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सुभाष चंद्र बोस जयंती: साधु बनने निकले थे नेताजी और इस तरह पहुंचे बनारस

Thu, 23 Jan 2020 10:38 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 23 Jan 2020 10:38 AM IST
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Netaji Subhash chandra bose jayanti bond with varanasi
नेताजी सुभाष चंद्र बोस

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का बनारस से गहरा नाता था, वे कई बार बनारस आए थे। नेताजी की मौसी के प्रपौत्र वीरभद्र मित्र, संजय भट्टाचार्या एडवोकेट, नित्यानंद राय एडवोकेट अपने अध्ययन और बड़े बुजुर्गों की यादों के आधार पर बताते हैं कि नेताजी पहली बार बनारस तीन चार साथियों के साथ तब आए थे जब वे साधु बनने की इच्छा से घर से निकले थे। हरिद्वार, ऋषिकेश, अल्मोड़ा होते बनारस पहुंचे थे। इसी दौरान रामकृष्ण मिशन भी पहुंचे थे।

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दूसरी बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद आए थे। बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय बताते हैं कि बीएचयू में सभा होनी थी, कैंट स्टेशन से बीएचयू तक इस कदर जन सैलाब उमड़ा था कि सभास्थल तक पहुंचने में रात के साढ़े 11 बज गए।

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ऐसा भी नहीं था कि नेताजी पैदल चल रहे थे। राष्ट्ररत्न शिव प्रसाद गुप्त ने उन्हें अपनी गाड़ी दी थी सभास्थल तक जाने के लिए। एडवोकेट संजय भट्टाचार्य बताते हैं कि उनकी सभा पांडेय हवेली स्थित बंगाली टोला इंटरमीडिएट कालेज और चितरंजन पार्क में भी हुई थी और उनको सुनने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा था।

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1939 में कांग्रेस छोड़ने के बाद जब नेताजी ने पूरे देश में 11 महीने में 900 सभा की तो उस समय भी बनारस आए। जब कमच्छा में भारत कला भवन का उद्घाटन था उस मौके पर भी नेताजी बनारस आए थे। भारत कला भवन में नेताजी से जुड़ी कई यादें संग्रहीत हैं।

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नेताजी के मौसा और मौसी बनारस में ही रहते थे, उनके मौसा बनारस में वकालत करते थे और चौखंभा स्थित बंगाली ड्योढ़ी में रहते थे। नेताजी की मौसी के प्रपौत्र वीरभद्र मित्र कहते हैं कि उनके पिताजी बताते थे कि नेताजी एक दो बार बंगाली ड्योढ़ी आए थे। बहुत ही गोपनीय तरीके से आए और एक दो दिन रहकर चले गए।

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