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नाइट कर्फ्यू के पालन के साथ होगी खुदा की इबादत, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कोरोना गाइडलाइन मानने की अपील की

Sat, 10 Apr 2021 12:04 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 10 Apr 2021 12:04 PM IST
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Muslim religious leaders appealed to follow Corona Guideline Khuda ibadat will be in night curfew
नदेसर स्थित जामा मस्जिद से नमाज अदा करके निकलते लोग। - फोटो : अमर उजाला

खुदा की इबादत के महीने की शुरुआत तरावीह के साथ होगी। चांद नजर आने के बाद 13 अप्रैल से रमजान की शुरुआत हो सकती है। वाराणसी में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सभी से प्रशासनिक निर्देशों के पालन की अपील की है। इसमें नाइट कर्फ्यू का पालन करने के साथ इबादत की सलाह दी गई है।

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कोरोना के कारण पिछले साल रमजान का महीना और नमाज घरों में ही अदा की गई थी। वहीं इस बार कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। जमीअत उलमा शहर बनारस के सदर मुफ्ती शमीम अहमद अल हुसैनी काशमी ने बताया कि चांद की तस्दीक के बाद रोजे का एलान किया जाएगा। एहतियात बरतने का नाम ही रोजा है।
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जितना हो सके शासन-प्रशासन के दिशा निर्देशों का पालन करें। खुद को बचना और बचाना, दूसरों की मदद करना रमजान में होता है। नाइट कर्फ्यू का पालन करने के साथ इबादत करें। नाइट कर्फ्यू लगने के साथ ही तीन, पांच और छह पारे की तरावीह पर रोक लगना तय है। इन सभी तरावीह में दो से ढाई घंटे का समय लगता है जो मुमकिन नहीं है। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए इबादत की जाएगी।

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ये दिए गए निर्देश
-रमजान में भी कोविड प्रोटोकॉल पर पूरी तरह से अमल किया जाए।
-रमजान के रोजे फर्ज हैं, इसलिए सारे मुसलमान जरूर रखें।
तरावीह सुन्नत मुअक्किदा है उसका एहतिमाम जरूर करें।
-मस्जिदों में तरावीह में डेढ़ पारे ही पढ़े जाएं, जिससे कि नमाजी नाइट कर्फ्यू शुरू होने से पहले अपने अपने घर पहुंच जाएं।
-मस्जिद में 100 से अधिक लोग एकत्रित न हों।
मस्जिद में भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जाए।
सेहरी के समय जगाने के लिए लाउडस्पीकर का प्रयोग न करें।
इफ्तार में भी 100 से अधिक लोग जमा न हों।
रमजान में विशेषकर इफ्तार के समय कोरोना के अंत के लिए दुआ करें।
जो लोग हर साल मस्जिद में गरीबों के लिए इफ्तारी का आयोजन करते थे वह लोग इस साल भी करें।
जो लोग हर साल रमजान में इफ्तार पार्टियां करते थे वह इसी रकम को या इसका राशन गरीबों को दे दें।
जिन लोगों पर जकात फर्ज है, वह जरूर अदा करें।

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