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Parakram Diwas: पहली बार पिता के साथ बनारस आए थे नेताजी, अब भी रहते हैं कई रिश्तेदार

Mon, 23 Jan 2023 05:45 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 23 Jan 2023 05:45 AM IST
सार

आजादी के नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काशी से गहरा लगाव था। बचपन से ही उनका बनारस आना जाना लगा था। जब क्रांति की मशाल थामी, तब भी कई बार गोपनीय तरीके से बनारस आए। चौखंभा, ठठेरी बाजार की गलियों में उनके रिश्तेदार अब भी रहते हैं।

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Parakram Diwas 2023  Netaji subhash chandra boase came to Banaras for first time with his father,
सुभाष चंद्र बोस - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

आजादी के नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काशी से गहरा लगाव था। बचपन से ही उनका बनारस आना जाना लगा था। जब क्रांति की मशाल थामी, तब भी कई बार गोपनीय तरीके से बनारस आए। चौखंभा, ठठेरी बाजार की गलियों में उनके रिश्तेदार अब भी रहते हैं।

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नेताजी के मौसा के प्रपौत्र वीरभद्र मित्र बताते हैं कि मेरे पिता अक्सर बताते थे कि नेताजी दो बार बंगाली ड्योढ़ी आए थे। नेताजी जब पहली बार अपने पिता के साथ आए थे, तब उनके मौसा जी पक्के महाल में ठठेरी बाजार के बंगाली ड्योढ़ी में रहते थे। सुभाष मिठाई के बहुत शौकीन थे और बनारसी मिठाई खाकर खुश हो जाते थे।

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कई बार गुप्त रूप से काशी आए नेताजी

फारवर्ड ब्लाक के वरिष्ठ नेता संजय भट्टाचार्य और काशी के क्रांतिकारियों पर स्वतंत्र शोध कर रहे नित्यानंद राय बताते हैं कि सुभाष चंद्र बोस कई बार गुप्त रूप से काशी आए। एक बार दशाश्वमेध के चितरंजन पार्क के आसपास राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के मकान में और दूसरी बार बेनियाबाग के पियरी के किसी मकान में रुकने की जानकारी मिलती है। उनके मौसा उपेंद्र नाथ बसु बैरिस्टर थे और बनारस कचहरी में वकालत करते थे। उनके मौसेरे भाई शरद कुमार बसु बीएचयू में प्रोफेसर थे।

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साधु बनने निकले थे, पहुंचे बनारस

वीरभद्र मित्र बताते हैं, नेताजी साधु बनने की इच्छा लेकर घर से निकले थे और हरिद्वार, ऋषिकेश, अल्मोड़ा होते हुए दूसरी बार बनारस पहुंचे थे। रामकृष्ण मिशन भी गए थे। नित्यानंद राय बताते हैं कि तीसरी बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नेताजी बनारस आए थे। बीएचयू में सभा होनी थी और कैंट स्टेशन से बीएचयू तक जनसैलाब उमड़ा था।

सभास्थल तक पहुंचने में रात्रि के 11:30 बज गए। 1939 में कांग्रेस छोड़ने के बाद जब नेताजी ने पूरे देश में 11 महीने में 900 सभा की थी तो उस समय भी बनारस आए थे। भारत कला भवन में नेताजी से जुड़ी कई यादें संग्रहीत हैं। नेताजी की बहन उर्मिला देवी की शादी गोरखपुर के राय परिवार में हुई थी और उनके बहनोई चिकित्सक थे।

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