{"_id":"610bae1a8ebc3ec1ef27df1f","slug":"new-technology-now-surgery-will-without-incision-in-cancer-hospital-in-varanasi-big-relief-to-patients","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नई तकनीकः कैंसर अस्पताल में अब बिना चीर-फाड़ के होगी सर्जरी, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नई तकनीकः कैंसर अस्पताल में अब बिना चीर-फाड़ के होगी सर्जरी, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
Thu, 05 Aug 2021 02:53 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Thu, 05 Aug 2021 02:53 PM IST
सार
ध्वनि यंत्र की माइक्रोलेजर सर्जरी तकनीक से मरीजों को बड़ी राहत होगी। अब तक इस तकनीक से सफलतापूर्वक 20 से अधिक कैंसर मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। इससे पहले यह सर्जरी पूरे उत्तर प्रदेश में कहीं भी उपलब्ध नहीं थी।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
वाराणसी स्थित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (एमपीएमएमसीसी) और होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एचबीसीएच) में कैंसर मरीजों की सर्जरी अब बिना चीर-फाड़ के होगी। ध्वनि यंत्र की माइक्रोलेजर सर्जरी तकनीक से मरीजों को बड़ी राहत होगी। अब तक इस तकनीक से सफलतापूर्वक 20 से अधिक कैंसर मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है।
विज्ञापन
सिर और गले के कैंसर विभाग के प्रभारी डॉ. असीम मिश्रा ने बताया कि माइक्रोलेरेंजियल लेजर सर्जरी का इस्तेमाल ध्वनी यंत्र के कैंसर, ल्युकोप्लेकिया, पोलिप कैंसर और मुंह के शुरुआती कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है। इस सर्जरी को करने में जहां कम समय लगता है, वहीं चेहरे पर कहीं भी सर्जरी (कट) के निशान भी नहीं आते।
विज्ञापन
अस्पताल में अब तक इस विधि से की गई ज्यादातर सर्जरी ध्वनी यंत्र से संबंधित रही। माइक्रोलेरेंजियल लेजर सर्जरी के जरिए ध्वनी यंत्र के कैंसर का इलाज करने वाला एमपीएमएमसीसी राज्य का पहला ऐसा अस्पताल है। इससे पहले यह सर्जरी पूरे उत्तर प्रदेश में कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए मरीज को ओपन सर्जरी से नहीं गुजरना पड़ता और सर्जरी के कुछ घंटे बाद ही अस्पताल से मरीज को छुट्टी मिल जाती है।
विज्ञापन
गले के कैंसर के लिए तंबाकू उत्पादों का सेवन जिम्मेदार
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (एमपीएमएमसीसी) के उपनिदेशक डॉ. दुर्गातोष पांडेय ने बताया कि ध्वनी यंत्र का कैंसर सिर और गले के कैंसर के तहत आता है। 90 प्रतिशत तक सिर और गले के कैंसर के लिए तंबाकू उत्पादों का सेवन जिम्मेदार है। इसलिए बीमारी से बचने के लिए तंबाकू उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।