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बाबा विश्वनाथ दरबार से सीधे गंगा दर्शन कराने की तैयारी हुई तेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 30 Jan 2018 01:01 PM IST
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हरिद्वार में हर की पैड़ी की तरह विकसित करने की बन रही योजना
- फोटो : amarujala
बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार तक अब गंगा का जल सीधे पहुंचे और वहीं से गंगा दर्शन हो सके इसके लिए वीडीए ने कवायद तेज कर दी है। दरअसल हरिद्वार में हर की पैड़ी की तरह काशी में भी इसे विकसित करने की योजना है। इस पर 480 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
सोमवार को वीडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार और सचिव विशाल सिंह ने अधीनस्थों के साथ मौका मुआयना किया और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से गंगाघाट तक आने वाले भवनों का सर्वे भी कराया। मंदिर से घाट तक 450 मीटर की दूरी है।
दोपहर में उपाध्यक्ष अधिकारियों के साथ बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और दशाश्वमेध घाट से बाबा द्वार तक के भवनों की जांच पड़ताल की। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए अधिकारियों ने मंथन किया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब तीन महीने का समय दिया है।
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इसका आकलन करने के लिए कि योजना कितनी कारगर होगी। सर्वे में आए 166 मकानों को वीडीए शिफ्ट कराएगा। लेकिन वीडीए और प्रशासन के लिए आसान काम नहीं है। वीडीए सचिव ने बताया कि पहले भी भवनों की जांच कराई गई थी।
फिलहाल सर्वे में आए भवनों में उनकी श्रेणी अलग-अलग तैयार कराई जा रही है। इसमें कई ट्रस्ट की भी संपत्तियां हैं। काफी पुराने व जर्जर मकान भी मंदिर से लेकर घाट तक हैं। 480 करोड़ की योजना है। यह लागत घटबढ़ भी सकती है।
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सोमवार को वीडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार और सचिव विशाल सिंह ने अधीनस्थों के साथ मौका मुआयना किया और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से गंगाघाट तक आने वाले भवनों का सर्वे भी कराया। मंदिर से घाट तक 450 मीटर की दूरी है।
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दोपहर में उपाध्यक्ष अधिकारियों के साथ बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और दशाश्वमेध घाट से बाबा द्वार तक के भवनों की जांच पड़ताल की। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए अधिकारियों ने मंथन किया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब तीन महीने का समय दिया है।
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इसका आकलन करने के लिए कि योजना कितनी कारगर होगी। सर्वे में आए 166 मकानों को वीडीए शिफ्ट कराएगा। लेकिन वीडीए और प्रशासन के लिए आसान काम नहीं है। वीडीए सचिव ने बताया कि पहले भी भवनों की जांच कराई गई थी।
फिलहाल सर्वे में आए भवनों में उनकी श्रेणी अलग-अलग तैयार कराई जा रही है। इसमें कई ट्रस्ट की भी संपत्तियां हैं। काफी पुराने व जर्जर मकान भी मंदिर से लेकर घाट तक हैं। 480 करोड़ की योजना है। यह लागत घटबढ़ भी सकती है।