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UP: सर्जन हैं, ऑपरेशन थियेटर भी, पर गनशॉट का इलाज नहीं; वाराणसी में सरकारी अस्पतालों का हाल

Thu, 20 Feb 2025 03:21 PM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी।
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 20 Feb 2025 03:21 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में सरकारी अस्पतालों में गनशॉट का इलाज नहीं है। यहां हर महीने सरकारी अस्पतालों के ट्रॉमा सेंटर में 300 मरीज आते हैं। इतना ही नहीं इमरजेंसी में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की भी नियमित सुविधा नहीं मिल पाती है।

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no treatment for gunshot wounds in trauma centres of government hospitals in Varanasi
Hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी अस्पतालों में सर्जन की तैनाती है, यहां इमरजेंसी में ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन करने से संबंधित उपकरण भी है। इसके बाद भी इमरजेंसी में गनशॉट, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायलों का मुकम्मल इलाज नहीं हो पाता है।

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यहां तक कि इमरजेंसी में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की भी नियमित सुविधा नहीं मिल पाती है। किसी तरह प्राथमिक उपचार करने के बाद मरीजों को बीएचयू के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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बीएचयू को छोड़ मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, शास्त्री अस्पताल रामनगर, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल हैं, यहां किसी तरह की गोली की घटना में घायल अगर आ जाता है तो चोट लगने वालों का प्राथमिक उपचार हो जाता है। किसी के शरीर में गोली फंसी रहती है निकालने की सुविधा नहीं है। मरहम पट्टी के बाद बीएचयू ही रेफर किया जाता है।
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पिछले चार महीने से हर महीने करीब 150 मामले ट्रॉमा के आए हैं। यहां एक सूची भी चस्पा करवाई गई है, जिसमें गनशॉट वालों के इलाज की सुविधा न होने और ऐसे मरीजों को बीएचयू में इलाज मिलने की जानकारी लिखी है। इमरजेंसी में एक्सरे तो हो जाता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट ओपीडी में ही तीन दिन आते हैं तो इमरजेंसी में समस्या बढ़ जाती है।

रामनगर स्थित शास्त्री अस्पताल में दो सर्जन हैं। सीएमएस डॉ. जीसी दूबे के अनुसार अस्पताल में गनशॉट वाले मामलों में गोली फंसने वाले केस में बीएचयू रेफर कर दिया जाता है। बिना गोली फंसे अगर कहीं चोट लगी है तो भी छोटे मामलों में किसी तरह इलाज किया जाता है। यहां एक्सरे 24 घंटे हो जाता है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की संकट की वजह से अल्ट्रासाउंड केवल तीन दिन ओपीडी में होता है।

यहां तीन सर्जन हैं और ट्रॉमा सेंटर भी है। यहां 24 घंटे एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा कागज में है, लेकिन जरूरत पड़ने पर रात में टेक्निशियन को बुलाना पड़ता है। ट्रॉमा सेंटर वाले मामलों में भी मरीजों को बीएचयू रेफर किया जाता है। गोली लगने के मामलों में यदि गोली छूकर निकल गई है तो प्राथमिक इलाज कर दिया जाता है, लेकिन सीरियस मामलों में उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

...तो बीएचयू ही जाइए

मंडलीय अस्पताल में एक नोटिस चस्पा की गई है। इसमें कुछ मामलों के इलाज न उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इसमें प्रमुख रूप से गनशॉट है। यानि किसी को गोली लगी है तो यहां इलाज नहीं होगा। उसे बीएचयू जाना होगा। इसके अलावा सीवियर हेड इंजरी का भी इलाज भी नहीं हो पाएगा। इसके अलावा इमरजेंसी के चार कॉलम भी बनाए गए हैं, जिसका इलाज यहां नहीं होगा। इसमें सोवियर हार्ट अटैक और हाइड्रोधोरेक्स का भी जिक्र किया गया है।

क्या बोले अधिकारी
सभी सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में ओटी है। जहां तक गनशॉट इंजरी का मामला है तो सुपर स्पेशियलिटी तकनीक से इसका इलाज करना होता है। फिलहाल सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं अभी सरकारी अस्पताल में नहीं है, ऐसे में बीएचयू ही रेफर किया जाता है। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनने के बाद इस तरह की इंजरी का इलाज वहीं पर हो जाएगा। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

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