दुधमुंही बेटी की पूरी हुई मुराद, मां को मिल गई जमानत
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नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने के दौरान रवि के साथ गिरफ्तार उनकी पत्नी एकता शेखर जिला जेल की सलाखों के पीछे अपनी दुधमुंही बेटी चंपक की एक झलक देखने के लिए तड़प रही हैं। एक मुलाकाती के जरिये अपने घर चिट्ठी भेज कर एकता अपनी ममता का दर्द बयां की हैं। हालांकि, देर शाम जमानत एकता, रवि सहित अन्य लोगों की जमानत अर्जी पर अदालत में सुनवाई पर अदालत ने जमानत मंजूर की।
जिला जेल की बैरक सात बी में बंद एकता चिट्ठी में लिखी हैं कि गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने अपनी सवा साल की बेटी का हवाला दिया, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। उल्टे पुलिस ने ऐसी धाराएं लगाईं कि जमानत न मिल सके। मासूम चंपक की याद में वह रोजाना रोती हैं। जेल में 30 दिसंबर को उन्हें पता लगा कि उनकी बेटी एक समाचार चैनल में रात नौ बजे दिखाई देगी। इस पर उन्होंने कारागार प्रशासन से टीवी देखने की इच्छा जाहिर की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
इस संबंध में पूछे जाने पर कारागार प्रशासन की ओर से कोई कारण भी नहीं बताया गया। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जुलूस निकाल रहे लोगों को बीते 19 दिसंबर को बेनिया क्षेत्र से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उधर, एकता की बेटी चंपक उनके पति के बड़े भाई शशिकांत के पास है। दादी शीला तिवारी ने बताया कि चंपक दिन भर मां के लिए रोती है और बीमार हो गई है। इसके चलते उसका वजन भी कम हो गया है।