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अश्व शक्ति: काशी की सुरक्षा में तैनात हैं ‘रॉयल’ पहरेदार, लेते हैं सैंड बाथ; ऐसे होता है इनका दैनिक अभ्यास

Wed, 02 Sep 2026 02:30 PM IST
Pragati Chand ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 02 Sep 2026 02:30 PM IST
सार

काशी की सुरक्षा में ‘रॉयल’ पहरेदार तैनात हैं। वाराणसी पुलिस का माउंटेड दस्ता (घुड़सवार पुलिस) अपने दैनिक अभ्यास की शुरुआत सावधान... कदम बढ़ाओ... की सख्त हिदायतों के साथ करता है।

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Horse Power in varanasi Royal sentinels deployed for Kashi security they take sand baths
नौ घोड़े हैं पुलिस के पास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जब सुबह की पहली किरण गंगा के घाटों को स्पर्श करती है, ठीक उसी समय पांडेयपुर स्थित रिजर्व पुलिस लाइन के राइडिंग ग्राउंड में टापों की गूंज सुनाई देने लगती है। सावधान... कदम बढ़ाओ... की सख्त हिदायतों के साथ वाराणसी पुलिस का माउंटेड दस्ता (घुड़सवार पुलिस) अपने दैनिक अभ्यास की शुरुआत करता है। 

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धर्म, संस्कृति और लगातार वीवीआईपी दौरों के लिए पहचानी जाने वाली काशी की सुरक्षा व्यवस्था में माउंटेड दस्ता अहम भूमिका निभा रहा है। कालिया, एलेक्जेंडर, पद्मिनी, पृथ्वीराज जैसे कुल नौ घोड़े कमिश्नरेट पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में शामिल है।
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आधुनिक दौर में जहां पुलिस के पास हाई-टेक गाड़ियां और ड्रोन हैं, वहीं रिजर्व पुलिस लाइन का ‘माउंटेड पुलिस दस्ता’ (घुड़सवार पुलिस) आज भी अपनी एक अलग और रोबदार पहचान रखता है। तड़के 5 बजे जब पूरा शहर सो रहा होता है, तब पुलिस लाइन के राइडिंग ग्राउंड पर टापों की गूंज और जवानों के कड़े अनुशासन की आवाजें सुनाई देने लगती हैं।

काशी में साल भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। महाशिवरात्रि, सावन, देव दीपावली और लक्खा मेलों (जैसे नाटी इमली का भरत मिलाप) के दौरान भीड़ नियंत्रण में यह दस्ता अहम भूमिका निभाता है। पैदल सिपाही की तुलना में घोड़े पर सवार पुलिसकर्मी आठ से नौ फीट की ऊंचाई पर होता है। इससे वह भीड़ में दूर तक नजर रख सकता है। 



पुलिस लाइन अधिकारियों के अनुसार भीड़ के बीच दो-तीन घुड़सवार पुलिस की मौजूदगी ही किसी भी अप्रिय स्थिति को शांत करने में सक्षम होती है। काशी की तंग गलियों और कच्चे रास्तों पर आसान पहुंच होती है। 

डीसीपी लाइन प्रमोद कुमार ने बताया कि 9 घोड़ों को टाइम पर खुराक दी जाती है। बाकायदा चार्ट बना है। एक घोड़े के लिए कम से कम एक किलोग्राम चनादाल, दो किलोग्राम जौ, एक किलोग्राम चोकर और 30 ग्राम नमक दिया जाता है।

जांबाज सिपाहियों की होती है ट्रेनिंग, आंसू गैस गोले का भी असर नहीं
घोड़ों को आम सवारी से अलग कॉम्बैट राइडिंग के लिए तैयार किया जाता है। भीड़ के बीच अचानक ढोल-नगाड़े, पटाखे फटने या आंसू गैस के गोलों का असर घोड़ों पर न हो, इसके लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। तंग जगहों से निकलने और अचानक आई बाधाओं को पार करने के लिए राइडिंग ग्राउंड में रोज घंटों पसीना बहाया जाता है। अस्तबल में हर घोड़े की देखभाल के लिए दो सिपाही (राइडर) तैनात हैं।
 
दो किग्रा जौ, एक-एक किलो चना दाल व चोकर के साथ 30 ग्राम नमक खाते हैं घोड़े
डीसीपी लाइन प्रमोद कुमार ने बताया कि 11 घोड़ों को टाइम पर खुराक दी जाती है। बाकायदा चार्ट बना है। एक घोड़े के लिए कम से कम एक किलोग्राम चनादाल, दो किलोग्राम जौ, एक किलोग्राम चोकर और 30 ग्राम नमक दिया जाता है। राइडिंग अभ्यास के बाद घोड़ों के खुरों की सफाई, बदन की मालिश और नहलाने का काम राइडर खुद करते हैं ताकि दोनों के बीच गहरा और भावनात्मक जुड़ाव बना रहे। घोड़ों को पुलिस लाइन में ही सैंड बाथ भी दिया जाता है।
 
सार्वजनिक आयोजनों और उपद्रव की स्थिति से निपटने के लिए घोड़ों को फॉर्मेशन ट्रेनिंग दी जाती है। जब भीड़ को एक तरफ धकेलना हो तो 4-5 घोड़े एक सीधी रेखा में आगे बढ़ते हैं। हिंसक या बेकाबू भीड़ को दो हिस्सों में बांटने के लिए घोड़ों को वी-आकार में आगे बढ़ाना सिखाया जाता है। वीवीआईपी काफिले के आगे और पीछे सुरक्षा घेरा (कवच) बनाकर चलने की कला घोड़ों को सिखाई जाती है। केवल घोड़ों को ही नहीं, बल्कि उन पर सवार सिपाहियों को भी एडवांस राइडिंग स्किल्स सिखाई जाती हैं। बिना लगाम थामे केवल पैरों की ग्रिप से घोड़े को नियंत्रित करना ताकि हाथ में लाठी या सुरक्षा उपकरण थामे जा सकें। सीटी, बॉडी लैंग्वेज और संकेतों के जरिये घोड़े को मोड़ना, गति बढ़ाना या उन्हें अचानक रोकना।
 

घोड़ों को ढोल-नगाड़ों, पटाखों की आवाज, सायरन, आंसू गैस के गोलों और लाठीचार्ज के शोर का अभ्यस्त बनाया जाता है ताकि वे वास्तविक आपात स्थिति में भड़के या बिदके नहीं। राइडिंग ग्राउंड में बैरियर जंपिंग, आग के बीच से गुजरना और ऊंचे-नीचे रास्तों से निकलने का दैनिक अभ्यास कराया जाता है। तटीय इलाकों में गश्त के लिए घोड़ों को असमतल और धंसने वाली जमीन पर दौड़ने का अभ्यास कराया जाता है। - प्रमोद कुमार, डीसीपी लाइन

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