काशी विश्वनाथ धाम: 200 साल पुराना खत्री चबूतरा ध्वस्त होने से बचा, जानें पूरा मामला
काशी विश्वनात धाम बनाने का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी कारण 200 साल पुराना खत्री चबूतरा बुलडोजर से ध्वस्त किया जाने वाला था। लेकिन खत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने पहुंचकर ऐसा होने से बचा लिया।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम परिक्षेत्र में आने वाला 200 साल पुराना खत्री चबूतरा ध्वस्त होने से बच गया। खत्री समाज की सजगता और विरोध के कारण प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। मंत्री और विधायक ने चबूतरे के साथ छेड़छाड़ नहीं करने का आश्वासन दिया है।
मंगलवार को खत्री चबूतरे को ध्वस्त करने के लिए काशी विश्वनाथ धाम से बुलडोजर पहुंचा था। चबूतरे को तोड़ने की तैयारी की जा रही थी, इसकी जानकारी जैसे ही खत्री समाज के लोगों को हुई तो उन्होंने विधायक अशोक धवन से संपर्क किया। इसके बाद धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी भी सूचना पर पहुंचे। खत्री समाज के विरोध को देखते हुए मंत्री ने मंडलायुक्त से बात की और खत्री समाज की धरोहर को ध्वस्त किए बिना कार्य काम को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
खत्री समाज के अध्यक्ष राकेश टंडन ने बताया कि कॉरिडोर का निर्माण कर रही संस्था के आर्किटेक्ट घाट पर नया शवदाह गृह बनाने जा रहे हैं। उन लोगों ने इस चबूतरे को भी तोड़ने की योजना बनाई थी। विरोध के बाद संस्कृति मंत्री नीलकंठ तिवारी ने आश्वासन दिया है कि ऐतिहासिक चबूतरे के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
काशी नरेश और डोमराजा का यहीं हुआ अंतिम संस्कार
खत्री समाज के अध्यक्ष राकेश टंडन ने बताया कि मणिकर्णिका घाट स्थित चबूतरे पर न सिर्फ खत्री समाज, बल्कि सारस्वत समाज, सिंधी समाज के मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यही नहीं काशी की कई महान विभूतियों का अंतिम संस्कार भी इसी चबूतरे पर किया जा चुका है। इनमें काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह, पद्मविभूषण गिरिजा देवी सहित कई विभूतियों का अंतिम संस्कार भी यहीं हुआ। पिछले साल डोमराजा जगदीश चौधरी का अंतिम संस्कार भी यहीं हुआ था।