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पीएम मोदी की रैली के लिए काट दी 40 बीघे में खड़ी गेहूं की हरी फसल
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 26 Feb 2017 12:10 PM IST
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पीएम नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री मोदी और बसपा की मायावती के आगमन के मद्देनजर सदर विधान सभा क्षेत्र के अलग अलग दो गांवों के लगभग 20 किसानों की 40 बीघे गेहूं की हरी फसल को कटवा दिया गया। किसानों का कहना है कि गांव के लोगों की इन फसलों को हल्ला बोलकर कटवा दिया गया।
बता दें कि पीएम मोदी का आगमन 27 फरवरी को होने वाला है। पहले उनका कार्यक्रम घोसी विधानसभा क्षेत्र के माउरबोझ में प्रस्तावित था लेकिन बाद में उसे बदल दिया गया। अब उनकी सभा के लिए आफिसर्स कालोनी के पश्चित हाइवे के पास सहरोज मौजे में होनी है।
हाइवे के पश्चिम छोटी सरयू नदी के उस पार की लगभग 40 बीघे क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं की खड़ी फसल को शुक्रवार सुबह हल्ला बोलकर कटवा दिया गया। उधर मायावती का आगमन 28 फरवरी को जिले में होना है।
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बता दें कि पीएम मोदी का आगमन 27 फरवरी को होने वाला है। पहले उनका कार्यक्रम घोसी विधानसभा क्षेत्र के माउरबोझ में प्रस्तावित था लेकिन बाद में उसे बदल दिया गया। अब उनकी सभा के लिए आफिसर्स कालोनी के पश्चित हाइवे के पास सहरोज मौजे में होनी है।
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हाइवे के पश्चिम छोटी सरयू नदी के उस पार की लगभग 40 बीघे क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं की खड़ी फसल को शुक्रवार सुबह हल्ला बोलकर कटवा दिया गया। उधर मायावती का आगमन 28 फरवरी को जिले में होना है।
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काट दी गई किसानों की 40 बीघे गेहूं की हरी फसल
मायावती
उनके लिए मऊ बलिया स्टेट हाइवे के किनारे सिकठिया ओवर ब्रिज से एक किलेमीटर पूरब खालिसपुर गांव में लगभग 15 बीघे क्षेत्रफल में गली गेहूं की हरी फसल को चार दिन पहले ही कटवा दिया गया।
अब तो वाहं पर टेंट लगाने , मंच बनाने और बेरिकेटिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। इस बाबत किसान नेता देवप्रकाश राय का कहना है कि किसानों के हित का दम भरने वाली भाजपा किसानों की बहुमूल्य फसल पर हंसिया तो चलवा ही रही है यह राष्ट्रीय क्षति कर रही है।
हरी फसल कटवाना राष्ट्रहित के विरुद्ध है। उनका तर्क है कि चुनावी सभा के लिए अनुपजाऊ और बंजर भूमि का चयन करना चाहिए न कि कृषि योग्य भूमि जिस पर किसानों की छह महीने की कमाई तो है ही देश के लिए अनाज पैदा करने वाली भूमि पर ।
अब तो वाहं पर टेंट लगाने , मंच बनाने और बेरिकेटिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। इस बाबत किसान नेता देवप्रकाश राय का कहना है कि किसानों के हित का दम भरने वाली भाजपा किसानों की बहुमूल्य फसल पर हंसिया तो चलवा ही रही है यह राष्ट्रीय क्षति कर रही है।
हरी फसल कटवाना राष्ट्रहित के विरुद्ध है। उनका तर्क है कि चुनावी सभा के लिए अनुपजाऊ और बंजर भूमि का चयन करना चाहिए न कि कृषि योग्य भूमि जिस पर किसानों की छह महीने की कमाई तो है ही देश के लिए अनाज पैदा करने वाली भूमि पर ।