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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Maha Kumbh 2700 cameras two ISRO satellites also monitored Know work was done

Mahakumbh 2025: 2700 कैमरे, इसरो के दो सैटेलाइट ने भी की महाकुंभ की निगरानी; जानें- कैसे होता था काम

Sun, 02 Mar 2025 05:40 PM IST
अमन विश्वकर्मा हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 02 Mar 2025 05:40 PM IST
सार

सनातन धर्म के सबसे बड़े आयोजन महाकुंभ का समापन हो गया। इसमें श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सभी एजेंसिया अपने-अपने स्तर से कार्यरत थीं। आपदा मैनेजमेंट के लिए हर जरूरी डेटा शासन को उपलब्ध कराया गया।

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Maha Kumbh 2700 cameras two ISRO satellites also monitored Know work was done
सैटेलाइट से की गई महाकुंभ की निगरानी। - फोटो : Istock

विस्तार

Mahakumbh 2025: 2700 सीसी कैमरों के साथ ही आकाश में चक्कर मार रहे इसरो के दो सैटेलाइट्स भी महाकुंभ की निगरानी कर रहे थे। दो महीने तक रियल टाइम लोकेशन आधारित मेले की पूरी डिजिटल मैपिंग की गई। आपदा मैनेजमेंट के लिए हर जरूरी डेटा शासन को उपलब्ध कराया गया। 

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ये बातें आईआईटी-बीएचयू में पहुंचे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग आईआईआरएस, इसरो के डायरेक्टर डॉ. प्रकाश चौहान ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि ये दोनों इसरो की रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स कार्टोसेट-1 और कार्टोसेट-2 थे। ये करीब 500 मीटर की ऊंचाई पर चक्कर काट रहे थे। 
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इन्हीं की मदद से मेला प्रशासन को डेटा प्रोवाइड कराया गया। महाकुंभ मेला में कहां पर ज्यादा लोग स्नान कर रहे थे। कौन से नए जगह बने हैं। सड़कों पर कितनी भीड़ है और किधर का रूट खाली है। महाकुंभ मेला क्षेत्र के लिए सैटेलाइट फोटो के साथ ओवरऑल एसेसमेंट के लिए भी डेटा प्रशासन को दिया गया। 
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इसमें पांटून पुल, नए-नए बनने वाले टेंट और शिविरों का रियल टाइम लोकेशन और पूरी तस्वीर दी जाती थी। इन सबकी बड़े स्तर पर मैपिंग करने के लिए हाई रिजॉल्यूशन इमेज दी गई थी।

गंगा-यमुना में दो दिन पहले मिलेगा बाढ़ का अलर्ट
डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा कि उत्तर भारत में भी सैटेलाइट के द्वारा बाढ़ से 48 घंटे पहले ही बाढ़ का अलर्ट जारी किया जाएगा। यहां पर सेंट्रल वाटर कमीशन के माध्यम से जल्द ही इसकी शुरुआत की जाएगी। कमीशन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जानी है। इस तकनीक के द्वारा प्रायद्वीपीय भारत की दो नदियों तापी और गोदावरी बेसिन की मॉनिटरिंग की जा रही है।

यहां पर दो दिन पहले ही बाढ़ का अलर्ट जारी किया जाता है। जल्द ही गंगा और उत्तर भारत की नदियों में भी लागू किया जाएगा। इसके अलावा वनों की आग को भी रोका जाएगा। सैटेलाइट से जंगल में कहां-कहां आग लगी है, उसकी जानकारी नजदीकी वन विभाग कार्यालय को भेज दे रहे थे।

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