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बीएचयू में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव के मामले ने तूल पकड़ा, रातों-रात चिपकाए पोस्टर

Wed, 08 Jan 2020 10:25 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 08 Jan 2020 10:25 AM IST
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Posters pasted on BHU campus in protest to discriminate against Hindi speaking candidates
कुलपति के विरोध में चिपकाए गए पोस्टर। - फोटो : अमर उजाला।

बीएचयू में प्राचीन इतिहास विभाग में शिक्षक नियुक्ति में साक्षात्कार के दौरान हिंदी भाषी अभ्यर्थियों से कुलपति द्वारा भेदभाव करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब तक विरोध प्रदर्शन के बाद अब अभ्यर्थी और छात्रों ने विरोध तेज कर दिया है।

Posters pasted on BHU campus in protest to discriminate against Hindi speaking candidates

मंगलवार देर रात छात्रों ने पूरे परिसर में कुलपति के विरोध में पोस्टर चस्पा कर इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इसमें कुलपति से राजभाषा के सम्मान की अपील की गई है। इसके अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखकर भी इसकी शिकायत कर कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी छात्रों ने की है।

Posters pasted on BHU campus in protest to discriminate against Hindi speaking candidates

ये है मामला
3 जनवरी शुक्रवार को साक्षात्कार के दौरान हिंदी भाषी प्रतिभागियों ने भेदभाव का आरोप लगाया। अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कुलपति पर मौलिक अधिकार और मानवाधिकार हनन का भी आरोप लगाया।

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Posters pasted on BHU campus in protest to discriminate against Hindi speaking candidates

अभ्यर्थियों का कहना था कि कुलपति ने हिंदी भाषी अभ्यर्थियों को अधिकतम तीन से चार मिनट में साक्षात्कार कक्ष से बाहर निकाल दिया। कुलपति के इस व्यवहार से हिंदी भाषी अभ्यर्थियों में न सिर्फ गुस्सा है, बल्कि वह स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं।

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Posters pasted on BHU campus in protest to discriminate against Hindi speaking candidates

इसके बाद 4 जनवरी को छात्रों ने कुलसचिव से भी मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने कुल सचिव को शिकायती पत्र सौंपा। जिसमें लिखा कि बीएचयू में चल रही नियुक्तियों के साक्षात्कार में दर्शन, इतिहास, प्राचीन इतिहास, संस्कृत आदि कई विभागों के हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ लगातार भेदभाव जैसा व्यवहार किया जा रहा है। इस व्यवहार से भारतीय संविधान और राज्य भाषा हिंदी का अपमान हो रहा है।

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