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Mukhtar Ansari: 26 वर्ष बीते, लेकिन बनारस के रूंगटा परिवार को नहीं मिला न्याय, शव तक नहीं मिला था

Sun, 30 Apr 2023 08:21 AM IST
उत्पल कांत पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 30 Apr 2023 08:21 AM IST
सार

वाराणसी के जवाहर नगर एक्सटेंशन निवासी महावीर प्रसाद रूंगटा ने 23 जनवरी 1997 को भेलूपुर थाने में अपने भाई नंद किशोर रूंगटा के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना शुरू की तो सामने आया कि विजय के रूप में मुख्तार अंसारी ही झारखंड का कोयला कारोबारी बनकर कारोबार के सिलसिले में नंद किशोर रूंगटा से मिला था।

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Mukhtar Ansari 26 years passed but Banaras Rungta family did not get justice
नंद किशोर रूंगटा का घर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

माफिया मुख्तार अंसारी और उसके गिरोह के लोगों ने वाराणसी के जवाहर नगर एक्सटेंशन निवासी रहे कोयला कारोबारी और विश्व हिंदू परिषद के कोषाध्यक्ष नंद किशोर रूंगटा के परिवार को भी गहरा जख्म दिया है। गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट से संबंधित जिस मुकदमे में मुख्तार को 10 साल की सजा सुनाई है, उसमें नंद किशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या का भी उल्लेख है।

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नंद किशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या से संबंधित जो मूल मुकदमा है, वह आज भी कोर्ट में लंबित है। इस मामले की पैरवी सीबीआई कर रही है। मुकदमे में नामजद दो बदमाश 26 साल बाद भी नहीं पकड़े जा सके हैं। सीबीआई की तरफ से दोनों के खिलाफ दो-दो लाख रुपये के इनाम घोषित किए गए हैं।

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कोयला कारोबारी बनकर मिला था मुख्तार

जवाहर नगर एक्सटेंशन निवासी महावीर प्रसाद रूंगटा ने 23 जनवरी 1997 को भेलूपुर थाने में अपने भाई नंद किशोर रूंगटा के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि 22 जनवरी 1997 को सफेद रंग की मारूती वैन में सवार विजय सिंह और उसके साथियों ने उनके भाई का अपहरण कर लिया।

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तीन करोड़ रुपये की मांगी गई थी फिरौती

Mukhtar Ansari 26 years passed but Banaras Rungta family did not get justice
मुख्तार अंसारी। - फोटो : अमर उजाला

पुलिस ने विवेचना शुरू की तो सामने आया कि विजय के रूप में मुख्तार अंसारी ही झारखंड का कोयला कारोबारी बनकर कारोबार के सिलसिले में नंद किशोर रूंगटा से मिला था। चुनाव के लिए मुख्तार को पैसा चाहिए था। उसने नंद किशोर रूंगटा से कारोबार के संबंध में बातचीत करने के लिए उन्हें अपनी वैन में बैठाया और फिर उनका अपहरण कर तीन करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। पुलिस से शिकायत करने पर परिजनों को बम से उड़ाने की धमकी देकर मुख्तार अंसारी ने पहली किस्त वसूल भी ली थी, लेकिन उसके बाद नंद किशोर रूंगटा का कहीं पता ही नहीं लगा। ।

कहा जाता है कि नंद किशोर रूंगटा की हत्या कर शव प्रयागराज में ठिकाने लगा दिया गया था। परिजनों को अब तक नंदकिशोर का शव नहीं मिला है। इसकी टीस पूरे परिवार को है। यह मामला सामने आने के बाद अपहरण के मुकदमे में हत्या और आपराधिक षड्यंत्र संबंधी धाराएं भी बढ़ा दी गईं। नौ आरोपियों में से तीन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद एक अगस्त 1997 को मुकदमे की विवेचना सीबीआई को सौंप दी गई थी

तीन आरोपी भेजे गए थे जेल, दो अब तक फरार

Mukhtar Ansari 26 years passed but Banaras Rungta family did not get justice
माफिया मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला।

सीबीआई को विवेचना सौंपे जाने से पहले भेलूपुर थाने के तीन विवेचकों ने नंद किशोर रूंगटा केस की जांच की थी। पुलिस ने नौ आरोपियों को चिह्नित कर नामजद किया था। उनमें मुख्तार अंसारी, गुरमीत सिंह उर्फ हैप्पी, जसविंदर सिंह, परविंदर सिंह, अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर, सहाबुद्दीन, मूसे भाई, लालजी यादव उर्फ मास्टर और जितेंद्र तिवारी का नाम शामिल था। इनमें से गुरमीत, जसविंदर और परविंदर को 18 मार्च 1997 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। गाजीपुर के महरूपुर निवासी अताउर रहमान और सहाबुद्दीन पर आज भी सीबीआई की ओर से दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित है। मुकदमे में आगे क्या हुआ, इसके बारे में भेलूपुर थाने की पुलिस के साथ ही कमिश्नरेट के उच्चाधिकारियों को भी कोई जानकारी नहीं है।
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ईश्वर और अदालत पर पूरा भरोसा है

नंद किशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या की घटना से उनके परिजन 26 साल बाद भी नहीं उबर पाए हैं। जवाहर नगर एक्सटेंशन में रहने वाले उनके परिजनों को पुलिस सुरक्षा मिली हुई है। शनिवार की दोपहर घर पर सन्नाटा पसरा था। सुरक्षा में तैनात गार्डों ने कहा कि यहां किसी से बात नहीं हो पाएगी। काफी प्रयास के बाद नंद किशोर रूंगटा के बेटे नवीन रूंगटा ने संक्षिप्त बात की। उन्होंने कहा कि कि जब पिता जी का अपहरण हुआ था, तब वह लगभग 23-24 साल के थे। उनके चाचा महावीर प्रसाद रूंगटा मुकदमे के वादी हैं ।

सीबीआई की देखरेख में मुकदमा अदालत में लंबित है। 22 जनवरी 1997 के बाद से उन्होंने अपने पिताजी को नहीं देखा। उनकी हत्या की बात कही गई, लेकिन उन्हें उनके पिताजी का शव भी नसीब नहीं हुआ। सीबीआई से भी इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। एमपी-एमएलए कोर्ट से मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा सुनाए जाने की बात पर नवीन ने कहा कि ईश्वर और अदालत पर हमें भी पूरा भरोसा है।

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