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कई विवादों में घिरी झूला वनस्पति कंपनी दिवालिया होने की राह पर, नोटिस चस्पा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 29 Jul 2018 02:19 PM IST
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मुख्य कार्यालय पर शनिवार की शाम को चस्पा कर दी गई
- फोटो : अमर उजाला
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उत्पादन की गुणवत्ता, बिजली बिल, हड़ताल, ग्राम समाज की जमीन संबंधी कई विवादों में घिरी इस कंपनी की साख पर दिनोंदिन बट्टा लगता रहा।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के विरुद्ध कारपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया प्रारंभ करने का आदेश दिया है। 25 जुलाई 2018 को पारित इस आदेश की प्रति सार्वजनिक तौर पर केराकत क्षेत्र के नाऊपुर में स्थित झूला कंपनी के मेन गेट एवं मुख्य कार्यालय पर शनिवार की शाम को चस्पा कर दी गई।
कारपोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला प्रस्ताव प्रक्रिया विनियमावली 2016 के विनिमय 6 के अधीन भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड ने जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के लेनदारों के ध्यानाकर्षण के लिए नोटिस और विज्ञापन जारी किया है।
जेबीएल एग्रो इंडस्ट्रीज तिलमापुर आशापुर वाराणसी, रजिस्ट्रार आफ कंपनी एक्ट 1988 के अंतर्गत कारपोरेट ऋणी निगमित है। इसके दिवालिया समाधान की प्रक्रिया 21 जनवरी 2018 से प्रारंभ हुई थी। 180 दिन बाद 25 जुलाई को कंपनी के खिलाफ आदेश पारित हो गया। कंपनी को दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 8 अगस्त 2018 मुकर्रर की गई है।
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क्षेत्र के नाऊपुर में झूला कंपनी 1980 में स्थापित की गई। जल्दी ही इस कंपनी ने झूला वनस्पति, रिफाइन एवं सरसों तेल उत्पादन में देश में अलग पहचान स्थापित कर ली। 25 टन प्रतिदिन के उत्पादन से शुरुआत करने वाली यह कंपनी बाद में लगभग एक हजार टन प्रतिदिन तक उत्पादन करने लगी थी।
भारत के कई प्रदेशों में अपनी इकाई स्थापित करने वाली जेवीएल इंडोनेशिया, चेकोस्लोवाकिया, मलेशिया और श्रीलंका से आयात निर्यात में अपनी अच्छी पैठ बनाने में सफल रही है। मंदी के दौर में भी कंपनी लाभांश देने में सफल रही। जेवीएल इंडस्ट्रीज की बैक बोन नाऊपुर की ही इकाई रही।
प्रबंधन और कर्मचारियों की तनातनी से कंपनी को तालाबंदी के दौर से गुजरना पड़ा। उत्पादन की गुणवत्ता, बिजली बिल, हड़ताल, ग्राम समाज की जमीन संबंधी कई विवादों में घिरी इस कंपनी की साख पर दिनोंदिन बट्टा लगता रहा। अब देनदारी के अभाव में दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है।
यदि समय रहते प्रबंधन समस्या का निदान नहीं करता है तो दिवालिया घोषित होने पर पुन: तालाबंदी का संकट सामने है। यदि ऐसा होता है तो हजारों मजदूरों के परिवार के मुंह का निवाला छिन जाएगा।
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नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के विरुद्ध कारपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया प्रारंभ करने का आदेश दिया है। 25 जुलाई 2018 को पारित इस आदेश की प्रति सार्वजनिक तौर पर केराकत क्षेत्र के नाऊपुर में स्थित झूला कंपनी के मेन गेट एवं मुख्य कार्यालय पर शनिवार की शाम को चस्पा कर दी गई।
कारपोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला प्रस्ताव प्रक्रिया विनियमावली 2016 के विनिमय 6 के अधीन भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड ने जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के लेनदारों के ध्यानाकर्षण के लिए नोटिस और विज्ञापन जारी किया है।
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जेबीएल एग्रो इंडस्ट्रीज तिलमापुर आशापुर वाराणसी, रजिस्ट्रार आफ कंपनी एक्ट 1988 के अंतर्गत कारपोरेट ऋणी निगमित है। इसके दिवालिया समाधान की प्रक्रिया 21 जनवरी 2018 से प्रारंभ हुई थी। 180 दिन बाद 25 जुलाई को कंपनी के खिलाफ आदेश पारित हो गया। कंपनी को दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 8 अगस्त 2018 मुकर्रर की गई है।
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क्षेत्र के नाऊपुर में झूला कंपनी 1980 में स्थापित की गई। जल्दी ही इस कंपनी ने झूला वनस्पति, रिफाइन एवं सरसों तेल उत्पादन में देश में अलग पहचान स्थापित कर ली। 25 टन प्रतिदिन के उत्पादन से शुरुआत करने वाली यह कंपनी बाद में लगभग एक हजार टन प्रतिदिन तक उत्पादन करने लगी थी।
भारत के कई प्रदेशों में अपनी इकाई स्थापित करने वाली जेवीएल इंडोनेशिया, चेकोस्लोवाकिया, मलेशिया और श्रीलंका से आयात निर्यात में अपनी अच्छी पैठ बनाने में सफल रही है। मंदी के दौर में भी कंपनी लाभांश देने में सफल रही। जेवीएल इंडस्ट्रीज की बैक बोन नाऊपुर की ही इकाई रही।
प्रबंधन और कर्मचारियों की तनातनी से कंपनी को तालाबंदी के दौर से गुजरना पड़ा। उत्पादन की गुणवत्ता, बिजली बिल, हड़ताल, ग्राम समाज की जमीन संबंधी कई विवादों में घिरी इस कंपनी की साख पर दिनोंदिन बट्टा लगता रहा। अब देनदारी के अभाव में दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है।
यदि समय रहते प्रबंधन समस्या का निदान नहीं करता है तो दिवालिया घोषित होने पर पुन: तालाबंदी का संकट सामने है। यदि ऐसा होता है तो हजारों मजदूरों के परिवार के मुंह का निवाला छिन जाएगा।