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राष्ट्रीय आर्थोडॉटिक दिवस: वाराणसी में टेढ़े-मेढ़े दांत और जबड़े की समस्या से ग्रसित 49 फीसदी बच्चे, बीएचयू की सर्वे रिपोर्ट में दावा 

Tue, 05 Oct 2021 11:31 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 05 Oct 2021 11:31 AM IST
सार

बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय के प्रो. टीपी चतुर्वेदी के नेतृत्व में हुए सर्वे की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। वाराणसी में करीब 49 प्रतिशत बच्चे टेढ़े मेढ़े दांत और जबड़े की समस्या से ग्रसित हैं।

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National Orthodontic Day: 49 percent children suffering from crooked teeth and jaw problems claims BHU survey report in Varanasi
दांत - फोटो : social media

विस्तार

वाराणसी में करीब 49 प्रतिशत बच्चे टेढ़े मेढ़े दांत और जबड़े की समस्या से ग्रसित हैं। बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. टीपी चतुर्वेदी के निर्देशन में हुए एक सर्वे में यह रिपोर्ट सामने आई है। इसमें अधिकांश बच्चों की उम्र दस साल से कम है। प्रो. चतुर्वेदी के अनुसार, ऐसे बच्चों के अभिभावकों को समय पर बच्चों के दांतों, जबड़े की जांच कराते रहना चाहिए, जिससे कि आगे चलकर उन्हें कोई परेशानी न हो। इसके प्रति जागरूकता के लिए ही हर साल पांच अक्तूबर को राष्ट्रीय आर्थोडॉटिक दिवस भी मनाया जाता है।

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तेजी से बदल रही जीवनशैली के हिसाब से खानपान के साथ ही दांतों की सुरक्षा भी बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए कि अच्छी सेहत, सही पाचन में दांतों का बड़ी भूमिका है। प्रो. चतुर्वेदी ने बताया कि आर्थोडॉटिंग डेंटिस्ट्री की सुपरस्पेशियलिटी है इसके तहत बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय में टेढे़ मेढे़ अनियमित दांत, जबड़े और चेहरे को ठीक किया जाता है।
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जानें क्या हैं मुख्य कारण
इसका कारण मुख्य रूप से वातावरण और आनुवांशिकी होता है। साथ ही मुंह के सांस लेने, अंगुठा चूसने, कुपोषण, जीभ के बनावट व गलत ढंग से खाना निगलने से होता है। कटे तालू एवं कटे होठ के कारण भी यह समस्या होती है। इससे खाने में कठिनाई, देखने में मुंह व चेहरा खराब लगता है। जबड़े व चेहरे का विकास बच्चों में ठीक से नहीं हो पाता है।

18 साल की उम्र से पहले इलाज करामा उचित

उन्होंने बताया कि सात से 18 साल तक के उम्र के दौरान इसका इलाज करा लेना उचित समय होता है। ऐसा इसलिए कि इसमें छह महीने से तीन साल तक का समय लग जाता है। प्रो. चतुर्वेदी ने बताया कि संकाय में पहले से आर्थोडॉंटिटक एमडीएस में तीन सीट के बाद अब इस साल से चार सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। ऐसे में अधिक से अधिक  छात्रों को इस बारे में जानकारी मिल सकती है।

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