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अब क्यूआर कोड बताएगा बनारसी साड़ी असली है या नकली

Sat, 24 Jul 2021 01:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 01:45 AM IST
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Now QR code will tell whether Banarasi saree is real or fake
अब क्यूआर कोड और लोगो की मदद से बनारसी साड़ी के असली और नकली होने का पता चलेगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही साड़ी के बारे में पूरी जानकारी खरीदाराें को मिल जाएगी। आईआईटी बीएचयू की मैकेनिकल विभाग की शोध टीम ने देश में पहली बार हथकरघा साड़ी में इस नई तकनीक को ईजाद किया है। साथ ही यह डिजिटल इंडिया के जरिए सही उत्पाद खरीदने में उपभोक्ताओं की मदद करेगा। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. डॉ. प्रभाष भारद्वाज ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी।
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डॉ. भारद्वाज ने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के रिसर्च स्कॉलर एम कृष्ण प्रसन्ना नाइक ने क्यूआर कोड और साड़ी पर लोगो बुनाई की तकनीक तैयार की है। निर्माता अपनी फर्म और निर्माण के विवरण के साथ साड़ी पर क्यूआर कोड बुन सकता है। ग्राहक साड़ी पर बुने गए क्यूआर कोड को स्कैन कर उसकी गुणवत्ता के बारे में जानकारी ले सकेंगे। एम कृष्ण प्रसन्ना नाइक ने बताया कि बनारस हैंडलूम उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसमें मार्केटिंग प्रमुख है। अधिकांश ग्राहकों को हथकरघा और पावरलूम साड़ी के बीच का अंतर नहीं पता है। हथकरघा चिह्न और जीआई चिह्न के बारे में केवल सीमित संख्या में ही ग्राहक जानते हैं। क्यूआर कोड और लोगो डिजाइन से कपड़े की मजबूती और खूबसूरती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अंगिका सहकारी समिति के अध्यक्ष अमरेश कुशवाहा और डिजाइनर अंगिका ने पहली बार इस क्यूआर कोड की तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। बताया कि हम अपनी साड़ियों में इस क्यूआर कोड और हैंडलूम मार्क लॉग को इन बिल्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थानीय और विदेशी ग्राहकों को हथकरघा उत्पाद और पावरलूम उत्पादों के बीच अंतर करने में मदद करेगा।
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साड़ी में यह होगा बदलाव
क्यूआर कोड तकनीकी ईजाद के बाद हथकरघा साड़ी में इसे इन बिल्ट कर दिया जाएगा। इसमें साड़ी का विवरण युक्त बुना हुआ क्यूआर कोड, हथकरघा चिह्न लोगो, रेशम चिह्न और बनारस भौगोलिक संकेत (जीआई) लोगो शामिल है।
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