वाराणसी में बंदरों के आतंक से सहमे लोग, 20 से ज्यादा लोगों को काटकर कर चुके हैं जख्मी
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वाराणसी के अस्सी क्षेत्र में मंगलवार की शाम से लेकर बुधवार तक बंदरों ने 20 से अधिक बच्चों को काटकर जख्मी कर दिया। कई बच्चों का अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। दहशत के चलते बच्चे घर से नहीं निकल रहे हैं।
अस्सी निवासी आचार्य संतोष कुमार मिश्र के चार वर्षीय बेटे प्रयत्न मिश्रा, बेटी खुशी, बेटी यशस्वी को बंदर ने काटकर घायल कर दिया। किसी का नाक तो किसी के कान और मुंह नोंचा। मदन कुमार पांडेय और ब्रह्मदेव के बच्चों को भी बंदरों ने नोचकर घायल कर दिया। इसके साथ कई बच्चों को भी खरोंच कर घायल किया। बंदरों के दहशत से अस्सी क्षेत्र में लोग बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। अस्सी निवासी समाजसेवी रामेश्वर ने जिला प्रशासन से इन्हें पकड़ने की मांग की है।
बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी उठाने वाले नगर निगम की लापरवाही बच्चों की जान पर बन आई। शहर में बंदरों का आतंक एक बार फिर से बढ़ने लगा है। शहर को बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम ने जिम्मा उठाया है। लेकिन केवल यह कागजों तक सीमित है। शहर में दुकान, मकान, मंदिर, पार्क के साथ करीब-करीब हर जगह बंदरों ने डेरा डाल रखा है। ये बंदर घरों में भी घुस कर सामान आदि नष्ट कर दे रहे हैं। भगाने पर लोगों पर घायल कर दे रहे हैं।
दीपावली बाद मथुरा से आएगा सिकंदर, पकड़ेगा बंदर
लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा बंदर शहर के अलग-अलग इलाकों में हैं। बंदरों को शहर से दूर करने के लिए नगर निगम ने मथुरा के सिकंदर को जिम्मेदारी दी है। बीते साल बंदरों को पकड़कर मिर्जापुर और नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया था। कुछ दिनों तक तो 300 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से पकड़ने का काम दिया गया था। इधर, रुपयों के लेनदेन के चलते बंदर पकड़ने का काम बंद है। इसस बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बंदरों के आतंक से अपने ही घर में नजरबंद
बंदरों के आतंक से लोगों को अपने ही घर में नजरबंद रहना पड़ रहा है। बच्चे बाहर खेलने की बजाय घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। बंदर इतने स्मार्ट हो चुके हैं कि दरवाजों के लॉक को भी खोल लेते हैं और घर में घुसकर धमाचौकड़ी करते हैं।
इन क्षेत्रों में है बंदरों का आतंक
शहर के सिगरा, महमूरगंज, कैंट, औरंगाबाद, लक्ष्मी कुंड, गांधीनगर, रोहित नगर, लोहटिया, बड़ा गणेश, हरतीरथ, मैदागिन, चेतगंज, नदेसर, दुर्गाकुंड, लंका, साकेत नगर, सुंदरपुर, सोनारपुरा, दशाश्वमेध, समेत शहर के विभिन्न इलाकों में बंदरों का आतंक ज्यादा हैं।
बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा के सिकंदर से संपर्क किया गया है। वह अपनी पूरी टीम के साथ दीपावली बाद आएगा। बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू करेंगे। -डॉ. अजय प्रताप सिंह, नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी
बंदरों ने घर में पानी का पाइप तोड़ दिया है। बंदरों के चलते छत पर जाना मुहाल हो गया है। छत पर कपड़ा फैलाने के दौरान भी बंदर झपट्टा मारने और गुर्राते हैं। डर के मारे छत का दरवाजा बंद रखा जाता है। -सुजाता सिंह, गांधी नगर
खिड़की अगर खुली छूट गई तो बंदर घर में आ जाते हैं और सामान नुकसान करके चले जाते हैं। बंदर के आतंक परेशान होकर कुत्ता पाला गया है। छत पर कुत्ते को खुला छोड़ देते हैं। फिर भी बंदर छत की मुंडेर पर बैठे रहते हैं।
पुष्पा श्रीवास्तव सुंदरपुर