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Varanasi: कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ NBW जारी, इस मामले में कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

Sat, 03 Jun 2023 05:32 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 03 Jun 2023 05:32 PM IST
सार

22 साल पुराने मामले में वाराणसी की अदालत ने शनिवार को रणदीप सिंह सुरजेवाला के डिस्चार्ज आवेदन को खारिज कर दिया। इसके साथ ही गैर जमानती वारंट भी जारी किया। इस मामले में प्राथमिकी रद्द करने की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले ही खारिज हो चुकी है। 

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NBW issued against Congress leader Randeep Singh Surjewala by varanasi court
वाराणसी कोर्ट में राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला - फोटो : फाइल

विस्तार

वाराणसी जिला मुख्यालय पर चक्काजाम, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के 22 साल पुराने मामले में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) अवनीश गौतम की अदालत ने 23 साल पुराने मामले में गैर जमानती वारंट जारी किया है। मामले में अगली सुनवाई नौ जून को होगी।

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अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपी का कहना है कि अदालत के पहले के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में उन्होंने याचिका दाखिल की है। उसके निस्तारण तक आरोप से मुक्त करने के प्रार्थना पत्र को दाखिल करने का समय दिया जाए। आरोपी को पहले हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर न्याय हित में अंतिम अवसर दिया जा चुका है। इसलिए आरोपी के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। आरोपी का प्रार्थना पत्र निरस्त कर गैर जमानती वारंट जारी किया जाता है।

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ये है पूरा मामला

वाराणसी के बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं को फर्जी ढंग से आरोपी बनाए जाने का आरोप लगाकर 21 अगस्त 2000 को युवा कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला और प्रदेश अध्यक्ष एसपी गोस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता आयुक्त कार्यालय परिसर में जबरन घुस गए थे।

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आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने आयुक्त कोर्ट में घुस कर हंगामा और तोड़फोड़ की थी। सूचना पर पुलिस सभी को शांत कराने गई तो प्रदर्शनकारी उलझ गए थे। पुलिस टीम ने बल प्रयोग किया तो कांग्रेस कार्यकर्ता पथराव करते हुए वहां से भागने लगे। इस दौरान पुलिस ने मौके से रणदीप सिंह सुरजेवाला और एसपी गोस्वामी सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था।

मामले में प्राथमिकी रद्द करने की सुरजेवाला की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले ही खारिज हो चुकी है। सुरजेवाला के अधिवक्ता का कहना है कि राज्यसभा सदस्य का नाम प्राथमिकी में नहीं है। गिरफ्तारी प्रपत्र और केस डायरी में भी उनका नाम नहीं है। इसके बावजूद उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।

इसी आधार पर प्रार्थना पत्र देकर मामले से उन्मोचित (छोड़ने) किए जाने का अनुरोध कोर्ट से किया गया था। कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध एडीजीसी विनय कुमार सिंह ने किया।

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