{"_id":"5b56dcc14f1c1b52748b68fa","slug":"nepali-officers-team-arrived-in-varanasi-for-search-of-hostage-woman","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"‘कैद’ महिलाओं की तलाश में बनारस पहुंची नेपाल के अधिकारियों की टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘कैद’ महिलाओं की तलाश में बनारस पहुंची नेपाल के अधिकारियों की टीम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 24 Jul 2018 05:46 PM IST
विज्ञापन
demo pic
विदेश में रोजगार दिलाने का झांसा देकर भारत लाई गई नेपाली महिलाओं को बनारस में कैद कर रखे जाने की सूचना पर सोमवार को नेपाल के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम शहर पहुंची।
जिला पुलिस की टीम के साथ नेपाल की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने शिवपुर थाना के चांदमारी और नटिनियादाई क्षेत्र में देर रात तक छापामारी की लेकिन नेपाली महिलाएं और उन्हें लाने वाले एजेंट का पता नहीं लगा।
पढ़ेंः रोजगार के नाम पर लाई गईं 150 नेपाली महिलाएं वाराणसी में ‘कैद’
विज्ञापन
इस बीच नेपाल से आई एक महिला की तहरीर पर शिवपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ रोजगार की बात कह कर छल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही, पूछताछ के लिए चांदमारी और नटिनियादाई के संदिग्ध छह लोगों को हिरासत में लिया गया है।
‘अमर उजाला’ ने 18 जुलाई को समाचार प्रकाशित किया था कि वाराणसी में किसी अज्ञात स्थान पर नेपाली महिलाएं कैद कर रखी गई हैं। ये महिलाएं नेपाल के बर्दिया (मधुवन) की रहने वाली बताई गई थी। इनमें से दो महिलाएं किसी तरह से बंधक बनाने वालों के चंगुल से छूट कर वापस अपने घर पहुंची और नेपाल के गुलरिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
दोनों ने बताया कि उन्हें छह जुलाई को संदीप नाम का एजेंट खाड़ी देशों में नौकरी का झांसा देकर बनारस ले आया था। इसके बाद उन्हें भी अन्य महिलाओं के साथ कैद कर लिया गया और सभी को पांच अलग-अलग मकानों में रखा गया था। सभी महिलाओं की निरंतर निगरानी एजेंट के आदमी करते हैं।
दोनों महिलाओं से मिली जानकारी के आधार पर नेपाल के अधिकारियों ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास में संपर्क किया और इसके बाद वहां के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की टीम शहर आई।
इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि नेपाल से आई टीम की सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन नेपाली महिलाएं और उन्हें यहां लाने वाले आरोपी नहीं मिल सके। फिलहाल हमारी तफ्तीश जारी है और मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास जारी है।
विज्ञापन
जिला पुलिस की टीम के साथ नेपाल की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने शिवपुर थाना के चांदमारी और नटिनियादाई क्षेत्र में देर रात तक छापामारी की लेकिन नेपाली महिलाएं और उन्हें लाने वाले एजेंट का पता नहीं लगा।
विज्ञापन
पढ़ेंः रोजगार के नाम पर लाई गईं 150 नेपाली महिलाएं वाराणसी में ‘कैद’
विज्ञापन
इस बीच नेपाल से आई एक महिला की तहरीर पर शिवपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ रोजगार की बात कह कर छल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही, पूछताछ के लिए चांदमारी और नटिनियादाई के संदिग्ध छह लोगों को हिरासत में लिया गया है।
‘अमर उजाला’ ने 18 जुलाई को समाचार प्रकाशित किया था कि वाराणसी में किसी अज्ञात स्थान पर नेपाली महिलाएं कैद कर रखी गई हैं। ये महिलाएं नेपाल के बर्दिया (मधुवन) की रहने वाली बताई गई थी। इनमें से दो महिलाएं किसी तरह से बंधक बनाने वालों के चंगुल से छूट कर वापस अपने घर पहुंची और नेपाल के गुलरिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
दोनों ने बताया कि उन्हें छह जुलाई को संदीप नाम का एजेंट खाड़ी देशों में नौकरी का झांसा देकर बनारस ले आया था। इसके बाद उन्हें भी अन्य महिलाओं के साथ कैद कर लिया गया और सभी को पांच अलग-अलग मकानों में रखा गया था। सभी महिलाओं की निरंतर निगरानी एजेंट के आदमी करते हैं।
दोनों महिलाओं से मिली जानकारी के आधार पर नेपाल के अधिकारियों ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास में संपर्क किया और इसके बाद वहां के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की टीम शहर आई।
इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि नेपाल से आई टीम की सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन नेपाली महिलाएं और उन्हें यहां लाने वाले आरोपी नहीं मिल सके। फिलहाल हमारी तफ्तीश जारी है और मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास जारी है।
Trending Videos
2015 के भूकंप के बाद नेपाल से बढ़ा पलायन
demo pic
नेपाल के अधिकारियों से सोमवार को गोरखा समुदाय के कुछ लोगों ने भी मुलाकात की। गोरखा समुदाय के लोगों ने बताया कि अप्रैल 2015 में नेपाल में भूकंप आया तो उसके बाद गरीबी की समस्या बढ़ी। इसके चलते रोजी-रोटी के लिए नेपाल से लोग पलायन करने लगे। इसी का फायदा मानव तस्करी करने वाले गिरोह से जुड़े लोग उठा रहे हैं।
नेपाल की युवतियों और महिलाओं को रोजगार और बेहतर जिंदगी का झांसा देकर उन्हें नई दिल्ली और मुंबई में देह व्यापार के धंधे में धकेल देते हैं। नेपाल की युवतियों को नई दिल्ली और मुंबई के साथ ही खाड़ी देशों तक ले जाने के लिए सोनौली से होते हुए बनारस आसान रूट रहा है।
नेपाली युवतियों और महिलाओं को रोजगार का झांसा देकर उन्हें सड़क मार्ग से बनारस लाया जाता है। इसके बाद ट्रेन और हवाई जहाज से अन्य जगहों पर भेजा जाता है। ऐसे मामले पूर्व में भी सामने आते रहे हैं लेकिन मानव तस्करी से जुड़े गिरोह की जड़े इतनी गहरी हैं कि किसी का वश नहीं चल पाता।
साथ ही, परिवार के जीविकोपार्जन के लालच में नेपाली युवतियां और महिलाएं भी मुंह खोलने से कतराती हैं। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि मानव तस्करी से जुड़ा गिरोह नेपाली युवतियों और महिलाओं को घरेलू नौकर का काम भी दिलाता है।
इसके बदले प्रत्येक महीने की निर्धारित तिथि को गिरोह के सदस्य मुलाकात कर मिलने वाली रकम का एक तिहाई हिस्सा हड़प लेते हैं। काम से निकाले जाने के डर से भुक्तभोगी महिलाएं और युवतियां कहीं शिकायत भी नहीं कर पाती हैं।
नेपाल की युवतियों और महिलाओं को रोजगार और बेहतर जिंदगी का झांसा देकर उन्हें नई दिल्ली और मुंबई में देह व्यापार के धंधे में धकेल देते हैं। नेपाल की युवतियों को नई दिल्ली और मुंबई के साथ ही खाड़ी देशों तक ले जाने के लिए सोनौली से होते हुए बनारस आसान रूट रहा है।
नेपाली युवतियों और महिलाओं को रोजगार का झांसा देकर उन्हें सड़क मार्ग से बनारस लाया जाता है। इसके बाद ट्रेन और हवाई जहाज से अन्य जगहों पर भेजा जाता है। ऐसे मामले पूर्व में भी सामने आते रहे हैं लेकिन मानव तस्करी से जुड़े गिरोह की जड़े इतनी गहरी हैं कि किसी का वश नहीं चल पाता।
साथ ही, परिवार के जीविकोपार्जन के लालच में नेपाली युवतियां और महिलाएं भी मुंह खोलने से कतराती हैं। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि मानव तस्करी से जुड़ा गिरोह नेपाली युवतियों और महिलाओं को घरेलू नौकर का काम भी दिलाता है।
इसके बदले प्रत्येक महीने की निर्धारित तिथि को गिरोह के सदस्य मुलाकात कर मिलने वाली रकम का एक तिहाई हिस्सा हड़प लेते हैं। काम से निकाले जाने के डर से भुक्तभोगी महिलाएं और युवतियां कहीं शिकायत भी नहीं कर पाती हैं।