बनारस में दुर्गा पूजा की तैयारियां: झूले पर माता रानी का आगमन, पुलिस कमिश्नर ने कहा- सख्ती से कराएं कोरोना नियमों का पालन
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शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि सात अक्तूबर से शुरू होगा। आश्विन महीने के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक देवी के नौ रूपों की पूजा की जाएगी। इस बार षष्ठी तिथि का क्षय होने से नवरात्रि 8 दिन की ही रहेगी। काशी के ज्योतिषशास्त्री व काशी विद्वत परिषद का कहना है कि देवी का आगमन इस बार झूले पर और गमन हाथी पर होगा। झूले पर माता का आगमन आपदा के संकेत दे रहा है। महाष्टमी 13 और महानवमी 14 अक्तूबर को है, जबकि 15 को दशहरा मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र ने बताया कि प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना के साथ ही देवी के नवरात्र पूजन और अनुष्ठान शुरू होंगे। इस बार मां दुर्गा बृहस्पतिवार को झूले पर सवार होकर आ रही हैं। झूले पर आगमन का फल मृत्यु तुल्य कष्ट कहा गया है। दुर्गा जी का प्रस्थान शुक्रवार 15 अक्तूबर दशमी तिथि को हाथी पर होगा।
यह अच्छी वृष्टि का सूचक होता है। पंचमी 10 अक्तूबर को रात तकरीबन 8.30 से शुरू होगी और 11 अक्तूबर को सुबह 6.05 तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी जो कि रात 3.40 तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी शुरू हो जाएगी जो कि 12 को पूरे दिन रहेगी। 11 अक्तूबर को देवी स्कंद माता और देवी कात्यायनी की पूजा की जाएगी।
अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कलश सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक होता है। प्रतिपदा पर रात 9.12 तक चित्रा नक्षत्र और रात 1.38 बजे तक वैधृति योग रहेगा। इन दोनों के शुरुआती दो चरणों के अलावा घट स्थापना की जा सकती है। चित्रा नक्षत्र के दो चरण सुबह 10.16 और वैधृति योग के दोपहर 3.17 पर समाप्त हो रहे हैं। इसके चलते घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.59 से 12.46 बजे तक श्रेष्ठ रहेगा।
साल में होते हैं 4 नवरात्र
देवी पुराण के अनुसार नौ शक्तियों के मिलन को नवरात्रि कहा जाता है, जो हर साल चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ में आती है। वसंत ऋतु में इसे चैत्र या वासंती नवरात्रि कहा जाता है, जबकि शरद ऋतुु व आश्विन मास में आने वाली नवरात्रि शारदीय कही जाती है। शेष दो यानी गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ में आते हैं। इनमें मां दुर्गा की 10 महा विद्याओं की साधना की जाती है।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि नवरात्रि में नौ दुर्गा को अलग-अलग तिथि के अनुसार उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने की मान्यता है।
प्रतिपदा : उड़द, हल्दी, माला-फूल।
द्वितीया : तिल, शक्कर, चूड़ी, गुलाल, शहद
तृतीया : लाल वस्त्र, शहद, खीर, काजल
चतुर्थी : दही, फल, सिंदूर, मसूर
पंचमी : दूध, मेवा,कमलपुष्प, बिंदी
षष्ठी : चुनरी, पताका, दूर्वा
सप्तमी : बताशा, इत्र, फल-पुष्प
अष्टमी : पूड़ी, पीली मिठाई, कमलगट्टा, चंदन, वस्त्र,
नवमी : खीर, सुहाग सामग्री, साबूदाना, अक्षत फल, बताशा
काशी जोन में 134 तो वरुणा जोन में 117 पंडाल
पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी में 251 पूजा पंडाल स्थापित होंगे। काशी जोन में सबसे अधिक 134 तो वरुणा जोन में 117 पंडाल बनाए जा रहे हैं। काशी जोन में सबसे अधिक पूजा पंडाल आदमपुर में और सबसे कम रामनगर में बनेंगे। वहीं, वरुणा जोन में सबसे अधिक सिगरा में और सबसे कम पंडाल लालपुर पांडेयपुर क्षेत्र में है।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराते हुए पूजा पंडाल स्थापित कराए जाएंगे। काशी जोन के आदमपुर में 22, लंका में 21, भेलूपुर में 19, कोतवाली में 18, चौक में 15, दशाश्वमेध में 14, लक्सा में नौ, चितईपुर व रामनगर में आठ-आठ पूजा पंडाल लगेंगे। वरुणा जोन में सिगरा में 22, चेतगंज में 20, कैंट में 17, मंडुवाडीह व सारनाथ में 14-14, शिवपुर में 13, जैतपुरा में 10, लालपुर-पांडेयपुर में सात पंडाल स्थापित होंगे।