नृसिंह चतुर्दशी: 2:20 घंटे के शुभ मुहूर्त में मंत्र के जाप, 18 प्रमुख मंदिरों में पूजन; लक्ष्मी कृपा की कामना
Narsimha Jayanti: काशी में नृसिंह चतुर्दशी पर भक्तों ने भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का श्रद्धापूर्वक पूजन किया। 18 प्रमुख मंदिरों में भीड़ रही और विशेष मुहूर्त में पूजा-अर्चना हुई। अभिषेक, शृंगार, मंत्रजाप और प्रह्लाद कथा का आयोजन हुआ। विश्व हिंदू परिषद समेत कई संस्थाओं ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जहां वैदिक रीति से पूजन और पाठ हुआ।
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Varanasi News: नृसिंह चतुर्दशी पर काशी में बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह भगवान के प्राकट्योत्सव पर भक्तों ने श्रद्धा और भक्तिभाव अर्पित किया। शहर के 18 प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ रही। शाम को 2:20 घंटे के विशिष्ट मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। भक्तों ने विघ्नहर्ता, अभयदान और साक्षात लक्ष्मी की कृपा की कामना की।
वैदिक पंचांग के अनुसार, यह पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में अवतार लिया था। मंदिरों में भगवान का शृंगार कर चंदन लेपन किया गया। गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक कर पीले फूल, केसरयुक्त दूध, मिठाइयां, चंदन, धूप और दीप अर्पित किए गए। भक्तों ने व्रत रखकर भगवान नृसिंह के मंत्रों का जप किया और भक्त प्रह्लाद की कथा का श्रवण किया।
हुई पूजा-अर्चना
काशी खंड में वर्णित भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूप-विघ्नहर्ता, अभयदायक, लक्ष्मीप्रद, अत्युग्र नृसिंह, निर्वाण नृसिंह, महाबल नृसिंह, प्रचंड नृसिंह, गिरि नृसिंह, महाभयहर नृसिंह, ज्वाला नृसिंह, कोलाहल नृसिंह, विदार नृसिंह और लक्ष्मी नृसिंह आदि मंदिरों में शृंगार, दर्शन और पूजन-अर्चन किया गया।
विश्व हिंदू परिषद, धर्म जागरण न्यास और वेद शिक्षा मंदिर, नृसिंह मठ (मणिकर्णिका) में विशेष शृंगार कर पूजन हुआ। वैदिक विद्यार्थियों ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनीय शाखा का पाठ किया। रामायण चालीसा का विमोचन परिषद काशी प्रांत के सह मंत्री सत्य प्रकाश सिंह ने किया। वैदिक रीति से कोलाहल नृसिंह भगवान का षोडशोपचार पूजन आचार्य पं. बिट्टू झा के नेतृत्व में हुआ।
मुख्य यजमान अनुराग पांडेय सपरिवार रहे। पूजन में शिवम उपाध्याय, चंद्र मोहन, राकेश अग्रहरि, राजेश विश्वकर्मा, पं. कामेश्वर पाठक और विजय चौधरी आदि उपस्थित रहे। श्रीविद्यामठ में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और अन्नपूर्णा मंदिर स्थित नृसिंह भगवान का पूजन कांची पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने किया। अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के पास स्थित नृसिंह मंदिर, प्रह्लाद घाट पर स्थित स्वयंभू नृसिंह मंदिर और लक्ष्मी नृसिंह मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही।
नृत्य-नाटिका से कराए नृसिंह प्रभु के जीवन दर्शन: इस्कॉन मंदिर परिवार की ओर से इस्कॉन मंदिर दुर्गाकुंड में राष्ट्र कल्याण के लिए भगवान नृसिंह का विशेष पूजन हुआ। भक्तों ने यज्ञ, अभिषेक और भजन-कीर्तन किया। मंदिर के प्रमुख अच्युत मोहन दास ने बताया कि नृसिंह भगवान शक्तिशाली और रौद्र अवतार हैं, जो आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए राक्षस हिरण्यकश्यप का वध किया। पूजन में मुरारी दास, रसिक गोविंद दास, राम केशव दास और मुरारी गुप्त दास आदि शामिल रहे।
नृसिंह लीला: 200 साल पुराने नृसिंह मुखौटे के दर्शन की लीला, हिरण्यकश्यप का वध
प्राचीन नृसिंह लीला के चौथे दिन नृसिंह चतुर्दशी पर बृहस्पतिवार को प्रह्लाद घाट पर जबरदस्त भीड़ रही। लीला के पात्रों ने नृसिंह मंदिर के बाद तुलसी मंदिर में रखे 200 साल पुराने भगवान नृसिंह के मुखौटे के दर्शन किए। इसके बाद घाट की सीढ़ियों पर भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान नृसिंह उसकी रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। अपने को ईश्वर मानने वाले हिरण्यकश्यप का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।
श्रीनृसिंह लीला समिति की ओर से लीला शुरू होने से पहले घाट पर स्थित नृसिंह मंदिरों में श्रृंगार और दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रही। लीला की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। पिता हिरण्यकश्यप द्वारा भक्त प्रह्लाद पर तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं। पिता अपने को ईश्वर के रूप में पूजने के लिए प्रह्लाद को विवश करता है, लेकिन वह अपने पिता की जगह नारायण को ही अपना आराध्य देव मानता है।