीलाइन ब्लाक में गंगा किनारे बसे जिले के इस अंतिम गांव में मुगल बादशाह हुमायूं ने अपने लाव-लश्कर के साथ एक रात के लिए पड़ाव डाला था।
15वीं शताब्दी में चौसा में हुए युद्ध के बाद शेरशाह सूरी ने जब हुमायूं का पीछा किया तो हुमायूं ने चुनार किले के नजदीक से गंगा को पार कर यहीं पनाह ली थी।
जब हुमायूं को दोबारा शासन करने का मौका मिला तो उसने इस गांव का पता लगवाया और इसके बाद ही इसका नाम शाहंशाहपुर पड़ गया। इससे पहले इसका प्रचलित नाम कालूपुर था।
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शहर के कोलहाल से बचे गंगा किनारे बसे इस गांव का इतिहास दूसरे गांवों से जुदा करता है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में आने वाला यह गांव कई मायनों में ऐतिहासिक है।
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समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया, राजनारायन, पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी और राज्यसभा के उपसभापति और केंद्रीय कृषि मंत्री श्यामलाल यादव का यहां से गहरा नाता रहा है।
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फिलहाल, इसी गांव के नीलरतन सिंह पटेल ‘नीलू’ अपना दल (एस) से विधायक हैं। प्रधानमंत्री द्वारा गांवों को गोद लिए जाने की शुरूआत में चुना गया जयापुर गांव यहां से महज चार किलोमीटर दूर है।
आराजीलाइन ब्लाक में गंगा किनारे बसे जिले के इस अंतिम गांव में मुगल बादशाह हुमायूं ने अपने लाव-लश्कर के साथ एक रात के लिए पड़ाव डाला था।
15वीं शताब्दी में चौसा में हुए युद्ध के बाद शेरशाह सूरी ने जब हुमायूं का पीछा किया तो हुमायूं ने चुनार किले के नजदीक से गंगा को पार कर यहीं पनाह ली थी।
जब हुमायूं को दोबारा शासन करने का मौका मिला तो उसने इस गांव का पता लगवाया और इसके बाद ही इसका नाम शाहंशाहपुर पड़ गया। इससे पहले इसका प्रचलित नाम कालूपुर था।
वाराणसी में सर्वाधिक स्वतंत्रता सेनानियों का गांव
पीएम आगमन के मद्देनजर गांव में चल रही तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजों से जूझने वाले एक से बढ़कर एक रणबांकुरे इस गांव की माटी में जन्मे। कृपाचार्य राय, माताधार राय, प्रद्युम्न सिंह, हबीबुल्ला खान, रामकृष्ण सिंह और पुरुषोत्तम राय यहीं की थाती हैं। सभी सेनानियों को अंग्रेजों के जुल्म का विरोध करने के कारण सजा हुई थी।
सेनानी रामकृष्ण सिंह आज भी बदल रहे भारत के गवाह हैं। वाराणसा जिले में सर्वाधिक स्वतंत्रता सेनानियों का गांव होने के कारण प्रदेश सरकार ने इसे स्वर्ण जयंती गांव के रूप में चुना था।
आजादी से पहले यह गांव अंग्रेजों की छावनी भी था। यहां अंग्रेज सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाता था। घोड़ा अस्पताल भी था और घोड़ों के रखरखाव के कारण गंगा किनारे घोड़ा घाट का अस्तित्व आज भी है।
बताया तो यह भी जाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के समय अचानक आई गड़बड़ी के कारण अंग्रेजों के एक हवाई जहाज को आपात स्थिति में गांव की लहलहाती फसल के बीच उतार दिया था। गांव के लोग कौतूहलवश हवाई जहाज के नजदीक पहुंच गए। भीड़ देखकर अनहोनी की आशंका से अंग्रेज भयाक्रांत हो गए।
तभी गांव के रमाशंकर सिंह ने विमान के पायलट से अंग्रेजी में बात की तो अंग्रेज निश्चिंत होने के साथ-साथ प्रभावित भी हो गए। इनाम के तौर पर अंग्रेजों ने करीब 900 बीघे की आराजी उनको देने का एलान कर दिया। आराजी लाइन ब्लाक इसी घटना का स्मरण कराता है।
सेनानी रामकृष्ण सिंह आज भी बदल रहे भारत के गवाह हैं। वाराणसा जिले में सर्वाधिक स्वतंत्रता सेनानियों का गांव होने के कारण प्रदेश सरकार ने इसे स्वर्ण जयंती गांव के रूप में चुना था।
आजादी से पहले यह गांव अंग्रेजों की छावनी भी था। यहां अंग्रेज सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाता था। घोड़ा अस्पताल भी था और घोड़ों के रखरखाव के कारण गंगा किनारे घोड़ा घाट का अस्तित्व आज भी है।
बताया तो यह भी जाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के समय अचानक आई गड़बड़ी के कारण अंग्रेजों के एक हवाई जहाज को आपात स्थिति में गांव की लहलहाती फसल के बीच उतार दिया था। गांव के लोग कौतूहलवश हवाई जहाज के नजदीक पहुंच गए। भीड़ देखकर अनहोनी की आशंका से अंग्रेज भयाक्रांत हो गए।
तभी गांव के रमाशंकर सिंह ने विमान के पायलट से अंग्रेजी में बात की तो अंग्रेज निश्चिंत होने के साथ-साथ प्रभावित भी हो गए। इनाम के तौर पर अंग्रेजों ने करीब 900 बीघे की आराजी उनको देने का एलान कर दिया। आराजी लाइन ब्लाक इसी घटना का स्मरण कराता है।
गांव की साक्षरता अपने आप में रिकॉर्ड
पीएम आगमन के मद्देनजर गांव और उसके बाहर रंग रोगन कार्य तेज
- फोटो : अमर उजाला
शाहंशाहपुर की जनसंख्या इस समय साढ़े आठ हजार से अधिक है। 2011 की जनगणना में गांव की आबादी 7037 थी। दलित समुदाय की बहुलता के कारण मायावती सरकार में इसे अंबेडकर गांव घोषित किया गया था।
टमाटर और मिर्च की खेती के लिए मशहूर हो चुके इसी गांव में केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद का एकमात्र केंद्रीय सब्जी अनुसंधान संस्थान भी स्थित है। पीएम मोदी जिस जगह नवनिर्मित गोशाला और गो वत्स शाला का उद्घाटन करेंगे, वह राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र यहां 1950 में स्थापित हुआ था।
निकटवर्ती गांव जक्खिनी के निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बाद में कांग्रेस विधायक चुने गए ऋषि नारायण शास्त्री के प्रयास से ही प्रक्षेत्र की स्थापना हुई थी।
गांव में साक्षरता 85 फीसदी के करीब है, क्योंकि गांव में लड़के-लड़कियों के लिए प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल तो हैं ही, गांव में महामना पं. मदन मोहन मालवीय के नाम पर इंटर कॉलेज भी है। आईएएस सत्य साधन सिंह और राजेश कुमार सिंह इसी गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
टमाटर और मिर्च की खेती के लिए मशहूर हो चुके इसी गांव में केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद का एकमात्र केंद्रीय सब्जी अनुसंधान संस्थान भी स्थित है। पीएम मोदी जिस जगह नवनिर्मित गोशाला और गो वत्स शाला का उद्घाटन करेंगे, वह राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र यहां 1950 में स्थापित हुआ था।
निकटवर्ती गांव जक्खिनी के निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बाद में कांग्रेस विधायक चुने गए ऋषि नारायण शास्त्री के प्रयास से ही प्रक्षेत्र की स्थापना हुई थी।
गांव में साक्षरता 85 फीसदी के करीब है, क्योंकि गांव में लड़के-लड़कियों के लिए प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल तो हैं ही, गांव में महामना पं. मदन मोहन मालवीय के नाम पर इंटर कॉलेज भी है। आईएएस सत्य साधन सिंह और राजेश कुमार सिंह इसी गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए हर कोई उत्सुक
शाहंशाहपुर गांव में उत्सव जैसी तैयारियां
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए गांव की दीवारों पर रंग-रोगन और सड़कों की मरम्मत ही नहीं की जा रही है, बल्कि गांव के हरे-भरे माहौल के बीच उनकी पहली जनसभा के लिए 10-12 हेक्टेयर में जर्मन हैंगर तकनीक से पंडाल बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है। अधिकारियों की निगरानी में मजदूर हेलीपैड बनाने में जुटे हुए हैं। 23 सितंबर को इसी गांव में पशु आरोग्य मेला का शुभारंभ करेंगे। यहां गो पूजन भी करेंगे।
इसी गांव की मुसहर बस्ती से पीएम मोदी जिले में ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम के जरिए लोगों से ‘स्वच्छ भारत’ के लिए अपील करेंगे। ग्रामीणों को भी अपने प्रधानमंत्री से ढेरों उम्मीदें और वे अपने स्तर पर भी उनके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। गांव का हर व्यक्ति महत्वपूर्ण हो गया है। सभा स्थल के लिए राजकीय कृषि एवं पशुधन प्रक्षेत्र की जमीन पर भारी-भरकम पंडाल बनाया जा रहा है।
इस पंडाल में 20 हजार से अधिक लोग बैठ सकेंगे। पीएम के मंच के लिए पंडाल अलग से बनाया जा रहा है। इसके इर्द-गिर्द की जमीन को समतल करने के लिए दर्जनों ट्रैक्टर दिन-रात लगे हुए हैं। काम की तेज गति को देखते हुए लग रहा है कि बृहस्पतिवार की शाम तक यहां की तैयारियां पूरी हो जाएंगी। पहले जनसभा के लिए गांव के मालवीय इंटर कॉलेज का मैदान तय किया गया था।
बाद में इसे बदलकर प्रक्षेत्र की जमीन पर कर दिया गया। कॉलेज के मैदान में अब वाहनों की पार्किंग होगी। शाम करीब चार बजे यहां एसपीजी की टीम पहुंची और जायजा लेने के बाद संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी।
इसी गांव की मुसहर बस्ती से पीएम मोदी जिले में ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम के जरिए लोगों से ‘स्वच्छ भारत’ के लिए अपील करेंगे। ग्रामीणों को भी अपने प्रधानमंत्री से ढेरों उम्मीदें और वे अपने स्तर पर भी उनके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। गांव का हर व्यक्ति महत्वपूर्ण हो गया है। सभा स्थल के लिए राजकीय कृषि एवं पशुधन प्रक्षेत्र की जमीन पर भारी-भरकम पंडाल बनाया जा रहा है।
इस पंडाल में 20 हजार से अधिक लोग बैठ सकेंगे। पीएम के मंच के लिए पंडाल अलग से बनाया जा रहा है। इसके इर्द-गिर्द की जमीन को समतल करने के लिए दर्जनों ट्रैक्टर दिन-रात लगे हुए हैं। काम की तेज गति को देखते हुए लग रहा है कि बृहस्पतिवार की शाम तक यहां की तैयारियां पूरी हो जाएंगी। पहले जनसभा के लिए गांव के मालवीय इंटर कॉलेज का मैदान तय किया गया था।
बाद में इसे बदलकर प्रक्षेत्र की जमीन पर कर दिया गया। कॉलेज के मैदान में अब वाहनों की पार्किंग होगी। शाम करीब चार बजे यहां एसपीजी की टीम पहुंची और जायजा लेने के बाद संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी।
पीएम यहां गड्ढ़ा खोदकर करेंगे शौचालय के लिए आह्वान
मुसहर बस्ती में चल रही तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र की सड़कों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। गोशाला और गोवत्स शाला में रंगाई-पुताई के साथ यहां सीमेंट और ईंटों के काम के साथ-साथ सफाई भी की जा रही है। प्रक्षेत्र में पशु चिकित्सा और पशु पालन से जुड़े अधिकारी पंडाल से लेकर गो पूजा की तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं।
थोड़ी-थोड़ी देर में लखनऊ और नई दिल्ली से की जाने वाली क्वेरी से उनके मोबाइल फोन घनघना उठते हैं। दस्तावेजीकरण का काम किया जा रहा है, ताकि पूछते ही हर सवाल का जवाब दे दिया जाए।
गांव पहुंचने वाली जिन सड़कों पर गड्ढ़े हैं, उन पर तारकोल बिछाने के लिए मजदूर मिट्टी हटाने के लिए झाड़ू लगा रहे हैं। हर रास्ता चमाचम करने की जद्दोजहद जारी है। सवा सौ कर्मचारी हाथों में झाड़ू लिए घूम रहे हैं।
यहां की मुसहर बस्ती में पीएम मोदी दो पिट वाले जलबंद शौचालय के लिए एक गड्ढ़ा खोदकर दूसरा गड्ढा खुद खोदने का आह्वान लाभार्थियों से करेंगे। यहां 1995-96 में मुसहर समुदाय के 19 लोग थे। अब इनकी संख्या 21 हो गई है। उनके आवासों की रंगाई-पुताई करवाई जा रही है।
दीवारों पर स्वच्छता के नारे लिखने के साथ ही स्वच्छता से संबंधित चित्र भी उकेरे जा रहे हैं। पीएम के आगमन के मद्देनजर बस्ती की लल्ला देवी अपने घर की मिट्टी से पुताई कर रही हैं। कहती हैं कि वह अपने घर को चमकाना चाहती हैं ताकि प्रधानमंत्री जी यहां आए तो उसके घर को साफ -सुथरा देखकर प्रसन्न हो जाएं।
थोड़ी-थोड़ी देर में लखनऊ और नई दिल्ली से की जाने वाली क्वेरी से उनके मोबाइल फोन घनघना उठते हैं। दस्तावेजीकरण का काम किया जा रहा है, ताकि पूछते ही हर सवाल का जवाब दे दिया जाए।
गांव पहुंचने वाली जिन सड़कों पर गड्ढ़े हैं, उन पर तारकोल बिछाने के लिए मजदूर मिट्टी हटाने के लिए झाड़ू लगा रहे हैं। हर रास्ता चमाचम करने की जद्दोजहद जारी है। सवा सौ कर्मचारी हाथों में झाड़ू लिए घूम रहे हैं।
यहां की मुसहर बस्ती में पीएम मोदी दो पिट वाले जलबंद शौचालय के लिए एक गड्ढ़ा खोदकर दूसरा गड्ढा खुद खोदने का आह्वान लाभार्थियों से करेंगे। यहां 1995-96 में मुसहर समुदाय के 19 लोग थे। अब इनकी संख्या 21 हो गई है। उनके आवासों की रंगाई-पुताई करवाई जा रही है।
दीवारों पर स्वच्छता के नारे लिखने के साथ ही स्वच्छता से संबंधित चित्र भी उकेरे जा रहे हैं। पीएम के आगमन के मद्देनजर बस्ती की लल्ला देवी अपने घर की मिट्टी से पुताई कर रही हैं। कहती हैं कि वह अपने घर को चमकाना चाहती हैं ताकि प्रधानमंत्री जी यहां आए तो उसके घर को साफ -सुथरा देखकर प्रसन्न हो जाएं।