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Gyanvapi: अब एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में होगी अखिलेश-ओवैसी मामले की सुनवाई, मुकदमा दर्ज करने की है मांग

Thu, 09 Feb 2023 10:43 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 09 Feb 2023 10:43 PM IST
सार

ज्ञानवापी मामले में बयानबाजी को लेकर अखिलेश यादव व असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की याचिका पर अब एसीजेएम प्रथम/ एमपी-एमएलए उज्ज्वल उपाध्याय की कोर्ट सुनवाई करेगी।

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Now Akhilesh Owaisi case will be heard in court of ACJM I in varanasi in gyanvapi issue
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी मामले में बयानबाजी को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की याचिका पर अब एसीजेएम प्रथम / एमपी-एमएलए उज्ज्वल उपाध्याय की कोर्ट सुनवाई करेगी। यह आदेश सीजेएम अश्वनी कुमार की कोर्ट ने वादी हरिशंकर पांडेय की याचिका पर दिया है। अब इस मामले की सुनवाई 14 फरवरी को होगी।

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बीते दिनों एमपी-एमएलए / एसीजेएम पंचम कोर्ट के पीठासीन अधिकारी उज्ज्वल उपाध्याय के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो गया था। इससे पहले उनकी कोर्ट ने हरिशंकर पांडेय के मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। आदेश के लिए 14 फरवरी की तिथि निर्धारित थी। अब वह एसीजेएम प्रथम हो गए हैं।
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पीठासीन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन के कारण वादी हरिशंकर पांडेय ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर अपने मुकदमे को स्थानांतरित करने की मांग की थी। सीजेएम की कोर्ट ने कहा कि एमपी-एमएलए कोर्ट का प्रभार एसीजेएम प्रथम उज्ज्वल उपाध्याय के पास ही है। लिहाजा, एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में ही मामले की सुनवाई होगी।

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हिंदुओं के पक्षकार बनने का आवेदन अदालत में स्वीकार

सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने ज्ञानवापी में उर्स करने और मजार पर चादर चढ़ाने की अनुमति देने संबंधी मुख्तार अहमद के वाद में तृतीय पक्षकार हिंदुओं को बनाने का आवेदन स्वीकार कर लिया। अदालत ने वादी मुस्लिम पक्ष को हिंदू आवेदकों को पक्षकार बनाने की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही वाद पर आपत्ति के लिए 28 फरवरी की तिथि तय की है।

अदालत ने कहा कि तृतीय पक्षकार हिंदुओं की तरफ से वादग्रस्त संपत्ति को भगवान आदि विश्वेश्वर की संपत्ति होना बताया गया है। साथ ही स्वयं को भगवान आदि विश्वेश्वर का अनुयायी और पूजक होने के आधार पर अपने हितों की रक्षा के लिए पक्षकार बनाने की याचना की गई। अदालत ने कहा कि समस्त तथ्यों के आधार पर यह प्रतीत होता है कि वादग्रस्त संपत्ति पर मुस्लिम और हिंदू दोनों ही पक्ष अपना अधिकार बता रहे हैं। लिहाजा, हिंदूू पक्ष के लोग भी इस वाद के निस्तारण के लिए आवश्यक पक्षकार हैं। 

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