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Mukhtar Ansari: माफिया मुख्तार से डरे नहीं, छह लोगों की गवाही से मिली सजा; अवधेश राय को शरीर में लगी थी 3 गोली
Tue, 06 Jun 2023 10:05 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 06 Jun 2023 10:05 AM IST
सार
अवधेश राय हत्याकांड में छह गवाहों की गवाही अहम रही। गवाह माफिया से डरे नहीं। छह लोगों की गवाही से ही माफिया मुख्तार को सजा मिली। अवधेश राय के शरीर में बाएं तरफ तीन गोली लगी थी। मौके से चार खोखे मिले थे।
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माफिया मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
अवधेश राय हत्याकांड में छह गवाहों की गवाही की वजह से मुख्तार अंसारी आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया। इसमें सबसे अहम गवाही घटना के वादी और चश्मदीद पूर्व मंत्री अजय राय के अलावा विजय कुमार पांडेय की रही। पुलिस की ओर से दो प्रमुख गवाह तत्कालीन चेतगंज थाना प्रभारी उदयभान सिंह और कृपाशंकर शुक्ल रहे।
इसके अलावा पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. एसके त्रिपाठी और चंद्रभूषण राय भी अभियोजन की ओर से गवाह थे। वहीं, मुख्तार की ओर से उसके भाई सिबगतुल्लाह अंसारी और रामजी राय के अलावा चार अन्य लोगों ने गवाही दी। हालांकि, वादी की ओर से एक गवाह कतवारू चौहान की गवाही अदालत में नहीं हो पाई थी।
चोरी के वाहन से आए थे बदमाश
अभियोजन की ओर से अदालत में कहा गया कि चोरी के वाहन से आए हमलावर पिस्टल और रिवॉल्वर से लैस थे। अवधेश राय के शरीर में बाएं तरफ सिर सहित अन्य हिस्से में तीन गोली मारी गई थी। घटनास्थल से 9एमएम के चार खोखे मिले थे। हमलावरों का उद्देश्य एकमात्र अवधेश राय की हत्या करना था। अजय राय और विजय पांडेय ने अदालत में बयान दिया कि उन्होंने अपने सामने मुख्तार अंसारी और अन्य को अवधेश राय पर गोली चलाते हुए देखा था।
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पिता की बीमारी का तर्क भी काम नहीं आया
मुख्तार अंसारी की ओर से पूर्व विधायक व उसके भाई सिबगतुल्ला अंसारी ने बयान दिया कि तीन अगस्त 1991 को उनके पिता सुभानुल्लाह अंसारी की तबीयत खराब थी। इसके चलते हम और मुख्तार परिवार के अन्य लोग उनका उपचार कराने में व्यस्त थे।
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इसके अलावा पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. एसके त्रिपाठी और चंद्रभूषण राय भी अभियोजन की ओर से गवाह थे। वहीं, मुख्तार की ओर से उसके भाई सिबगतुल्लाह अंसारी और रामजी राय के अलावा चार अन्य लोगों ने गवाही दी। हालांकि, वादी की ओर से एक गवाह कतवारू चौहान की गवाही अदालत में नहीं हो पाई थी।
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चोरी के वाहन से आए थे बदमाश
अभियोजन की ओर से अदालत में कहा गया कि चोरी के वाहन से आए हमलावर पिस्टल और रिवॉल्वर से लैस थे। अवधेश राय के शरीर में बाएं तरफ सिर सहित अन्य हिस्से में तीन गोली मारी गई थी। घटनास्थल से 9एमएम के चार खोखे मिले थे। हमलावरों का उद्देश्य एकमात्र अवधेश राय की हत्या करना था। अजय राय और विजय पांडेय ने अदालत में बयान दिया कि उन्होंने अपने सामने मुख्तार अंसारी और अन्य को अवधेश राय पर गोली चलाते हुए देखा था।
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पिता की बीमारी का तर्क भी काम नहीं आया
मुख्तार अंसारी की ओर से पूर्व विधायक व उसके भाई सिबगतुल्ला अंसारी ने बयान दिया कि तीन अगस्त 1991 को उनके पिता सुभानुल्लाह अंसारी की तबीयत खराब थी। इसके चलते हम और मुख्तार परिवार के अन्य लोग उनका उपचार कराने में व्यस्त थे।
इसी दौरान सुबह 11 बजे पता लगा कि बनारस में नामी आदमी अवधेश राय की हत्या कर दी गई। मुख्तार अंसारी को इस मामले में राजनीतिक रंजिश के चलते फंसाया गया है। अवधेश राय से मुख्तार अंसारी का किसी भी तरह का कोई वास्ता नहीं था। आपराधिक प्रवृत्ति के अवधेश राय की हत्या अनिल सिंह की रंजिश में की गई थी।
दोपहर एक बजे हत्या हुई, सुबह 11 बजे कैसे पता चल गया
अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष का सामान्य कथन है कि उन्हें सुबह 11 बजे सूचना मिली थी कि अवधेश राय की हत्या वाराणसी में कर दी गई है। उस समय मुख्तार अंसारी गाजीपुर में अपने घर पर था। जबकि, अभियोजन पक्ष ने साबित किया है कि दोपहर एक बजे अवधेश राय की हत्या की गई थी। ऐसे में बचाव पक्ष के तथ्य विश्वास योग्य नहीं प्रतीत होते हैं।
अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष का सामान्य कथन है कि उन्हें सुबह 11 बजे सूचना मिली थी कि अवधेश राय की हत्या वाराणसी में कर दी गई है। उस समय मुख्तार अंसारी गाजीपुर में अपने घर पर था। जबकि, अभियोजन पक्ष ने साबित किया है कि दोपहर एक बजे अवधेश राय की हत्या की गई थी। ऐसे में बचाव पक्ष के तथ्य विश्वास योग्य नहीं प्रतीत होते हैं।
वहीं, तथ्यों का विश्लेषण किया जाए तो गाजीपुर से लगभग सौ किलोमीटर दूर वाराणसी स्थित घटनास्थल पर पहुंचना अभियुक्त के लिए असंभव नहीं प्रतीत होता है। अदालत का यह निष्कर्ष है कि तीन अगस्त 1991 को मुख्तार अंसारी द्वारा विधि विरुद्ध जमाव के सदस्य के रूप में उनके सामान्य उद्देश्य के अनुक्रम में अवधेश राय की गोली मार कर हत्या की गई।