राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नाश्ते में चखा बनारसी जलेबी का स्वाद, दिल्ली के लिए हुए रवाना
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिवसीय पूर्वांचल दौरे के बाद आज दिल्ली रवाना हो गए। सोमवार को उन्होंने वाराणसी के ताज होटल में एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। राष्ट्रपति ने बरेका गेस्ट हाउस में सोमवार की सुबह जगने पर नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद प्राणायाम किया। इसके बाद उन्होंने बनारसी चाय पी। लोगों से मिलने के पूर्व नाश्ते में उन्हें सैंडविच, पूरी व आलू, मटर, गोभी की सब्जी और जलेबी दी गईं।
राष्ट्रपति के वीवीआईपी रूम में सेब, केला, अंगूर व अन्य फल पहले से ही रखे गए थे। सोमवार की सुबह नाश्ता करने के बाद दस बजे उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की। गेस्ट हाउस में मिलने वालों में कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव और उनकी मां ज्योत्सना श्रीवास्तव (पूर्व कैंट विधायक) व अन्य प्रबुद्धजनों ने औपचारिक मुलाकात की।
बरेका गेस्ट हाउस पर मंत्री नीलकण्ठ तिवारी भी पहुंचे। राष्ट्रपति का काफिला 11 बजकर 20 पर गेस्ट हाउस से सड़क मार्ग द्वारा नदेसर स्थित एक तारांकित होटल के लिए रवाना हो गया।
मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी के दरबार में परिवार संग लगाई हाजिरी
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को मां विंध्यवासिनी का विधिवत दर्शन पूजन किया। उनके साथ देश की प्रथम महिला, उनकी धर्मपत्नी सविता भी मौजूद रहीं। निर्धारित समय से लगभग एक घंटा विलंब से पहुंचे राष्ट्रपति का अष्टभुजा स्थित हेलीपैड पर सीएम योगी आदित्यनाथ, सांसद अनुप्रिया पटेल व सभी पांचों विधायक सहित मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्र, जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने स्वागत किया।
स्वागत के बाद राष्ट्रपति अष्टभुजा स्थित राजकीय अतिथि गृह पहुंचे। वहां पर उन्होंने थोड़ा विश्राम किया और हल्का भोजन किया। इसके बाद वे मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए रवाना हो गए। मां विंध्यवासिनी दरबार में उनका जोरदार स्वागत हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति ने विंध्य कॉरिडोर के कार्य को देखा।
सेवा कुंज आश्रम में वनवासी समागम को किया संबोधित
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोनभद्र के बभनी स्थित सेवा कुंज आश्रम में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने 250 छात्रों के लिए बने अंत्योदय छात्र कुल, बिरसा मुंडा बनवासी विद्यापीठ का लोकार्पण किया। साथ ही छात्रावास के लिए भूमि पूजन भी किया। उन्होंने सेवा कुंज आश्रम में संबोधित करते हुए कहा कि आज मुझे भगवान बिरसा मुंडा जी का स्मरण हो रहा है। उन्होंने अंग्रेजों के शोषण से वन संपदा और वनवासी समुदाय की संस्कृति की रक्षा के लिए अनवरत युद्ध किया और शहीद हुए।