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उस्ताद ने न हंगमा बरपाया न आंसू बहाने के दर्द-ए-दिल बयां किए
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 27 Apr 2016 01:54 AM IST
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उस्ताद ने न हंगमा बरपाया न आंसू बहाने के दर्द-ए-दिल बयां किए
सुरों के सरताज उस्ताद गुलाम अली ने इस बार न हंगामा बरपाया न तो चुपके-चुपके रात-दिन आंसू बहाने के दर्दे-दिल ही बयां किए। वो पूरे सुर में थे लेकिन कशमकश का साया भी उनके साथ चल रहा था। वहां न सरहद की बंदिशें थीं न दिलों की दूरियां लेकिन लय में एक कसक सी उठती रही और बिखरती रही। कुछ बात इशारों में निकली तो कुछ दिल में दबी रह गई। मौका और दस्तूर दोनों था लेकिन उस्ताद की चाहत फिर अधूरी रह गई। हिंदूवादी संगठनों के विरोधों के बीच कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच उन्होंने सुर लगाए लेकिन बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुरों का गुलदस्ता भेंट करने का उनका पुराना वादा इस बार भी पूरा नहीं हो सका।
उस्ताद पीएम को सुरों का गुलदस्ता भेंट करने की हसरत दिल में लिए फिर लौट गए। पिछली बार जब वह संकट मोचन में आए थे तो पीएम नरेंद्र मोदी के आने की खबरें सुर्खियों में छा गई थीं। तब पीएम ने अपनी विदेश यात्रा और काम की व्यस्तता को लेकर ट्वीट भी किया था। उन्होंने भी वादा किया था कि अगली बार वह संकट मोचन में जरूर आएंगे। रिश्तों में सुरों के जरिए गरमाहट का यह सिलसिला इस बार परवान चढ़ने की उम्मीद लोगों ने बांध रखी थी। तमाम कयासों के बीच गुलाम अली तो आए लेकिन पीएम इस बार भी नहीं आ सके। उस्ताद की इस बार की हाजिरी में वो अधूरापन अखरता नजर आया।
तमाम लम्हे इंतजार और टकटकी में बीत गए लेकिन इस बार न उन्होंने हंगामा ही बरपाया न तो चुपके-चुपके रात भर आंसू बहाने के दर्द-ए-दिल ही बयां किए। भीड़ के बीच से कई बार फरमाइश भी हुई लेकिन उनका कहना था कि मैं इंसानियत की गजलें लेकर आया हूं। उस्ताद ने कहा कि हनुमान जी के दरबार में सच्ची बातें होंगी। मैं अपनी सफाई हमेशा करता रहता हूं। इसलिए जो चुन चुके हैं उसे जाने दीजिए।
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इंसानियत की गजलें वह सुनाते रहे। संगीत प्रेमियों, मुरीदों के भी दिलों में उनके हंगामा बरपाने की चाहत दबी रह गई। उस्ताद महज तीन गजलों के बाद मंच से उठे। भीड़ पीछे चलने लगी। किसी तरह उन्हें संकट मोचन के अतिथिगृह तक ले जाया गया। वहां कुछ देर रुकने और महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के छोटे भाई प्रो. विजय नाथ मिश्र के अलावा सद्भावना एकता मंच के सदस्यों से मिलने के बाद निकल गए। सद्भावना एकता मंच के सदस्यों ने उन्हें स्मृति चिह्न और बुकें देकर सम्मानित किया।
कला प्रेमियों के लिए खोली गई हनुमत चित्रकला दीर्घा
वाराणसी। संकट मोचन संगीत समारोह में सुर, लय, ताल के साथ कला का समन्वय देखने लायक है। इस बार हनुमत कला दीर्घा देश-दुनिया के कला प्रेमियों के लिए अनमोल खजाना के रूप में सजाई गई है। बीएचयू दृश्य कला संकाय के अलावा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग के चित्रकारों ने हनुमान जी के जीवन चरित्र पर आधारित सौ पेेंटिंग की दीर्घा सजाई है।
50 चित्रों की कला दीर्घा का उद्घाटन महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने किया। इस दीर्घा का उद्घाटन उस्ताद गुलाम अली को करना था लेकिन सुरक्षा कारणों से वह वहां तक नहीं पहुंच सके। इस दीर्घा में डॉ. सुनील विश्वकर्मा, एस प्रणाम सिंह, वेद प्रकाश मिश्र, अनिल कुमार, डॉ.गरिमा रानी, आशा प्रकाश, मानती शर्मा, दिनेश यादव, पंकज शर्मा, राजेश, सुनील कुशवाहा, डॉ.शशिकांत नाग और संतोष सिंह के अलावा तीन विदेशी चित्रकारों की पेंटिंग लगाई गई है। 18 फीट के हनुमान की पेटिंग इस दीर्घा के बाहर हर किसी का ध्यान खींच रही है।
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उस्ताद पीएम को सुरों का गुलदस्ता भेंट करने की हसरत दिल में लिए फिर लौट गए। पिछली बार जब वह संकट मोचन में आए थे तो पीएम नरेंद्र मोदी के आने की खबरें सुर्खियों में छा गई थीं। तब पीएम ने अपनी विदेश यात्रा और काम की व्यस्तता को लेकर ट्वीट भी किया था। उन्होंने भी वादा किया था कि अगली बार वह संकट मोचन में जरूर आएंगे। रिश्तों में सुरों के जरिए गरमाहट का यह सिलसिला इस बार परवान चढ़ने की उम्मीद लोगों ने बांध रखी थी। तमाम कयासों के बीच गुलाम अली तो आए लेकिन पीएम इस बार भी नहीं आ सके। उस्ताद की इस बार की हाजिरी में वो अधूरापन अखरता नजर आया।
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तमाम लम्हे इंतजार और टकटकी में बीत गए लेकिन इस बार न उन्होंने हंगामा ही बरपाया न तो चुपके-चुपके रात भर आंसू बहाने के दर्द-ए-दिल ही बयां किए। भीड़ के बीच से कई बार फरमाइश भी हुई लेकिन उनका कहना था कि मैं इंसानियत की गजलें लेकर आया हूं। उस्ताद ने कहा कि हनुमान जी के दरबार में सच्ची बातें होंगी। मैं अपनी सफाई हमेशा करता रहता हूं। इसलिए जो चुन चुके हैं उसे जाने दीजिए।
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इंसानियत की गजलें वह सुनाते रहे। संगीत प्रेमियों, मुरीदों के भी दिलों में उनके हंगामा बरपाने की चाहत दबी रह गई। उस्ताद महज तीन गजलों के बाद मंच से उठे। भीड़ पीछे चलने लगी। किसी तरह उन्हें संकट मोचन के अतिथिगृह तक ले जाया गया। वहां कुछ देर रुकने और महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के छोटे भाई प्रो. विजय नाथ मिश्र के अलावा सद्भावना एकता मंच के सदस्यों से मिलने के बाद निकल गए। सद्भावना एकता मंच के सदस्यों ने उन्हें स्मृति चिह्न और बुकें देकर सम्मानित किया।
कला प्रेमियों के लिए खोली गई हनुमत चित्रकला दीर्घा
वाराणसी। संकट मोचन संगीत समारोह में सुर, लय, ताल के साथ कला का समन्वय देखने लायक है। इस बार हनुमत कला दीर्घा देश-दुनिया के कला प्रेमियों के लिए अनमोल खजाना के रूप में सजाई गई है। बीएचयू दृश्य कला संकाय के अलावा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग के चित्रकारों ने हनुमान जी के जीवन चरित्र पर आधारित सौ पेेंटिंग की दीर्घा सजाई है।
50 चित्रों की कला दीर्घा का उद्घाटन महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने किया। इस दीर्घा का उद्घाटन उस्ताद गुलाम अली को करना था लेकिन सुरक्षा कारणों से वह वहां तक नहीं पहुंच सके। इस दीर्घा में डॉ. सुनील विश्वकर्मा, एस प्रणाम सिंह, वेद प्रकाश मिश्र, अनिल कुमार, डॉ.गरिमा रानी, आशा प्रकाश, मानती शर्मा, दिनेश यादव, पंकज शर्मा, राजेश, सुनील कुशवाहा, डॉ.शशिकांत नाग और संतोष सिंह के अलावा तीन विदेशी चित्रकारों की पेंटिंग लगाई गई है। 18 फीट के हनुमान की पेटिंग इस दीर्घा के बाहर हर किसी का ध्यान खींच रही है।