गंगा ने मंगलवार को इस साल पहली बर चेतावनी बिंदु पार कर लिया। केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज पर मंगलवार की रात 10 बजे तक जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया जो चेतावनी बिंदु से तीन सेंटीमीटर ज्यादा है। इसके बाद जलस्तर स्थिर हो गया। गंगा अभी खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन शहर और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का असर है। काशी में 14 साल (2013 से 26 के बीच) के दौरान गंगा का जलस्तर 8 बार चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है। 2019 और 2022 में पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। दूसरी तरफ, वरुणा नदी के उफनाने से बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है।
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मणिकर्णिका घाट पर छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार
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150 की जगह 50 शवों का ही अंतिम संस्कार, लकड़ियां भीग जा रहीं
गंगा में आई बाढ़ से दशाश्वमेध घाट पूरी तरह डूब गया है। जल पुलिस का कार्यालय का ऊपरी हिस्सा ही दिख रहा है। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित है। शवों को छत पर ले जाने में दिक्कत आ रही है। गलियों से नाव के सहारे शव ले जाए जा रहे हैं। लकड़ियां भीग गई हैं। पानी के बीच से लकड़ियां ले जानी पड़ रही हैं। घाट से जुड़े लोगों के अनुसार सामान्य दिनों में रोज 150 शवों का अंतिम संस्कार होता था जो अब 50 रह गया है। अस्सीघाट पर सुबह ए बनारस का मंच डूब गया है। तीन सीढ़ी पानी और चढ़ा तो सड़कों पर आ जाएगा।
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वाराणसी में बाढ़
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नगवा नाले के किनारे बिजली आपूर्ति बंद, रामेश्वर मठ में घुस सकता है पानी
नगवा नाले में गंगा का पानी बढ़ रहा है। करीब आधा फीट और पानी बढ़ा तो रामेश्वर मठ में प्रवेश कर जाएगा। मठ में निचले हिस्से का सामान पहले ही दूसरी मंजिल पर पहुंचा दिया गया है। पानी बढ़ने के बाद नाले के किनारे बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। जेनरेटर के सहारे बिजली की व्यवस्था की जा रही है।
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वाराणसी में बाढ़ से दुश्वारियां
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नक्खीघाट से सरैया तक घरों में घुसा बाढ़ का पानी
वरुणा नदी के उफान ने नक्खीघाट से सरैया तक कई बस्तियों में संकट खड़ा कर दिया है। हजारों घरों में पानी घुस गया है। नगवा, रमना और वरुणा के तटवर्ती इलाकों के साथ चौबेपुर क्षेत्र में भी खेत, संपर्क मार्ग और गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ढेलवरिया, नई बस्ती, मौजा हाल, दीनदयालपुर, अमरपुर बटलोहिया, मढ़िया, उंचवा, सक्कर तालाब, पुराने पुल, सरैया, शैलपुत्री माता मंदिर और तीन पुलिया क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों में पहुंच गया। इससे लोगों को पलायन करना पड़ा। जरूरी सामान के साथ लोग राहत शिविरों में जाने लगे। बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। नक्खीघाट, सरैया और पुराने पुल क्षेत्र में राहत शिविर बनाए गए हैं।
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वाराणसी में बाढ़
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पुराने पुल पर बांध का फाटक खोला गया
पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए पुराने पुल पर सिंचाई विभाग के बांध का फाटक खोला गया है। इससे नदी के प्रवाह में तेजी आई है। निचले इलाकों में दबाव बढ़ा है। इस बीच प्रशासन और राजस्व टीमें प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रही हैं।