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शहर में 52 स्थान पर खुलेंगे आउटलेट्स
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शहरी क्षेत्र में घर के करीब लोगों को घरेलू सामान मिलने के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम ने विभिन्न क्षेत्रों में आउटलेट खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। अब तक 52 ऐसे स्थल सर्वे में चिन्हित हुए हैं, जहां आउटलेट खोलने के लिए अनुकूल माहौल है। इन आउटलेट के जरिए नगर निगम को करीब 10 करोड़ सालाना राजस्व बढ़ोतरी की उम्मीद है।
नगर निगम के शहरी क्षेत्र में बहुत से ऐसे स्थल हैं जहां लोगों को दूध, दही, पनीर, श्रीखंड, चॉकलेट , लस्सी, सोया-पनीर, आइसक्रीम, फल एवं सब्जियों की जरूरत महसूस होती है, लेकिन इन सामानों की खरीद के लिए उन्हें कुछ दूर जाना पड़ता है। ऐसे सामानों की उपलब्धता सुगम ढंग से नजदीक में हो सके इसके लिए नगर निगम ने पराग, अमूल व मदर डेयरी के आउटलेट खोलवाने का निर्णय लिया है। नगर निगम की सैकड़ों ऐसी जगहें हैं जो पार्क या सार्वजनिक जगहों के पास किसी कोने में खाली पड़ी हैं और उसका किसी भी तरह से कोई प्रयोग नहीं है। ऐसे जगहों पर नगर निगम ने इन आउटलेट को खोलने के लिए सर्वे कराया है। कुछ जगहों पर 20 फीट लम्बे व 10 फीट चौड़े व कुछ जगहों पर 10 फीट के वर्गकार हिस्से चिन्हित हुए हैं।
नगर आयुक्त प्रणय सिंह ने बताया कि आउटलेट खोलने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। पहले सदन के पटल पर उसे पेश किया जाएगा और मेयर व पार्षदों की सहमति के बाद इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर इन आउटलेट के खोलने से नगर निगम को फायदा तो होगा ही साथ में इन आउटलेट पर काम करने वाले युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
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विवाद से बचने के लिए आउटलेट पर विचार
दरअसल, नगर निगम की संपत्तियों को आम आदमी को देने के बाद विवाद की स्थिति बन जा रही है। किरायेदारी के विवाद में सैकड़ों सम्पत्तियां नगर निगम की मुकदमें के मकड़जाल में फंसी हैं। इन संपत्तियों से नगर निगम को कोई फायदा नहीं है और वर्षों से नगर निगम मुकदमा लड़ रहा है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन ने मुकदमों से बचने के लिए और राजस्व को बढ़ाने के लिए आउटलेट खोलवाने की योजना बनाई है।
निगम की आमदनी 200 करोड़ रुपये बढ़ाने पर मंथन तेज
वाराणसी। नगर निगम में सोमवार को जोनल अधिकारी पीके द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में राजस्व बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया गया।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद नगर निगम की बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आय बढ़ाने के श्रोतों पर विभागवार सूची तैयारी की गई है। बनाई गई सूची के आधार पर करीब 200 करोड़ राजस्व बढ़ाने के श्रोतों को टटोला गया है। उन अनछूए अनुभागों का प्रपोजल भी सामने लाया गया है जिन पर नगर निगम खास ध्यान नहीं देता था। इसमें विज्ञापन, गृहकर, राजस्व, पशुपालन, अनुज्ञप्ति व स्वास्थ्य विभाग प्रमुख रूप से हैं। शहरी क्षेत्र की शराब दुकानों के अलावा बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान, अस्पताल व नर्सिंग होम से वसूली के लिए जोनवार टीम बनेगी।
घर बैठे सभी तरह के कर जमा करने की सहूलियत
नगर निगम घर बैठ हर तरह के करों को जमा करने की सुविधा मुहैया कराने जा रहा है। इसके लिए कुछ बैंक सीएसआर फंड से तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए सामने आए हैं। उम्मीद है कि दो से तीन महीने के भीतर ऐसी सुविधाएं मयस्सर हो जाएंगी जिससे देश व दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति अपनी हर तरह के टैक्स को आसानी से नगर निगम की कोष में जमाकर नगरीय सुविधाओं का लाभ पा सकेगा। कंचन मौर्या, रमाशंकर मौर्य, जयप्रकाश मौर्य, संजय मौर्य, देवेंद्र मौर्य, दुर्गाप्रसाद मौर्य, सुुनील मौर्य, जयभारत मौर्य आदि रहे।
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नगर निगम के शहरी क्षेत्र में बहुत से ऐसे स्थल हैं जहां लोगों को दूध, दही, पनीर, श्रीखंड, चॉकलेट , लस्सी, सोया-पनीर, आइसक्रीम, फल एवं सब्जियों की जरूरत महसूस होती है, लेकिन इन सामानों की खरीद के लिए उन्हें कुछ दूर जाना पड़ता है। ऐसे सामानों की उपलब्धता सुगम ढंग से नजदीक में हो सके इसके लिए नगर निगम ने पराग, अमूल व मदर डेयरी के आउटलेट खोलवाने का निर्णय लिया है। नगर निगम की सैकड़ों ऐसी जगहें हैं जो पार्क या सार्वजनिक जगहों के पास किसी कोने में खाली पड़ी हैं और उसका किसी भी तरह से कोई प्रयोग नहीं है। ऐसे जगहों पर नगर निगम ने इन आउटलेट को खोलने के लिए सर्वे कराया है। कुछ जगहों पर 20 फीट लम्बे व 10 फीट चौड़े व कुछ जगहों पर 10 फीट के वर्गकार हिस्से चिन्हित हुए हैं।
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नगर आयुक्त प्रणय सिंह ने बताया कि आउटलेट खोलने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। पहले सदन के पटल पर उसे पेश किया जाएगा और मेयर व पार्षदों की सहमति के बाद इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर इन आउटलेट के खोलने से नगर निगम को फायदा तो होगा ही साथ में इन आउटलेट पर काम करने वाले युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
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विवाद से बचने के लिए आउटलेट पर विचार
दरअसल, नगर निगम की संपत्तियों को आम आदमी को देने के बाद विवाद की स्थिति बन जा रही है। किरायेदारी के विवाद में सैकड़ों सम्पत्तियां नगर निगम की मुकदमें के मकड़जाल में फंसी हैं। इन संपत्तियों से नगर निगम को कोई फायदा नहीं है और वर्षों से नगर निगम मुकदमा लड़ रहा है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन ने मुकदमों से बचने के लिए और राजस्व को बढ़ाने के लिए आउटलेट खोलवाने की योजना बनाई है।
निगम की आमदनी 200 करोड़ रुपये बढ़ाने पर मंथन तेज
वाराणसी। नगर निगम में सोमवार को जोनल अधिकारी पीके द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में राजस्व बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया गया।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद नगर निगम की बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आय बढ़ाने के श्रोतों पर विभागवार सूची तैयारी की गई है। बनाई गई सूची के आधार पर करीब 200 करोड़ राजस्व बढ़ाने के श्रोतों को टटोला गया है। उन अनछूए अनुभागों का प्रपोजल भी सामने लाया गया है जिन पर नगर निगम खास ध्यान नहीं देता था। इसमें विज्ञापन, गृहकर, राजस्व, पशुपालन, अनुज्ञप्ति व स्वास्थ्य विभाग प्रमुख रूप से हैं। शहरी क्षेत्र की शराब दुकानों के अलावा बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान, अस्पताल व नर्सिंग होम से वसूली के लिए जोनवार टीम बनेगी।
घर बैठे सभी तरह के कर जमा करने की सहूलियत
नगर निगम घर बैठ हर तरह के करों को जमा करने की सुविधा मुहैया कराने जा रहा है। इसके लिए कुछ बैंक सीएसआर फंड से तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए सामने आए हैं। उम्मीद है कि दो से तीन महीने के भीतर ऐसी सुविधाएं मयस्सर हो जाएंगी जिससे देश व दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति अपनी हर तरह के टैक्स को आसानी से नगर निगम की कोष में जमाकर नगरीय सुविधाओं का लाभ पा सकेगा। कंचन मौर्या, रमाशंकर मौर्य, जयप्रकाश मौर्य, संजय मौर्य, देवेंद्र मौर्य, दुर्गाप्रसाद मौर्य, सुुनील मौर्य, जयभारत मौर्य आदि रहे।