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पीएम की तारीफ से बढ़ी मेधा की चमक
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Tue, 23 Feb 2016 02:15 AM IST
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पीएम मोदी के हाथों सम्मान पाकर स्वर्ण पदक हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं की खुशी का ठिकाना न रहा। उत्साह और आत्मविश्वास से इनके चेहरे की चमक देखते बन रही थी।
एक-एक कर 33 मेधावियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपाधि और डॉ. कर्ण सिंह ने स्वर्ण पदक से नवाजा। इनमें प्रशस्ति सिंह, धीरज कुमार पांडेय और शशिकांत मिश्र को चांसलर मेडल, बीएचयू मेडल सहित तीन-तीन पदकों से नवाजा गया। स्वर्ण पदक पाने वाले मेधावियों की आंखों में बेहतर भविष्य के सपने और कुछ कर दिखाने का जब्जा साफ झलक रहा था...।
छात्रा प्रशस्ति सिंह ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए जीवन भर अविस्मरणीय रहेगा। बीएचयू के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री का हाथों यह मुझे जो मान मिला, उसे मेरे माता-पिता बेहद खुश हैं। मैं आगे आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हूं। पीएम ने आज जो मंत्र दिए उसे जीवन में उतारूंगी।
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वहीं, छात्र श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि आज जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि हम अपनी संस्कृति के बूते विश्व पर में राज कर सकते हैं। इस लिहाज से मैं कुशल अध्यापक बनकर पूरी दुनिया में संस्कृत भाषा का एक नई पहचान दिलाना चाहता हूं। इस दिशा में हर संभव पयास करता रहूंगा।
मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली एक छात्रा को एमए संस्कृत विषय में स्वर्ण पदक मिला। बेनियाबाग की रहने वाली इस मेधावी छात्रा शाहिना तहसीन का कहना है कि मेरी बचपन से ही संस्कृत में रुचि थी। संस्कृत को जानने-समझने के लिए ही मैंने इस विषय को चुना। इसमें मेरे घरवालों ने भी मेरा पूरा सहयोग किया। मेरे पापा सेराज अहमद का लकड़ी के खिलौनों का कारोबार है। आज मेरे घर वाले भी बेहद खुश हैं। उसने बताया कि इस समय मैं इस्लाम और वैदिक दर्शन पर मैं बीएचयू में ही शोध कर रही हूं।
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एक-एक कर 33 मेधावियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपाधि और डॉ. कर्ण सिंह ने स्वर्ण पदक से नवाजा। इनमें प्रशस्ति सिंह, धीरज कुमार पांडेय और शशिकांत मिश्र को चांसलर मेडल, बीएचयू मेडल सहित तीन-तीन पदकों से नवाजा गया। स्वर्ण पदक पाने वाले मेधावियों की आंखों में बेहतर भविष्य के सपने और कुछ कर दिखाने का जब्जा साफ झलक रहा था...।
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छात्रा प्रशस्ति सिंह ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए जीवन भर अविस्मरणीय रहेगा। बीएचयू के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री का हाथों यह मुझे जो मान मिला, उसे मेरे माता-पिता बेहद खुश हैं। मैं आगे आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हूं। पीएम ने आज जो मंत्र दिए उसे जीवन में उतारूंगी।
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वहीं, छात्र श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि आज जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि हम अपनी संस्कृति के बूते विश्व पर में राज कर सकते हैं। इस लिहाज से मैं कुशल अध्यापक बनकर पूरी दुनिया में संस्कृत भाषा का एक नई पहचान दिलाना चाहता हूं। इस दिशा में हर संभव पयास करता रहूंगा।
मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली एक छात्रा को एमए संस्कृत विषय में स्वर्ण पदक मिला। बेनियाबाग की रहने वाली इस मेधावी छात्रा शाहिना तहसीन का कहना है कि मेरी बचपन से ही संस्कृत में रुचि थी। संस्कृत को जानने-समझने के लिए ही मैंने इस विषय को चुना। इसमें मेरे घरवालों ने भी मेरा पूरा सहयोग किया। मेरे पापा सेराज अहमद का लकड़ी के खिलौनों का कारोबार है। आज मेरे घर वाले भी बेहद खुश हैं। उसने बताया कि इस समय मैं इस्लाम और वैदिक दर्शन पर मैं बीएचयू में ही शोध कर रही हूं।