Varanasi: अपील लंबित होने की वजह से बेवजह न रखा जाए जेल में, सम्मेलन में बोले सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति
वाराणसी में शनिवार को 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एक दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने सम्मेलन को संबोधित किया।
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वाराणसी के छावनी क्षेत्र स्थित एक होटल में शनिवार को सुगम न्याय प्राप्ति विषय पर उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि हमें यह देखना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक जेल में मात्र इसलिए न बंद रहे क्योंकि उसके मामले का विचारण या अपील न्यायालय में लंबित है।
हमें मामलों को जल्दी से निपटाने की जरूरत है। साथ ही, अपराध के पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और उनके पुनर्वास की भी जरूरत है।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनावश्यक प्रशासनिक या कानूनी तकनीक के चलते विचाराधीन कैदियों की दैहिक स्वतंत्रता बाधित न हो। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने गिरफ्तारी के पूर्व, गिरफ्तारी के समय और रिमांड स्तर पर लोगों के अधिकारों के बारे में चर्चा की।
प्रतिनिधियों के तौर पर आयोजन में आए 11 राज्यों के न्यायाधीशों से जेलों में निरुद्ध बंदियों की संख्या को कम करने के लिए उपयुक्त मामलों में परिवीक्षा देने की अपील की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि विधिक साक्षरता के प्रसार में कानून के छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
कारण कि वह समाज के वंचित वर्गों को न्याय तक पहुंच प्रदान करने का एक मजबूत साधन हो सकते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने न्याय के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अधिक से अधिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने कहा कि इस एकदिवसीय उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन का परिणाम उत्साहवर्धक होगा।
न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा इस एकदिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने और प्रभावी तरीकों पर विचार करने के उद्देश्य से किया गया था। ताकि, आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े व्यक्तियों तक न्याय की पहुंच हो सके।
सम्मेलन में पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा तैयार की गई इनसाइड पंजाब प्रिजंस - स्टडी ऑफ द कंडीशंस ऑफ प्रिजंस इन पंजाब नामक शोध रिपोर्ट का विमोचन किया गया। सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के न्यायमूर्ति और विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव मौजूद थे।