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Pankaj Udhas Death: पंकज उधास का काशी से रहा है गहरा नाता, आखिरी बार शाम-ए-बनारस में गूंजी थीं... चिठ्ठी आई है
Tue, 27 Feb 2024 03:54 PM IST
प्रगति चंद
Pankaj Udhas Death: पंकज उधास का काशी से रहा है गहरा नाता, आखिरी बार शाम-ए-बनारस में गूंजी थी... चिठ्ठी आई है
Pankaj Udhas Death: पंकज उधास का काशी से रहा है गहरा नाता, आखिरी बार शाम-ए-बनारस में गूंजी थी... चिठ्ठी आई है
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 27 Feb 2024 03:54 PM IST
सार
Pankaj Udhas Death: पंकज उधास के निधन की खबर से काशी के संगीत प्रेमियों में निराशा है। पंकज उधास का काशी से काफी गहरा नाता था और वह अक्सर धार्मिक यात्रा पर वह काशी आते रहते थे। पंकज उधास ने काशी में अपनी अंतिम प्रस्तुति शाम-ए-बनारस में दी थी।
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पंकज उधास की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अपनी मखमली आवाज से दिलों को छू जाने वाले गजल गायक पंकज उधास के निधन की खबर से संगीत प्रेमियों में निराशा है। पंकज उधास ने काशी में अपनी अंतिम प्रस्तुति शाम-ए-बनारस में दी थी। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में अग्रवाल महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम की यादें काशी के जेहन में आज भी ताजा है। श्रोताओं ने सबसे अधिक मांग चिठ्ठी आई है... और निकलो ना बेनकाब... के लिए की थी।
अप्रैल 2022 में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पंकज उधास ने मीराबाई के भजन पायो जी मैंने राम रतन धन पायो... से शुरुआत की थी। इसके बाद न फूल चढ़ाऊं न माला चढ़ाऊं, ये गीतों की गंगा मैं तुझको चढ़ाऊं...सुनाया। इसके बाद जब गजलों की महफिल शुरू हुई तो आप जिनके करीब होते हैं, वो बड़े खुशनसीब होते हैं..., चिट्ठी आई है आई है चिठ्ठी आई है, चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल...पर तो लोग झूमते रहे। मोहे आई ना जग से लाज मैं ऐसा जोर के नाची आज कि घुंघरू टूट गए, जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके... जैसी सदाबहार गजलों ने महफिल में चार चांद लगाए थे।
रात भर गजलें सुनाने के लिए दर्ज हो गया था केस
पंकज उधास का काशी से काफी गहरा नाता था और वह अक्सर धार्मिक यात्रा पर वह काशी आते रहते थे। 2012 में पंकज उधास शो के लिए काशी आए थे। रात 10 बजे तक शो खत्म होना था, लेकिन उनके फैंस ने उन्हें वहां से जाने नहीं दिया। पंकज उधास पूरी रात लोगों को गजलें सुनाते रहे। अगले दिन उनके खिलाफ वाराणसी कोर्ट में एक केस भी दायर कर दिया गया। उन पर आरोप लगा कि रात 10 बजे के बाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की अनदेखी करते हुए रात भर गीत सुनाया। उनके ऊपर ध्वनि प्रदूषण का आरोप लगाया गया। इसके बाद वह 2017, 2022 और 2023 में बनारस आए थे। बनारस की उनकी अंतिम यात्रा धार्मिक थी। उन्होंने बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने के साथ ही मां गंगा की आरती भी उतारी थी।
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अप्रैल 2022 में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पंकज उधास ने मीराबाई के भजन पायो जी मैंने राम रतन धन पायो... से शुरुआत की थी। इसके बाद न फूल चढ़ाऊं न माला चढ़ाऊं, ये गीतों की गंगा मैं तुझको चढ़ाऊं...सुनाया। इसके बाद जब गजलों की महफिल शुरू हुई तो आप जिनके करीब होते हैं, वो बड़े खुशनसीब होते हैं..., चिट्ठी आई है आई है चिठ्ठी आई है, चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल...पर तो लोग झूमते रहे। मोहे आई ना जग से लाज मैं ऐसा जोर के नाची आज कि घुंघरू टूट गए, जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके... जैसी सदाबहार गजलों ने महफिल में चार चांद लगाए थे।
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रात भर गजलें सुनाने के लिए दर्ज हो गया था केस
पंकज उधास का काशी से काफी गहरा नाता था और वह अक्सर धार्मिक यात्रा पर वह काशी आते रहते थे। 2012 में पंकज उधास शो के लिए काशी आए थे। रात 10 बजे तक शो खत्म होना था, लेकिन उनके फैंस ने उन्हें वहां से जाने नहीं दिया। पंकज उधास पूरी रात लोगों को गजलें सुनाते रहे। अगले दिन उनके खिलाफ वाराणसी कोर्ट में एक केस भी दायर कर दिया गया। उन पर आरोप लगा कि रात 10 बजे के बाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की अनदेखी करते हुए रात भर गीत सुनाया। उनके ऊपर ध्वनि प्रदूषण का आरोप लगाया गया। इसके बाद वह 2017, 2022 और 2023 में बनारस आए थे। बनारस की उनकी अंतिम यात्रा धार्मिक थी। उन्होंने बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने के साथ ही मां गंगा की आरती भी उतारी थी।
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