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काशी में बोले PM: वणक्कम काशी, वणक्कम तमिलनाडु; आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य जैसे संतों ने भारत को बनाया एक

Sun, 17 Dec 2023 10:43 PM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी
माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 17 Dec 2023 10:43 PM IST
सार

प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम के जरिये देश के युवाओं में अपनी प्राचीन परंपराओं के प्रति उत्साह बढ़ा है। तमिलनाडु से बड़ी संख्या में युवा काशी आ रहे हैं। काशी तमिल संगमम में आने वाले लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अयोध्या में दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है।

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pm Modi spoke at Namo Ghat Vanakkam Kashi Vanakkam Tamil Nadu Saints like Adi Shankaracharya and Ramanujachary
प्रधानमंत्री ने वाराणसी के नमो घाट पर किया काशी तमिल संगमम् के द्वितीय संस्करण का शुभारंभ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है महादेव के एक घर से उनके दूसरे घर आना। मदुरै मीनाक्षी के यहां से काशी विशालाक्षी के यहां आना। तमिलनाडु और काशीवासियों के बीच प्रेम संबंध अद्वितीय है। काशी और तमिलनाडु के रिश्ते प्राचीन होने के साथ ही भावनात्मक और रचनात्मक भी हैं।

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पीएम मोदी ने काशी तमिल संगमम के दूसरे संस्करण का रविवार को शुभारंभ किया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत वणक्कम काशी, वणक्कम तमिलनाडु से की है। पीएम ने कहा दुनिया के दूसरे देशों में राष्ट्र एक राजनीतिक परिभाषा रही है, लेकिन भारत एक राष्ट्र के रूप में आध्यात्मिक आस्थाओं से भरा है। आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य जैसे संतों ने भारत को एक बनाया है। अपनी यात्राओं से भारत की राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया है। सदियों से अधीनम संत काशी की यात्रा करते रहे हैं। इन यात्राओं और तीर्थयात्राओं के जरिये भारत हजारों साल से एक राष्ट्र के रूप में अडिग और अमर रहा है। काशी तमिल संगमम इसी एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत कर रहा है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की ये भावना उस समय भी नजर आई, जब हमने संसद के नए भवन में प्रवेश किया। नए संसद में पवित्र सेंगोल की स्थापना की गई। हम भारतवासी एक होते हुए भी बोलियों, भाषाओं, वेशभूषा, खानपान, रहन-सहन जैसी विविधता से भरे हैं। भारत की विविधता उस आध्यात्मिक चेतना में रची बसी है, जिसके लिए तमिल में कहा गया है कि हर जल गंगाजल है और भारत का हर भूभाग काशी है। जब उत्तर में आक्रांताओं द्वारा हमारी आस्था के केंद्र काशी पर आक्रमण हो रहे थे, तब राजा पराक्रम पांडेयन ने तेनकाशी और शिवकाशी में यह कहकर मंदिरों का निर्माण कराया कि काशी को मिटाया नहीं जा सकता। आप दुनिया की कोई भी सभ्यता देख लीजिए।

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विविधता में आत्मीयता का ऐसा सहज और श्रेष्ठ स्वरूप आपको शायद ही कहीं मिलेगा। हाल ही में जी20 समिट के दौरान दुनिया भारत की इस विविधता को देखकर चकित थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व राज्यमंत्री डॉ. एल मुरुगन, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. राधाकृष्णन, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. कामाकोटि, तमिलनाडु के सामाजिक कार्यकर्ता के. अन्नामलाई आदि मौजूद रहे।

पूरी दुनिया में जा रही है काशी तमिल संगमम की आवाज
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम के जरिये देश के युवाओं में अपनी प्राचीन परंपराओं के प्रति उत्साह बढ़ा है। तमिलनाडु से बड़ी संख्या में युवा काशी आ रहे हैं। काशी तमिल संगमम में आने वाले लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अयोध्या में दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। काशी तमिल संगमम की आवाज पूरी दुनिया में जा रही है। इसके लिए सभी मंत्रालयों, यूपी सरकार और तमिलनाडु के नागरिकों को बधाई।

बीएचयू और आईआईटी मद्रास साथ आए
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम विभिन्न वर्गों के बीच आपसी संवाद और संपर्क का प्रभावी मंच बना है। इसे सफल बनाने के लिए बीएचयू और आईआईटी मद्रास भी साथ आए हैं। आईआईटी मद्रास ने बनारस के हजारों छात्रों को मैथ्स में ऑनलाइन सपोर्ट देने के लिए विद्या शक्ति इनिशिएटिव शुरू किया है।

सशक्त होगी विरासत, मदुरै वैगई और काशी गंगई के तट पर
प्रधानमंत्री ने काशी और मदुरै का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों महान मंदिरों के शहर हैं। महान तीर्थस्थल हैं। मदुरै वैगई के तट और काशी गंगई के तट पर। तमिल साहित्य में वैगई और गंगई दोनों के बारे में लिखा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि काशी तमिल संगमम का ये संगम इसी तरह हमारी विरासत को सशक्त करता रहेगा।

काशी से कन्याकुमारी चलने वाली ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, पुस्तकों का किया विमोचन
काशी तमिल संगमम के दूसरे चरण के शुभारंभ से पहले प्रधानमंत्री ने प्राचीन तमिल ग्रंथों का ब्रेल भाषा में अनुवाद की गई विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया। वहीं, इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने काशी तमिल संगमम एक्सप्रेस ट्रेन को काशी से हरी झंडी दिखाकर कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन से रवाना किया। ये साप्ताहिक ट्रेन कन्याकुमारी से वाराणसी के बीच सीधी रेल सेवा के रूप में शुरू की गई है।

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