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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Pitru Paksha 2025 Purnima Shradh on sunday and Pitru Paksha will start from 8th September

Pitru Paksha 2025: पूर्णिमा का श्राद्ध आज, आठ सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष; जानें- क्या है मान्यता

Sun, 07 Sep 2025 09:51 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 07 Sep 2025 09:51 AM IST
सार

Pitru Paksha 2025: पूर्णिमा का श्राद्ध रविवार को होगा। पितरों के लिए गंगा के तट और पिशाचमोचन पर श्राद्ध और तर्पण होगा। इस बार पितृपक्ष में नवमी तिथि की हानि से 14 दिनों का पितृपक्ष होगा। 

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Pitru Paksha 2025 Purnima Shradh on sunday and Pitru Paksha will start from 8th September
पितृपक्ष 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रद्धयां इदम् श्राद्धम्... यानी पितरों के निमित्त श्रद्धा से किया गया कर्म ही श्राद्ध है। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष का आरंभ आठ सितंबर से होगा। 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही पितृपक्ष का समापन होगा। पूर्णिमा का श्राद्ध रविवार को किया जाएगा। शास्त्रों में मान्यता है कि पितृगण पितृपक्ष में पृथ्वी पर आते हैं और 15 दिनों तक पृथ्वी पर रहने के बाद अपने लोक लौट जाते हैं। गंगा तट के साथ ही पिशाचमोचन पर श्राद्ध व तर्पण किया जाएगा।

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हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस तिथि को जिसके पूर्वज गमन करते हैं, उसी तिथि को उनका श्राद्ध करना चाहिए। पितरों को समर्पित मास आश्विन मास आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन अमावस्या तक होता है। इसे पितृ पक्ष कहा जाता है। इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध की दृष्टि से पंचमी और षष्ठी का श्राद्ध 12 सितंबर को किया जाएगा। जबकि आश्विन कृष्ण पक्ष में नवमी तिथि की हानि है जिससे इस बार पितृपक्ष 14 दिनों का होगा। पूर्णिमा का श्राद्ध सात सितंबर को किया जाएगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार सनातन धर्म में किसी मास के पखवारा की शुरुआत उदयातिथि के अनुसार होता है। वहीं, तर्पण व श्राद्ध का समय मध्याह्न में होना आवश्यक माना जाता है। इसलिए पितृ पक्ष का प्रारंभ आठ सितंबर से हो रहा है। आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि सात सितंबर को रात 11:47 बजे लगेगी जो आठ सितंबर को रात 10:15 मिनट तक है। इससे प्रतिपदा का श्राद्ध आठ सितंबर को किया जाएगा। वहीं, पितृ विसर्जन या सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर को रहेगी।
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मातृ नवमी 15 सितंबर को, 18 सितंबर को वैष्णवजन का श्राद्ध

श्राद्ध के 10 प्रकारों में से एक प्रकार को महालया कहा जाता है। पितृपक्ष में विशेष तिथियां मातृ नवमी 15 सितंबर को, इस दिन माता की मृत्यु तिथि ज्ञात न होने पर श्राद्ध करने के साथ ही सौभाग्यवती स्त्रियों के श्राद्ध का विधान होता है। आश्विन कृष्ण एकादशी, 17 सितंबर को इंद्रा एकादशी व्रत उपवास सहित एकादशी का श्राद्ध होगा। द्वादशी श्राद्ध 18 सितंबर को होगा। इस दिन संन्यासी, यति, वैष्णवजन के श्राद्ध का विधान है। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी 20 सितंबर को किसी दुर्घटना में मृत व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाएगा। जबकि 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या अन्य के अतिरिक्त जिस मृतक की तिथि ज्ञात न हो या अनान्य कारणों से नियत तिथि पर श्राद्ध नहीं करने के कारण इस दिन श्राद्ध किया जाता है।

महिलाएं भी कर सकती हैं श्राद्ध

पितृ विसर्जन के दिन रात में मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर पितृ विसर्जन किया जाता है। पितृ लोग अपने पुत्रादिक से तर्पण तथा श्राद्ध की कामना करते हैं। यदि उन्हें यह उपलब्ध न हो तो वे नाराज होकर श्राप देकर चले जाते हैं। हर सनातनी को केवल वर्ष भर में उनकी मृत्य तिथि सर्वसुलभ जल, तिल, यव, कुश और पुष्पादि से उनका श्राद्ध करने और गौ ग्रास देकर एक, तीन व पांच ब्राह्मणों को भोजन कराने मात्र से पितृगण संतुष्ट होते हैं और पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। अत: इस सरलता से शांत होने वाले कार्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसके लिए जिस तिथि को माता-पिता की मृत्यु हुई हो, उस तिथि का श्राद्ध, तर्पण, गो ग्रास व ब्राह्मणों को भोजनादि करना चाहिए। इससे पितर लोग प्रसन्न होते हैं। जिस स्त्री को कोई पुत्र न हो वह स्वयं भी अपने पति का श्राद्ध पति की मृत्यु तिथि पर कर सकती है।
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