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महामना के पौत्र ने फिरोज खान की नियुक्ति को सही ठहराया
Fri, 22 Nov 2019 12:15 AM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Fri, 22 Nov 2019 12:15 AM IST
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बीएचयू के चांसलर गिरधर मालवीय।
- फोटो : ANI
बीएचयू के एसवीडीवी में डॉ. फिरोज की नियुक्ति के विरोध और देश भर में इसको लेकर प्रतिक्रिया के बीच महामना मदर मोहन मालवीय के पौत्र और बीएचयू के चांसलर न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय का बयान आया है। एक वीडियो जारी कर मालवीय ने छात्रों के धरने को गलत बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि इस मामले में छात्रों को सही ढंग से समझाने की जरूरत है। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर आज बीएचयू के संस्थापक महामना पं. मदनमोहन मालवीय होते तो डॉ. फिरोज खान के नाम पर पहले मुहर लगाते।
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बीएचयू मीडिया सेल के व्हाटसएप ग्रुप पर न्यायमूर्ति के इस 2.02 मिनट के वीडियो को शेयर भी किया गया है। इसमें मालवीय का कहना है कि छात्र जो कर रहे हैं वह गलत है। ऐसी दशा में उन्हें सही ढंग से समझाने वाला कोई नहीं है।
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एएनआई को दिए अपने बयान में मालवीय ने स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से यात्रा न कर पाने का हवाला देते हुए मालवीय ने अपने बयान में कहा कि अगर स्वास्थ्य ठीक रहता तो वह बीएचयू जरूरत आते। एक मुस्लिम विद्वान का धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति करना गलत है। क्यों ठीक है, यह भी जानना जरूरी है। चयन समिति ने भी विद्वता को माना है।
बीएचयू में छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। यह परंपरा है कि ज्ञान कहीं से मिले लेना चाहिए। भगवान राम ने लक्ष्मण को रावण के पास ज्ञान प्राप्ति के लिए भेज दिया था। ऐसे में छात्रों का यह कहना कि मुस्लिम शिक्षक संस्कृत नहीं पढ़ा सकते, यह गलतफहमी है।
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कुलपति ने भी इस परिस्थिति में नियुक्ति न करने के बारे में पूछा था। बताया कि लगता है या तो कुछ शिक्षकों को एतराज हो और उन्होंने छात्रों को समझा रखा है। अगर ऐसा है तो वह गलत है। छात्रों को अपनी जिद छोड़कर धरना समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समझा जा रहा है कि जल्द ही वहां सदबुद्धि का प्रसार होगा।
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