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तुलसीघाट पर 18 नवंबर को सजेगा नागनथैया का मेला
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वाराणसी। तुलसीघाट पर गंगा कालिंदी का रूप धरेंगी और कन्हैया कालिया के फन को नथेंगे। मनमोहन श्याम कंदुकक्रीड़ा करते हुए कालिया का मान मर्दन करने के बाद नृत्य मुद्रा में भक्तों को दर्शन देंगे। काशी के लक्खा मेलों में शुमार नाग नथैया की लीला 18 नवंबर को सजेगी। कोरोना संक्रमण के कारण हर साल की तरह भीड़भाड़ नहीं होगी। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मेले का आयोजन किया जाएगा।
अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि नाग नथैया लीला की तैयारियां चल रही हैं। जानकीघाट पर कालिया नाग के प्रतिरूप को अंतिम रूप दे दिया गया है। लीला समिति के सदस्यों के साथ मिलकर मांझी समाज के लोगों ने लगभग 12 फ ीट लंबे नाग को आकार दिया है। लीला से ठीक पहले नाग को तुलसीघाट पर जल में डुबा दिया जाएगा। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 450 साल पहले शुरू कराई गई लीला का प्रसंग बुधवार को दोपहर तीन बजे जीवंत होगा। इसमें विशाल नाग के फ न पर चढ़कर प्रभु श्रीकृष्ण जल में परिक्रमा करते हुए दर्शन देंगे। काशी नरेश भी आयोजन में शामिल होते थे और आयोजकों को स्वर्ण मुद्रा प्रदान करने की परंपरा का भी निर्वाह करते रहे। आज भी काशी राज परिवार परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है।
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अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि नाग नथैया लीला की तैयारियां चल रही हैं। जानकीघाट पर कालिया नाग के प्रतिरूप को अंतिम रूप दे दिया गया है। लीला समिति के सदस्यों के साथ मिलकर मांझी समाज के लोगों ने लगभग 12 फ ीट लंबे नाग को आकार दिया है। लीला से ठीक पहले नाग को तुलसीघाट पर जल में डुबा दिया जाएगा। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 450 साल पहले शुरू कराई गई लीला का प्रसंग बुधवार को दोपहर तीन बजे जीवंत होगा। इसमें विशाल नाग के फ न पर चढ़कर प्रभु श्रीकृष्ण जल में परिक्रमा करते हुए दर्शन देंगे। काशी नरेश भी आयोजन में शामिल होते थे और आयोजकों को स्वर्ण मुद्रा प्रदान करने की परंपरा का भी निर्वाह करते रहे। आज भी काशी राज परिवार परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है।
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