बीएचयू: अस्पताल में केवल बेड नहीं, स्टाफ भी बढ़ाना होगा; स्वास्थ्य सेवा पर पैनल चर्चा में बोले चिकित्साधीक्षक
Varanasi News: स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी का लेकर आईएमएस-बीएचयू में विस्तार से चर्चा हुई। अस्पताल में स्टाफ और अन्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए काफी जोर दिया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आईएमएस बीएचयू में हुई पैनल चर्चा में स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी से जुड़े अलग-अलग बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें आईएमएस और उसके बाहर के विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री के आगामी 2047 तक के विजन के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर भी प्रदर्शित की। चर्चा के आधार पर एक विजन डाक्यूमेंट तैयार करवाकर केंद्र, राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
आईएमएस के लेक्चर थिएटर में बीएचयू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केके गुप्ता ने कहा कि अस्पतालों में केवल बेड बढ़ाने से काम नहीं होगा, बल्कि यहां स्टाफ और अन्य संसाधन भी बढ़ाने होंगे।
रेजिडेंट डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति जिला अस्पतालों में की जा रही है, इसको बदलने की जरूरत है। ऐसा करने से रेजिडेंट की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन ठीक से होना चाहिए। कोविड ने आईसीयू को उन्नत कर दिया। वर्तमान में मानव संपदा को रोकने और विजिटिंग फैकल्टी की नीति बनाई जानी चाहिए।
महत्वपूर्ण प्रस्तावों की दी जानकारी
रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आशीष वर्मा ने स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत करने के लिए पेशेंट फ्रेंडली वातावरण बनाने की बात कही। डॉ. हेमंत गुप्ता ने कहा कि किसी एक अस्पताल या संस्थान को उन्नत करने से नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों को स्तरीय सुविधाएं देने से स्वास्थ्य सेवाएं उन्नत होंगी।
बलिया विश्वविद्यालय के पूर्व संस्थापक कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि कोरोना ने बता दिया कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। समाज की विषमता समाप्त करने का काम स्वास्थ्य सेवाएं कर सकती हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के विशेष कार्याधिकारी हिमांशु बुराड ने 2047 के भारत का स्वास्थ्य कैसा हो, इसके लिए महत्वपूर्ण प्रस्तावों की जानकारी दी।
मनोचिकित्सक डॉ. वेणु गोपाल झंवर ने कहा कि देश में 14 प्रतिशत लोग दिमागी बीमारियों से ग्रसित है। इस दौरान डॉ. मनोज कुमार शाह, डॉ. अंशुमान बनर्जी, डॉ. प्रियंका अग्रवाल, डॉ. सिद्धार्थ लखोटिया मौजूद रहे।
बीएचयू अस्पताल में रिटायर्ड कर्नल ने किया निरीक्षण, ओपीडी में नहीं मिले डॉक्टर
बीएचयू अस्पताल और सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी का शनिवार को रिटायर्ड कर्नल मनीष शर्मा ने निरीक्षण किया। सुबह 8 से 8.30 बजे तक मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सर्जरी सहित अन्य ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिले। यही स्थिति सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी में भी रहा।
आईएमएस बीएचयू में व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी रिटायर्ड कर्नल मनीष शर्मा के पास है। ओपीडी का समय बदलकर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक होने के बाद से ही उसका पालन नहीं हो पा रहा है। यहां अधिकांश ओपीडी में डॉक्टर आधे घंटे बाद ही पहुंच रहे हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में भी ओपीडी के बाहर मरीज खड़े मिले थे। इसकी खबर छपने के बाद अब व्यवस्था में सुधार की कवायद भी शुरू हो गई है।
रिटायर्ड कर्नल मनीष शर्मा ने बताया कि सुबह 8 बजे पर्चा काउंटर खुला था, लेकिन मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी सहित अधिकांश ओपीडी में डॉक्टर नहीं पहुंच सके थे। ओपीडी के बाहर मरीज भी थे। सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में भी तय समय से ओपीडी चलने का पालन नहीं हो पा रहा है। इसकी रिपोर्ट आईएमएस बीएचयू निदेशक को सौंपी जाएगी।