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Varanasi News: सुरक्षित धर्म ही कर सकता है राष्ट्र की रक्षा
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। राष्ट्र धर्म ही राष्ट्र की रक्षा कर सकता है। सभी धर्म के अनुसार आचरण करके परिवार और समाज के साथ राष्ट्र की उन्नति कर सकते हैं। हमें धर्मो रक्षति रक्षितः का सिध्दांत अपनाना चाहिए।
दो दिवसीय पाणिनि महोत्सव के पहले दिन रविवार को विश्व वैदिक सनातन धर्म न्यास के अध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह जी ने अपने विचार रखे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली और पाणिनि कन्या महाविद्यालय की ओर से महाविद्यालय में महोत्सव का शुभारंभ आचार्य योगेश भारद्वाज, आचार्या नंदिता शास्त्री और डॉ. प्रति विमर्शिनी ने ध्वजारोहण कर किया।
चार सत्रों के महोत्सव में बीएचयू व्याकरण विभाग के डॉ. वृजभूषण ओझा ने कहा कि सभी को राष्ट्रधर्म का पालन करते हुए राष्ट्र के उन्नयन में योगदान देना चाहिए। सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय गुजरात के पूर्व कुलपति डॉ. गोपबंधु मिश्र ने कहा कि समाज का विकास राष्ट्रधर्म से ही संभव है।
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आचार्य योगेश भारद्वाज ने आज की शिक्षा को अंग्रेजों की शिक्षानीति बताई। कहा कि आज भारतीय संस्कृति से जुड़ी शिक्षा की जरूरत है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. हरिप्रसाद अधिकारी और डॉ. रश्मि प्रभा शास्त्री ने महाविद्यालय की बालिका शिक्षा और विकास पर चर्चा की। इसमें बालिकाओं ने वेदों में राष्ट्रीयता पर शास्त्रार्थ किया। डॉ. नरेंद्र दत्त, कात्यायनी, संतुष्टि, आदि ने भजनों से आनंदित किया। इस दौरान जया, स्वरा, कात्यायिनी, संतुष्टि आदि ने भारतेंदू हरिश्चंद्र के लिखित नाटक वैदिक हिंसा, हिंसा न भवति का मंचन किया। प्रारंभ में पूजन हुआ।
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वाराणसी। राष्ट्र धर्म ही राष्ट्र की रक्षा कर सकता है। सभी धर्म के अनुसार आचरण करके परिवार और समाज के साथ राष्ट्र की उन्नति कर सकते हैं। हमें धर्मो रक्षति रक्षितः का सिध्दांत अपनाना चाहिए।
दो दिवसीय पाणिनि महोत्सव के पहले दिन रविवार को विश्व वैदिक सनातन धर्म न्यास के अध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह जी ने अपने विचार रखे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली और पाणिनि कन्या महाविद्यालय की ओर से महाविद्यालय में महोत्सव का शुभारंभ आचार्य योगेश भारद्वाज, आचार्या नंदिता शास्त्री और डॉ. प्रति विमर्शिनी ने ध्वजारोहण कर किया।
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चार सत्रों के महोत्सव में बीएचयू व्याकरण विभाग के डॉ. वृजभूषण ओझा ने कहा कि सभी को राष्ट्रधर्म का पालन करते हुए राष्ट्र के उन्नयन में योगदान देना चाहिए। सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय गुजरात के पूर्व कुलपति डॉ. गोपबंधु मिश्र ने कहा कि समाज का विकास राष्ट्रधर्म से ही संभव है।
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आचार्य योगेश भारद्वाज ने आज की शिक्षा को अंग्रेजों की शिक्षानीति बताई। कहा कि आज भारतीय संस्कृति से जुड़ी शिक्षा की जरूरत है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. हरिप्रसाद अधिकारी और डॉ. रश्मि प्रभा शास्त्री ने महाविद्यालय की बालिका शिक्षा और विकास पर चर्चा की। इसमें बालिकाओं ने वेदों में राष्ट्रीयता पर शास्त्रार्थ किया। डॉ. नरेंद्र दत्त, कात्यायनी, संतुष्टि, आदि ने भजनों से आनंदित किया। इस दौरान जया, स्वरा, कात्यायिनी, संतुष्टि आदि ने भारतेंदू हरिश्चंद्र के लिखित नाटक वैदिक हिंसा, हिंसा न भवति का मंचन किया। प्रारंभ में पूजन हुआ।