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बड़ा गणेश में छत से गिरकर युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट की मौत
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वाराणसी। बड़ा गणेश मोहल्ला निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट कंचन कुमार कुशवाहा (45) की बृहस्पतिवार को पांच मंजिल छत से नीचे गिरने के कारण मौत हो गई। परिजन उन्हें लेकर कबीरचौरा हॉस्पिटल गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी पाकर मौके पर पहुंची कोतवाली थाने की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों के अनुसार, बंदरों के दौड़ाने पर कंचन छत से नीचे गिरे हैं। कोतवाली थाना अंतर्गत बड़ा गणेश निवासी कंचन के परिजनों के अनुसार, वह शाम के समय छत पर बंदर भगाने के लिए गए थे। बंदरों के समूह द्वारा दौड़ाने पर पैर फिसलने के कारण वह असंतुलित होकर पड़ोस में रहने वाले पट्टीदार के घर के आंगन में गिर गए। कंचन के छत से गिरने की आवाज सुनकर परिजन दौड़ कर मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कोतवाली इंस्पेक्टर प्रमोद पांडेय ने बताया कि घटना की सूचना पाकर पुलिस मौके पर गई थी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले किया जाएगा। उधर, परिजनों ने बताया कि कंचन की तीन बेटी और एक बेटा है। कंचन की मौत के बाद उनकी पत्नी वंदना और परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
कंचन के बुजुर्ग पिता को ढांढस बंधाने वालों का लगा तांता
कंचन के पिता जवाहरलाल शास्त्री अधिवक्ता के साथ ही अच्छे वक्ता और लेखक भी हैं। इसके साथ ही जवाहरलाल शास्त्री महामृत्युंजय महोत्सव के संयोजक भी हैं। जवाहरलाल शास्त्री के इकलौते पुत्र की मौत का समाचार मिलते ही शहर के संभ्रांत लोगों और उनके शुभचिंतकों का उनके घर पर जमावड़ा लग गया। सभी बुजुर्ग जवाहरलाल को ढांढस बंधा रहे थे। उधर, कंचन के करीबियों ने बताया कि वह लगभग डेढ़ दशक से चार्टर्ड अकाउंटेंट का काम कर रहे थे। संपन्न पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ ही कंचन बेहद ही मृदुभाषी और मिलनसार किस्म के थे। उनका एक मकान महमूरगंज क्षेत्र में भी है।
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कंचन के बुजुर्ग पिता को ढांढस बंधाने वालों का लगा तांता
कंचन के पिता जवाहरलाल शास्त्री अधिवक्ता के साथ ही अच्छे वक्ता और लेखक भी हैं। इसके साथ ही जवाहरलाल शास्त्री महामृत्युंजय महोत्सव के संयोजक भी हैं। जवाहरलाल शास्त्री के इकलौते पुत्र की मौत का समाचार मिलते ही शहर के संभ्रांत लोगों और उनके शुभचिंतकों का उनके घर पर जमावड़ा लग गया। सभी बुजुर्ग जवाहरलाल को ढांढस बंधा रहे थे। उधर, कंचन के करीबियों ने बताया कि वह लगभग डेढ़ दशक से चार्टर्ड अकाउंटेंट का काम कर रहे थे। संपन्न पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ ही कंचन बेहद ही मृदुभाषी और मिलनसार किस्म के थे। उनका एक मकान महमूरगंज क्षेत्र में भी है।
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