{"_id":"5b443e274f1c1b10278b5718","slug":"munna-bajrangi-deadbody-arrived-at-his-native-village","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" बेटे ने दी मुन्ना बजरंगी को मुखाग्नि, मणिकर्णिका घाट पर उमड़ा हुजूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटे ने दी मुन्ना बजरंगी को मुखाग्नि, मणिकर्णिका घाट पर उमड़ा हुजूम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:41 PM IST
विज्ञापन
मुन्ना बजरंगी का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत जेल में सोमवार को हुई माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसका अंतिम संस्कार मंगलवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हो गया। मुन्ना बजरंगी के बेटे समीर सिंह ने मुखाग्नि दी।
इस दौरान मणिकर्णिका घाट पर 'मुन्ना बजरंगी अमर रहे' के नारे भी गूंजे। माफिया डॉन के अंतिम संस्कार में घाट पर उमड़े हुजूम को देखते हुए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। इससे पहले मुन्ना बजरंगी का शव मंगलवार सुबह उसके पैतृक घर(जौनपुर) पहुंचा।
जौनपुर सीमा में प्रवेश करने के दौरान कई गाड़ियों का काफिला शव वाहन के साथ चल रहा था। शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। यहां पर लोगों का पहले से जमावड़ा लगा था।
विज्ञापन
कहीं शोक तो कहीं गुस्से का माहौल दिखा। गांव में शव पहुंचने से पहले ही डॉन का आवास पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था। मड़ियाहूं से लेकर सुरेरी और कसेरू गांव तक जगह-जगह फोर्स तैनात थी।
अंतिम संस्कार के लिए माफिया का शव यहां से वाराणसी के लिए 9: 20 बजे रवाना हुआ। दर्जनों गाडियों के काफिले के संग मुन्ना बजरंगी का शव वाहन वाराणसी में प्रवेश किया।
सभी वाहनों को घाट जाने की इजजात नहीं दी गई। बता दें कि मुन्ना बजरंगी की सोमवार को बागपत जेल में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी।
विज्ञापन
इस दौरान मणिकर्णिका घाट पर 'मुन्ना बजरंगी अमर रहे' के नारे भी गूंजे। माफिया डॉन के अंतिम संस्कार में घाट पर उमड़े हुजूम को देखते हुए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। इससे पहले मुन्ना बजरंगी का शव मंगलवार सुबह उसके पैतृक घर(जौनपुर) पहुंचा।
विज्ञापन
जौनपुर सीमा में प्रवेश करने के दौरान कई गाड़ियों का काफिला शव वाहन के साथ चल रहा था। शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। यहां पर लोगों का पहले से जमावड़ा लगा था।
विज्ञापन
कहीं शोक तो कहीं गुस्से का माहौल दिखा। गांव में शव पहुंचने से पहले ही डॉन का आवास पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था। मड़ियाहूं से लेकर सुरेरी और कसेरू गांव तक जगह-जगह फोर्स तैनात थी।
अंतिम संस्कार के लिए माफिया का शव यहां से वाराणसी के लिए 9: 20 बजे रवाना हुआ। दर्जनों गाडियों के काफिले के संग मुन्ना बजरंगी का शव वाहन वाराणसी में प्रवेश किया।
सभी वाहनों को घाट जाने की इजजात नहीं दी गई। बता दें कि मुन्ना बजरंगी की सोमवार को बागपत जेल में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी।
तीन साल पहले आखिरी बार घर आया था मुन्ना
मुन्ना बजरंगी मां की तेरहवीं में शामिल होने के लिए तीन साल पहले पेरोल पर छूटकर आखिरी बार पांच दिन के लिए घर आया था। मुन्ना बजरंगी की मां लीलावती सिंह का निधन आठ मई, 2015 को हो गया था। उस वक्त बजरंगी सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद था। मां की मौत के बाद शुद्धक और तेरहवीं के लिए उसने 20 हजार लोगों को निमंत्रण बांटा था। दस हजार लोग आए भी थे।
पहली पत्नी ने देवर से कर ली थी शादी
मुन्ना बजरंगी की शादी किशोरावस्था में हुई थी। 1984 में उसने कालीन व्यवसायी को गोली मारी और फरार हो गया। लंबे समय तक फरारी काटता रहा। भोपाल गैस कांड में मुन्ना की मौत की अफवाह के बाद पत्नी शकुंतला ने देवर राजेश के साथ शादी कर ली। एक बेटी को जन्म देने के कुछ दिन बाद शकुंतला की मौत हो गई।
पहली पत्नी ने देवर से कर ली थी शादी
मुन्ना बजरंगी की शादी किशोरावस्था में हुई थी। 1984 में उसने कालीन व्यवसायी को गोली मारी और फरार हो गया। लंबे समय तक फरारी काटता रहा। भोपाल गैस कांड में मुन्ना की मौत की अफवाह के बाद पत्नी शकुंतला ने देवर राजेश के साथ शादी कर ली। एक बेटी को जन्म देने के कुछ दिन बाद शकुंतला की मौत हो गई।
जेलों में कैद चर्चित नामों की धुकधुकी बढ़ी
उत्तर प्रदेश की जेलों में मुन्ना बजरंगी की तरह पूर्वांचल के कई चर्चित नाम कैद हैं। इनमें से एमएलसी बृजेश सिंह शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल में और उनका करीबी त्रिभुवन सिंह मिर्जापुर जेल में निरुद्ध है।
आगरा जेल में मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी निरुद्ध हैं। वहीं, सुभाष ठाकुर फतेहगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में मिर्जापुर जेल में चंदौली का निलंबित एआरटीओ आरएस यादव निरुद्ध है।
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद प्रदेश की जेलों में सतर्कता और निगरानी बढ़ाने का निर्देश सरकार स्तर से दिया गया है। सोमवार को जिला जेल के जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि बंदियों और मुलाकातियों की तलाशी में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
बंदीरक्षकों को मुस्तैदी से ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि वाराणसी जिला जेल और सेंट्रल जेल की क्षमता से ढाई गुना ज्यादा बंदी कैद हैं।
आगरा जेल में मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी निरुद्ध हैं। वहीं, सुभाष ठाकुर फतेहगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में मिर्जापुर जेल में चंदौली का निलंबित एआरटीओ आरएस यादव निरुद्ध है।
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद प्रदेश की जेलों में सतर्कता और निगरानी बढ़ाने का निर्देश सरकार स्तर से दिया गया है। सोमवार को जिला जेल के जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि बंदियों और मुलाकातियों की तलाशी में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
बंदीरक्षकों को मुस्तैदी से ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि वाराणसी जिला जेल और सेंट्रल जेल की क्षमता से ढाई गुना ज्यादा बंदी कैद हैं।
जरायम जगत में कारपोरेट कल्चर लेकर आया था बजरंगी
बनारस सहित पूर्वांचल के जरायम जगत में कारपोरेट कल्चर को अपनाने वाला पहला बदमाश मुन्ना बजरंगी था। इसी वजह से उसके पास सर्वाधिक संख्या मेें शूटर थे।
बजरंगी और उसके गिरोह के बदमाशों को करीब से जानने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार वो अपने शूटरों को निजी कंपनियों की तरह हर महीना निर्धारित तनख्वाह देता था। इसके अतिरिक्त शूटरों को ब्रांडेड कंपनी के जूते और कपड़े मुहैया कराता था। रंगदारी की लंबी रकम हाथ लगने पर वसूलने वाले शूटर को उसका एक निश्चित हिस्सा देता था।
इस वजह से बजरंगी ने 1995 से 2008 के बीच शूटरों की अच्छी-खासी खेप खड़ी की थी। इस बीच तेजी से एनकाउंटर हुए और कई शूटर मारे गए तब जाकर बजरंगी का गिरोह थोड़ा कमजोर पड़ा।
2009 में गिरफ्तार होने के बाद बजरंगी के पास पहले जैसे शार्प शूटर नहीं रह गए थे। बताया जाता है कि बजरंगी गिरोह की देखादेखी पूर्वांचल की अन्य गैंगों ने भी कारपोरेट कल्चर को अपनाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।
बजरंगी और उसके गिरोह के बदमाशों को करीब से जानने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार वो अपने शूटरों को निजी कंपनियों की तरह हर महीना निर्धारित तनख्वाह देता था। इसके अतिरिक्त शूटरों को ब्रांडेड कंपनी के जूते और कपड़े मुहैया कराता था। रंगदारी की लंबी रकम हाथ लगने पर वसूलने वाले शूटर को उसका एक निश्चित हिस्सा देता था।
इस वजह से बजरंगी ने 1995 से 2008 के बीच शूटरों की अच्छी-खासी खेप खड़ी की थी। इस बीच तेजी से एनकाउंटर हुए और कई शूटर मारे गए तब जाकर बजरंगी का गिरोह थोड़ा कमजोर पड़ा।
2009 में गिरफ्तार होने के बाद बजरंगी के पास पहले जैसे शार्प शूटर नहीं रह गए थे। बताया जाता है कि बजरंगी गिरोह की देखादेखी पूर्वांचल की अन्य गैंगों ने भी कारपोरेट कल्चर को अपनाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।