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फिलिपींस में पीएम मोदी, वाराणसी में खुलने वाले चावल अनुसंधान केंद्र के बारे में ली जानकारी
amarujala.com, presented by शशिकांत मिश्रा
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:42 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान की जानकारी लेते पीएम मोदी
- फोटो : twitter
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आसियान सम्मेलन में शिरकत करने के लिए फिलिपींस के दौरे पर हैं। फिलिपींस की राजधानी मनीला के पास लॉस बनोस में सोमवार को वो अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्हें वाराणसी में खुलने वाले चावल अनुसंधान केंद्र के बारे में जानकारी ली।
पीएमओ से इससे संबधित एक ट्वीट भी किया गया। इसमें लिखा गया कि वाराणसी का चावल केंद्र किसानों की आय बढ़ाने में और चावल की उत्कृष्ट उत्पादकता साबित करने में मददगार होगा। बता दें कि गत जुलाई में केंद्र ने वाराणसी में आईआरआरआई का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। फिलीपींस में आईआरआरआई के मुख्यालय से बाहर यह पहला शोध केंद्र होगा।
इस केंद्र के जरिए किसानों की आय,चावल उत्पादन में वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी के उपायों के साथ ही किसानों के कौशल विकास में मदद मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के मुख्यालय में पीएम मोदी एक किसान के रूप में भी नजर आए, जब उन्होंने खेत में फावड़ा चलाना शुरू कर दिया।
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पीएम मोदी यहां राइस फील्ड लैब का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने वहां काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों से मुलाकात की। उन्होंने उनकी प्रशंसा की। साथ ही वाराणसी में खुलने वाले आईआरआरआई के बारे में विस्तार से जानकारी ली। लॉस बेनोस में भारतीय वैज्ञानिक डॉ उमेश सिंह ने उन्हें जानकारी मुहैया कराई।
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पीएमओ से इससे संबधित एक ट्वीट भी किया गया। इसमें लिखा गया कि वाराणसी का चावल केंद्र किसानों की आय बढ़ाने में और चावल की उत्कृष्ट उत्पादकता साबित करने में मददगार होगा। बता दें कि गत जुलाई में केंद्र ने वाराणसी में आईआरआरआई का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। फिलीपींस में आईआरआरआई के मुख्यालय से बाहर यह पहला शोध केंद्र होगा।
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इस केंद्र के जरिए किसानों की आय,चावल उत्पादन में वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी के उपायों के साथ ही किसानों के कौशल विकास में मदद मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के मुख्यालय में पीएम मोदी एक किसान के रूप में भी नजर आए, जब उन्होंने खेत में फावड़ा चलाना शुरू कर दिया।
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पीएम मोदी यहां राइस फील्ड लैब का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने वहां काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों से मुलाकात की। उन्होंने उनकी प्रशंसा की। साथ ही वाराणसी में खुलने वाले आईआरआरआई के बारे में विस्तार से जानकारी ली। लॉस बेनोस में भारतीय वैज्ञानिक डॉ उमेश सिंह ने उन्हें जानकारी मुहैया कराई।
Indian scientists at IRRI brief PM @narendramodi on benefits of special rice varieties which provide substantial benefits to Indian farmers. Dr. Umesh Singh gave an overview of IRRI South Asian Regional Center in Varanasi. pic.twitter.com/B08i0pY8t3
— Raveesh Kumar (@MEAIndia) November 13, 2017
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पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संस्थान
PM modi in manila
इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईआरआरआई) चावल के बीज की बेहतर गुणवत्ता के विकास और भोजन की कमी के मुद्दे पर काम कर रहा है। इस संस्थान में बड़ी संख्या में भारतीय वैज्ञानिक भी काम करते हैं। राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र,वाराणसी के परिसर में यह खुलेगा।
साउथ एशिया रीजनल सेंटर का यह चावल अनुसंधान केंद्र पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संस्थान होगा। यहां चावल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता बेहतर करने के लिए शोध होगा। पूर्वी भारत के राज्यों में धान की खेती वर्षा पर निर्भर करती है।
कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ के कारण दक्षिण भारत की तरह पूर्वी भारत में धान की खेती अच्छी नहीं हो पाती। जो धान होती भी है उसके चावल उन्नत किस्म के नहीं होते।वाराणसी में खुलने वाला अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र इन्हीं समस्याओं पर काम करेगा।
केंद्र सरकार का मकसद चावल निर्यात में अव्वल होना है। वर्तमान में भारत चावल का बड़ा आयातक है। केंद्र सरकार कृषि को बढ़ावा देने का काम कर रही है। फिलिपींस से ही वाराणसी का अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र संचालित होगा।
उम्मीद है कि इस संस्थान से पूर्वी भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों में फूड प्रोडेक्शन और स्किल डेवलपमेंट में बढ़ोतरी होगी। 1960 में स्थापित यह केंद्र चावल अनुसंधान के मामले में सबसे पुराना और सबसे बना अनुसंधान केंद्र है।
साउथ एशिया रीजनल सेंटर का यह चावल अनुसंधान केंद्र पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संस्थान होगा। यहां चावल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता बेहतर करने के लिए शोध होगा। पूर्वी भारत के राज्यों में धान की खेती वर्षा पर निर्भर करती है।
कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ के कारण दक्षिण भारत की तरह पूर्वी भारत में धान की खेती अच्छी नहीं हो पाती। जो धान होती भी है उसके चावल उन्नत किस्म के नहीं होते।वाराणसी में खुलने वाला अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र इन्हीं समस्याओं पर काम करेगा।
केंद्र सरकार का मकसद चावल निर्यात में अव्वल होना है। वर्तमान में भारत चावल का बड़ा आयातक है। केंद्र सरकार कृषि को बढ़ावा देने का काम कर रही है। फिलिपींस से ही वाराणसी का अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र संचालित होगा।
उम्मीद है कि इस संस्थान से पूर्वी भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों में फूड प्रोडेक्शन और स्किल डेवलपमेंट में बढ़ोतरी होगी। 1960 में स्थापित यह केंद्र चावल अनुसंधान के मामले में सबसे पुराना और सबसे बना अनुसंधान केंद्र है।