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लापरवाही पड़ी भारी, मासूम बच्ची सहित परिजनों पर आफत
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वाराणसी। मंडौली निवासी दवा कारोबारी की जरा सी लापरवाही न केवल उसके परिवार बल्कि उसके संपर्क में आने वाले और लोगों के परिवारों पर भी भारी पड़ी। इसके चलते डेढ़ माह की बच्ची समेत घर के चार सदस्य कोरोना की चपेट में आ गए। इसमें कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही भी प्रमुख कारण है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे से जहां लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है वही मंडौली निवासी कोरोना पॉजिटिव युवक ने खूब लापरवाही बरती। यही कारण है कि उसने अपने घर के सदस्यों के साथ ही चार दूसरे परिवारों की जान भी सांसत में डाल दी है।
20 अप्रैल को सैंपलिंग के बाद उसे डाक्टरों ने घर मे ही क्वारंटीन रहने को कहा था, लेकिन उसने इसकी अनदेखी करते हुए न केवल कालोनी बल्कि बाहर भी बेधड़क घूमता रहा। इस बीच लोगों ने भी उसे मना किया, लेकिन उसने किसी की न सुनी। इसी लापरवाही का ही नतीजा है कि कोरोना संक्रमण की चेन मजबूत होती गई और एक के बाद एक आठ लोग इसकी जद में आ गए। उसने जिस तरह की लापरवाही की है , उसके आधार पर अभी और कितने लोग आ सकते हैं, इस बारे में कुछ कहा नही जा सकता है।
तब लिया खाने का पैकेट, अब सता रहा डर
सूत्रों के अनुसार घर से सप्तसागर दवा मंडी आने के बाद युवक रोजाना करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मियों में खाने का पैकेट, लस्सी बांटता था। रविवार को वायरल एक वीडियो में भी शहर के अलग अलग चौराहों पर दरोगा और पुलिसकर्मियों में पैकेट बांटते युवक नजर आ रहा है। तब उससे खाने का पैकेट लेने वाले लोग भी अब उसके संपर्क में आने वालों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डरे हैं। खास बात यह है कि इतने लोगों से वह मिल चुका है कि ऐसे सभी लोगों की तलाश और जांच करना स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान नहीं होगा।
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रसूख में वीआईपी पास देकर भूल गया प्रशासन
मंडोली निवासी दवा कारोबारी रसूख वाला था और इसी चक्कर में प्रशासन ने उसे वीआईपी पास जारी तो कर दिया, लेकिन उसके बाद उसका किस तरह से उपयोग हो रहा है नियमों का पालन हो रहा है कि नहीं, इसके तरफ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। आमतौर पर जो लोगों को पास जारी किए जाते हैं वह बस एक निश्चित जगह से आने-जाने और कुछ समय के लिए होते हैं, लेकिन इस दवा कारोबारी को शहर के सभी जगहों पर भ्रमण करने के साथ ही 24 घंटे का पास प्रशासन ने जारी किया। किसी तरह की मानिटरिंग ना होने का ही फायदा था कि वह बेधड़क कहीं भी आता जाता रहा और बिना मास्क,ग्लब्स के प्रयोग के लोगों में खाने का पैकेट भी बांटता रहा।
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20 अप्रैल को सैंपलिंग के बाद उसे डाक्टरों ने घर मे ही क्वारंटीन रहने को कहा था, लेकिन उसने इसकी अनदेखी करते हुए न केवल कालोनी बल्कि बाहर भी बेधड़क घूमता रहा। इस बीच लोगों ने भी उसे मना किया, लेकिन उसने किसी की न सुनी। इसी लापरवाही का ही नतीजा है कि कोरोना संक्रमण की चेन मजबूत होती गई और एक के बाद एक आठ लोग इसकी जद में आ गए। उसने जिस तरह की लापरवाही की है , उसके आधार पर अभी और कितने लोग आ सकते हैं, इस बारे में कुछ कहा नही जा सकता है।
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तब लिया खाने का पैकेट, अब सता रहा डर
सूत्रों के अनुसार घर से सप्तसागर दवा मंडी आने के बाद युवक रोजाना करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मियों में खाने का पैकेट, लस्सी बांटता था। रविवार को वायरल एक वीडियो में भी शहर के अलग अलग चौराहों पर दरोगा और पुलिसकर्मियों में पैकेट बांटते युवक नजर आ रहा है। तब उससे खाने का पैकेट लेने वाले लोग भी अब उसके संपर्क में आने वालों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डरे हैं। खास बात यह है कि इतने लोगों से वह मिल चुका है कि ऐसे सभी लोगों की तलाश और जांच करना स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान नहीं होगा।
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रसूख में वीआईपी पास देकर भूल गया प्रशासन
मंडोली निवासी दवा कारोबारी रसूख वाला था और इसी चक्कर में प्रशासन ने उसे वीआईपी पास जारी तो कर दिया, लेकिन उसके बाद उसका किस तरह से उपयोग हो रहा है नियमों का पालन हो रहा है कि नहीं, इसके तरफ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। आमतौर पर जो लोगों को पास जारी किए जाते हैं वह बस एक निश्चित जगह से आने-जाने और कुछ समय के लिए होते हैं, लेकिन इस दवा कारोबारी को शहर के सभी जगहों पर भ्रमण करने के साथ ही 24 घंटे का पास प्रशासन ने जारी किया। किसी तरह की मानिटरिंग ना होने का ही फायदा था कि वह बेधड़क कहीं भी आता जाता रहा और बिना मास्क,ग्लब्स के प्रयोग के लोगों में खाने का पैकेट भी बांटता रहा।